आपका WhatsApp और Signal अभी भी सेफ है? रूसी हैकर्स ने जो किया वो जानकर उड़ जाएंगे होश!
डच इंटेलिजेंस अलर्ट, रूस समर्थित हैकर्स WhatsApp-Signal पर फिशिंग-मैलवेयर से हमला, सरकारी अधिकारी-पत्रकार मुख्य टारगेट, एन्क्रिप्शन के बावजूद खतरा
WhatsApp security risk: अगर आप सोचते हैं कि WhatsApp और Signal पर की गई आपकी बातें पूरी तरह सुरक्षित हैं तो यह खबर आपको झकझोर कर रख देगी। दुनिया के सबसे भरोसेमंद मैसेजिंग ऐप्स में शुमार WhatsApp और Signal को लेकर एक बड़ा साइबर सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया गया है। डच इंटेलिजेंस एजेंसी ने चेतावनी दी है कि रूस समर्थित हैकर्स एक बड़े और संगठित साइबर हमले को अंजाम दे रहे हैं जिसमें इन दोनों ऐप्स के यूजर्स को निशाना बनाया जा रहा है। यह साइबर हमला एक वैश्विक खतरे का रूप लेता जा रहा है जिसे लेकर दुनिया भर की सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट पर हैं।
WhatsApp security risk: डच इंटेलिजेंस का बड़ा खुलासा
नीदरलैंड की खुफिया एजेंसी ने जो जानकारी सामने रखी है वह किसी को भी बेचैन करने के लिए काफी है। एजेंसी के मुताबिक रूस से जुड़े हैकर्स का एक संगठित समूह लंबे समय से WhatsApp और Signal के यूजर्स को ट्रैक कर रहा है। यह हैकर्स इन ऐप्स की एंड टू एंड एन्क्रिप्शन को सीधे तोड़ने की कोशिश नहीं कर रहे बल्कि वे दूसरे और ज्यादा चालाक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें फिशिंग अटैक, मैलवेयर इंस्टालेशन और डिवाइस हैकिंग जैसे तरीके शामिल हैं जिनसे यूजर के फोन तक सीधी पहुँच बना ली जाती है। एजेंसी ने बताया कि इन हमलों में खास तकनीक का इस्तेमाल होता है।
WhatsApp security risk: सरकारी अधिकारी और पत्रकार बने मुख्य निशाना
इस साइबर हमले में जिन लोगों को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है उनमें सरकारी अधिकारी, रक्षा मंत्रालय से जुड़े लोग, सेना के जवान और वे पत्रकार शामिल हैं जो रूस या मिडल ईस्ट से जुड़ी खबरें कवर करते हैं। हैकर्स की नजर इन लोगों के फोन पर इसलिए है क्योंकि इनके पास ऐसी संवेदनशील जानकारियाँ होती हैं जो किसी देश की सुरक्षा नीति या राजनीतिक रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला महज जासूसी तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल गलत सूचनाएँ फैलाने, लोगों को ब्लैकमेल करने और किसी देश की आंतरिक नीतियों को प्रभावित करने के लिए भी किया जा सकता है।
WhatsApp security risk: एंड टू एंड एन्क्रिप्शन का क्या होता है?
WhatsApp और Signal दोनों ऐप्स एंड टू एंड एन्क्रिप्शन का दावा करते हैं जिसका मतलब है कि भेजने वाले और पाने वाले के अलावा कोई तीसरा इंसान उस मैसेज को नहीं पढ़ सकता। लेकिन साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ बताते हैं कि एन्क्रिप्शन सिर्फ ट्रांजिट के दौरान सुरक्षा देता है यानी जब मैसेज एक फोन से दूसरे फोन तक जा रहा होता है। अगर हैकर ने आपके फोन में ही घुसपैठ कर ली तो एन्क्रिप्शन किसी काम का नहीं रहता क्योंकि मैसेज आपके फोन में डिक्रिप्टेड यानी पढ़ने योग्य रूप में ही मौजूद होता है। यही वह तकनीकी खामी है जिसका फायदा रूसी हैकर्स उठा रहे हैं।
WhatsApp security risk: आप खुद को कैसे बचाएं
इस खतरे से बचने के लिए साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने कुछ जरूरी सावधानियाँ बताई हैं जिन्हें हर यूजर को अपनाना चाहिए:
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अनजान लिंक से बचें: किसी अनजान नंबर से आए लिंक पर कभी क्लिक न करें चाहे वह कितना भी आकर्षक क्यों न लगे।
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सॉफ्टवेयर अपडेट रखें: अपने फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम और सभी ऐप्स को हमेशा अपडेट रखें क्योंकि अपडेट में सुरक्षा खामियों को दूर किया जाता है।
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टू स्टेप वेरिफिकेशन: अपने WhatsApp और Signal अकाउंट पर टू स्टेप वेरिफिकेशन जरूर चालू करें। इससे अगर कोई आपका अकाउंट दूसरे डिवाइस पर खोलने की कोशिश करे तो उसे एक अतिरिक्त कोड की जरूरत पड़ेगी।
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आधिकारिक ऐप स्टोर: किसी भी अनजान ऐप को अपने फोन में इंस्टाल न करें और केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करें।
WhatsApp security risk: भारत में भी बढ़ रहा साइबर खतरा
यह खतरा सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं है। भारत में भी साइबर हमलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और सरकारी एजेंसियाँ इसे लेकर पहले से सतर्क हैं। भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम यानी CERT-In ने भी पहले कई मौकों पर मैसेजिंग ऐप्स से जुड़े खतरों के बारे में अलर्ट जारी किए हैं। भारत में WhatsApp के करोड़ों यूजर हैं और इनमें से बड़ी संख्या में लोग इस ऐप का इस्तेमाल संवेदनशील जानकारियाँ साझा करने के लिए भी करते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि हर भारतीय यूजर इस अलर्ट को गंभीरता से ले और अपनी डिजिटल सुरक्षा को लेकर सजग रहे। डिजिटल युग में जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
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