चुनावी हलफनामे में गड़बड़ी,- बिहार के 42 विधायकों पर लटकी सदस्यता रद्द होने की तलवार, पटना HC ने स्पीकर को भी भेजा नोटिस

पटना हाईकोर्ट में हलफनामे में गड़बड़ी के आरोप, NDA के 32 और RJD के 8 विधायक शामिल, स्पीकर को भी नोटिस

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Bihar Politics: नवंबर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद हारे हुए प्रत्याशियों ने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 42 विधायकों पर चुनावी शपथपत्र में जानकारी छिपाने और गलत तथ्य देने के आरोप हैं। इनमें NDA के 32 और RJD के 8 विधायक शामिल हैं।

Bihar Politics: याचिकाओं में लगाए गए मुख्य आरोप

इन याचिकाओं में मुख्य रूप से पांच प्रकार के आरोप लगाए गए हैं:

  • नियमों का उल्लंघन: मतदान और मतगणना के दौरान नियमों का सही पालन न करने का आरोप।

  • नामांकन प्रक्रिया: नामांकन प्रक्रिया में जरूरी औपचारिकताओं की अनदेखी।

  • जानकारी छिपाना: शपथपत्र में महत्वपूर्ण जानकारियां जानबूझकर छिपाना।

  • गलत ब्यौरा: संपत्ति और आपराधिक मामलों के ब्यौरे में गलत या भ्रामक जानकारी देना।

  • चुनाव परिणाम: इन गड़बड़ियों की वजह से चुनाव परिणाम का प्रभावित होना और निर्वाचन को अवैध घोषित करने की मांग।

दलीय स्थिति: किस दल के कितने विधायक?

इस पूरे मामले में विभिन्न राजनीतिक दलों के निर्वाचित सदस्य शामिल हैं:

  • भारतीय जनता पार्टी (25 विधायक): माधव आनंद, अजय कुमार, राजेश कुमार सिंह, रितुराज कुमार, डॉ. सुनील कुमार, जितेन्द्र कुमार, बाबुलाल सौहारिया, आई.पी. गुप्ता, सतीश कुमार सिंह, कविता देवी, हरि नारायण सिंह, रितेश कुमार सिंह, अभिषेक आनंद, रमा निषाद, राज कुमार राय, विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार, विशिष्ट सिंह, जीवेश मिश्रा, सुभानंद मुकेश, विनोद नारायण झा, विजय सिंह और अनिल कुमार समेत अन्य।

  • राष्ट्रीय जनता दल (8 विधायक): फैजल रहमान, देवयंती यादव, अभिषेक रंजन, मनोज विश्वास, चेतन आनंद, अनिता, एमडी तौशिफ आलम और अमरेन्द्र कुमार।

  • जनता दल यूनाइटेड (7 विधायक): कौशल किशोर, संगीता कुमार, कृष्ण मुरारी शरण, विनय कुमार चौधरी, बिजेन्द्र यादव, वैद्यनाथ प्रसाद और रत्नेश सदा।

  • अन्य: कांग्रेस के प्रवेज आलम और CPI(ML) के संदीप सौरभ।

Bihar Politics: विवाद की पृष्ठभूमि

  • चुनाव नतीजे: 14 नवंबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे जिनमें एनडीए गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला था।

  • कानूनी चुनौती: नतीजे घोषित होते ही हारे हुए उम्मीदवारों ने विजयी प्रत्याशियों के चुनाव को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी।

  • याचिकाकर्ताओं का तर्क: यदि शपथपत्र में दी गई जानकारी सही होती तो मतदाताओं का निर्णय अलग हो सकता था।

Bihar Politics: भविष्य की कानूनी प्रक्रिया

  • नोटिस और जवाब: नोटिस मिलने के बाद अब सभी 42 विधायकों को अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा।

  • विस्तृत सुनवाई: जवाब और साक्ष्यों के आधार पर अलग-अलग तिथियों पर विस्तृत सुनवाई होगी।

  • संभावित परिणाम: अगर अदालत किसी विधायक के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही मानती है तो उनकी विधायकी रद्द हो सकती है।

निष्कर्ष: यह मामला बिहार की राजनीति पर गहरा असर डाल सकता है और आने वाले महीनों में इस पर सबकी नजर रहेगी। सदन में बजट सत्र के बीच यह एक बड़ा कानूनी संकट है।

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