28 फरवरी के हमले में घायल हुए ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई, हाथ-पैर में आई गंभीर चोटें; राजदूत के खुलासे से मिडिल ईस्ट की राजनीति में मचा हड़कंप
28 फरवरी हमले में मोजतबा खामेनेई घायल, हाथ-पैर में चोट; क्षेत्रीय तनाव बढ़ा
Mojtaba Khamenei attack: मिडिल ईस्ट में इन दिनों जो उथलपुथल मची हुई है उसने पूरी दुनिया की नजरें इस क्षेत्र पर टिका दी हैं। इस बीच एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई 28 फरवरी को हुए हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके हाथों और पैरों में चोटें आई हैं। साइप्रस में तैनात ईरान के राजदूत ने इस बारे में कुछ अहम जानकारियां सार्वजनिक की हैं जिसके बाद यह मामला अंतरराष्ट्रीय राजनीति में केंद्र बिंदु बन गया है।
Mojtaba Khamenei attack: कौन हैं मोजतबा खामेनेई
मोजतबा खामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के पुत्र हैं। लंबे समय से यह माना जा रहा था कि वे अपने पिता के उत्तराधिकारी बन सकते हैं और आखिरकार ऐसा ही हुआ। उन्हें ईरान का नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया। मोजतबा ईरान की राजनीति में एक बेहद प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी आईआरजीसी के साथ उनके करीबी संबंध किसी से छुपे नहीं हैं। उनके सुप्रीम लीडर बनने के बाद से ही पश्चिमी देश और इजरायल उन्हें लेकर सतर्क हो गए थे।
Mojtaba Khamenei attack: 28 फरवरी का वो खतरनाक हमला
28 फरवरी 2026 को ईरान पर एक बड़ा हमला हुआ। इस हमले को इजरायल और अमेरिका से जोड़कर देखा जा रहा है। हमले के दौरान कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसी हमले में मोजतबा खामेनेई भी घायल हो गए। शुरुआत में ईरान की तरफ से इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई थी। सरकार ने इस खबर को दबाने की कोशिश की लेकिन धीरे धीरे सच्चाई बाहर आने लगी। साइप्रस में ईरान के राजदूत ने पुष्टि की कि मोजतबा खामेनेई उस हमले में घायल हुए थे।
Mojtaba Khamenei attack: चोटों की प्रकृति और मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति
राजदूत की ओर से मिली जानकारी के अनुसार मोजतबा खामेनेई के पैरों और हाथों पर हमले के दौरान गंभीर चोटें आईं। हालांकि उनकी जान को फिलहाल कोई खतरा नहीं है और वे उपचाराधीन हैं। यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ये चोटें किस तरह के हथियार या विस्फोट से हुई हैं। ईरान सरकार अपने सर्वोच्च नेता की सेहत से जुड़ी जानकारी बेहद सीमित तरीके से सार्वजनिक करती है। इसलिए जो जानकारी राजदूत ने दी है वह बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम लीडर का इस तरह घायल होना ईरान के लिए न केवल सुरक्षा की दृष्टि से बल्कि राजनीतिक रूप से भी बड़ा झटका है।
Mojtaba Khamenei attack: ईरान की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा
मोजतबा खामेनेई का घायल होना ईरान की आंतरिक राजनीति के लिए भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। वे अभी बेहद कम समय से सुप्रीम लीडर की कुर्सी पर बैठे हैं और इतने शुरुआती दौर में ही उनका इस तरह घायल होना उनकी सत्ता को लेकर कई अटकलों को जन्म दे रहा है। ईरान के कट्टरपंथी गुट पहले से ही बाहरी हमलों को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाने की मांग करते रहे हैं। सुप्रीम लीडर के घायल होने की खबर के बाद इन गुटों का दबाव और बढ़ सकता है। वे इसे राष्ट्रीय अपमान के रूप में देख रहे हैं और जवाबी कार्रवाई की मांग तेज कर सकते हैं।
Mojtaba Khamenei attack: इजरायल और अमेरिका की भूमिका पर सवाल
28 फरवरी के हमले को लेकर ईरान ने इजरायल और अमेरिका पर आरोप लगाए हैं। ईरान का कहना है कि यह एक सुनियोजित हमला था जिसका मकसद उसकी नेतृत्व संरचना को कमजोर करना था। हालांकि इजरायल और अमेरिका ने इन आरोपों पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह साबित हो जाता है कि इस हमले में किसी विदेशी ताकत का हाथ था तो इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। ईरान पहले से ही अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों के निशाने पर है।
Mojtaba Khamenei attack: मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव
मोजतबा खामेनेई के घायल होने की खबर ऐसे समय में आई है जब मिडिल ईस्ट पहले से ही धधक रहा है। गाजा में संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा। लेबनान में हालात नाजुक बने हुए हैं। यमन के हूती लड़ाके लाल सागर में अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए हैं और अब ईरान के सर्वोच्च नेता के घायल होने की खबर ने पूरे क्षेत्र में नई बेचैनी पैदा कर दी है। भारत समेत कई देशों की नजरें इस स्थिति पर टिकी हैं क्योंकि मिडिल ईस्ट में किसी भी बड़े बदलाव का असर तेल की कीमतों से लेकर समुद्री व्यापार मार्गों तक हर चीज पर पड़ता है।
Mojtaba Khamenei attack: ईरान की चुप्पी और दुनिया के सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान सरकार ने खुद इस बारे में कोई आधिकारिक बयान क्यों नहीं दिया। राजदूत की ओर से जानकारी मिलना एक असामान्य बात है। आमतौर पर ईरान अपने शीर्ष नेतृत्व की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी बेहद गोपनीय रखता है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की यह चुप्पी दरअसल एक रणनीतिक फैसला है। वे नहीं चाहते कि दुश्मन देशों को यह पता चले कि उनके सुप्रीम लीडर किस हद तक प्रभावित हुए हैं। लेकिन राजदूत की टिप्पणी के बाद अब यह खबर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में तेजी से फैल गई है।
आगे क्या होगा
आने वाले दिनों में मोजतबा खामेनेई की सेहत और उनकी राजनीतिक सक्रियता पर दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी। अगर वे जल्द ही सार्वजनिक रूप से सामने आते हैं तो इससे ईरान यह संदेश देने की कोशिश करेगा कि उसकी नेतृत्व शक्ति बरकरार है। लेकिन अगर उनकी अनुपस्थिति लंबी रही तो इससे ईरान के भीतर और बाहर दोनों जगह अस्थिरता बढ़ सकती है। मिडिल ईस्ट की यह स्थिति दुनिया के लिए बेहद संवेदनशील है। ईरान के सर्वोच्च नेता का घायल होना इस पूरे संकट को एक नए और खतरनाक मोड़ पर ले जा सकता है।
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