अमेरिका-इजरायल के हमलों से कमजोर पड़ी ईरान की मिसाइल ताकत! शुरुआती हमलों में सैकड़ों ड्रोन-मिसाइल दागने वाला ईरान अब सीमित क्षमता में, ट्रंप का दावा—बड़ी सैन्य ताकत नष्ट
अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद ईरान की ड्रोन-मिसाइल क्षमता घटी, ट्रंप का दावा
US Israel strikes Iran: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष एक निर्णायक मोड़ पर आ पहुँचा है। एक समय जो ईरान पूरे क्षेत्र में सबसे ताकतवर मिसाइल शक्ति माना जाता था, उसकी हमलावर क्षमता अब पहले जैसी नहीं रही।
US Israel strikes Iran: युद्ध के पहले दिनों में ईरान ने कितने मिसाइल और ड्रोन दागे थे
संघर्ष के शुरुआती चरण में ईरान ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। उसने बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें और शाहेद श्रृंखला के ड्रोन दागे जो इजरायल और क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहे थे। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार युद्ध के प्रारंभिक हफ्तों में ईरान ने एक बड़े हमले में सैकड़ों की तादाद में मिसाइलें और ड्रोन एक साथ दागे थे जो उसकी सैन्य शक्ति का अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन था। इस हमले से पूरी दुनिया हक्काबक्का रह गई थी।
US Israel strikes Iran: अब ईरान कितने मिसाइल और ड्रोन दाग पा रहा है और क्यों घटी यह संख्या
अमेरिकी और इजरायली हमलों की बौछार के बाद ईरान के मिसाइल उत्पादन केंद्रों, भंडारण स्थलों और लॉन्च पैड्स को भारी नुकसान पहुँचा है। अब ईरान जो हमले कर रहा है उनकी संख्या पहले के मुकाबले बहुत कम है और उनकी तीव्रता भी घट गई है। पेंटागन के अधिकारियों के हवाले से आई जानकारी के अनुसार ईरान के कई प्रमुख मिसाइल निर्माण और भंडारण ठिकानों को निशाना बनाया गया है जिससे उसकी हमलावर क्षमता में उल्लेखनीय कटौती हुई है। हालाँकि ईरान अभी भी पूरी तरह निरस्त्र नहीं हुआ है।
US Israel strikes Iran: व्हाइट हाउस और ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर क्या दावा किया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी और इजरायली संयुक्त सैन्य कार्रवाई ने ईरान की युद्धक क्षमताओं को बड़े पैमाने पर नष्ट कर दिया है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयानों में कहा गया कि ईरान अब उस स्थिति में नहीं है जिसमें वह युद्ध की शुरुआत में था। हालाँकि अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञ इन दावों को पूरी तरह स्वीकार नहीं करते। उनका कहना है कि ईरान के पास अभी भी पर्याप्त क्षमता है कि वह इजरायल और पड़ोसी देशों को नुकसान पहुँचा सके। इसलिए इस संघर्ष को समाप्त नहीं माना जा सकता।
US Israel strikes Iran: ईरान के पास अभी भी कितनी सैन्य ताकत बची है
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने अपनी सैन्य शक्ति को केंद्रित और विकेंद्रित दोनों रूपों में सँजो रखा था। जो ठिकाने नष्ट हुए हैं वे सार्वजनिक रूप से ज्ञात थे लेकिन ईरान के पास कई गुप्त भूमिगत सुविधाएँ भी हैं जो अभी तक सुरक्षित बताई जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय सामरिक अध्ययन संस्थान के विश्लेषकों के अनुसार ईरान की बची हुई मिसाइल क्षमता अभी भी इतनी है कि वह क्षेत्र में किसी भी देश के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। उसके पास मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन के कई संस्करण अभी भी मौजूद हैं।
US Israel strikes Iran: इस युद्ध का मध्य पूर्व की स्थिरता पर क्या असर पड़ रहा है
यह संघर्ष केवल ईरान और इजरायल के बीच नहीं है। इसके प्रभाव पूरे मध्य पूर्व में महसूस किए जा रहे हैं। सीरिया, इराक, लेबनान और यमन जैसे देशों में ईरान समर्थित ताकतें सक्रिय हैं और इस युद्ध का असर वहाँ भी दिख रहा है। तेल उत्पादक देशों में अस्थिरता से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी गहरा असर पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव जारी है और इसका असर भारत सहित दुनिया के तमाम देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है।
US Israel strikes Iran: भारत और दुनिया के अन्य देशों पर इस युद्ध का क्या प्रभाव पड़ रहा है
भारत के लिए यह संघर्ष कई कारणों से महत्वपूर्ण है। लाखों भारतीय नागरिक मध्य पूर्व के विभिन्न देशों में काम करते हैं और उनकी सुरक्षा एक प्राथमिक चिंता है। इसके अलावा भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इस क्षेत्र से आयात करता है। विदेश नीति विशेषज्ञों के अनुसार भारत इस संघर्ष में सतर्क और संतुलित रुख बनाए हुए है। भारत ने ईरान और इजरायल दोनों के साथ अपने संबंध बनाए रखे हैं और कूटनीतिक रास्ते से शांति की अपील जारी रखी है।
US Israel strikes Iran: आगे क्या होगा और क्या ईरान युद्धविराम के लिए तैयार होगा
इस संघर्ष का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। ईरान ने सार्वजनिक रूप से हार मानने से इनकार किया है और उसके सर्वोच्च नेतृत्व ने प्रतिरोध जारी रखने की बात कही है। दूसरी ओर अमेरिका और इजरायल भी अपनी शर्तों पर ही किसी समझौते के लिए तैयार दिखते हैं। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के प्रयास जारी हैं। कतर, तुर्की और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि बातचीत के लिए संपर्क कर रहे हैं लेकिन अभी तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष निकट भविष्य में पूरी तरह समाप्त होने की संभावना कम है।
निष्कर्ष
ईरान की सैन्य क्षमता में आई कमी निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है लेकिन इसे ईरान की पूर्ण सैन्य पराजय मानना जल्दबाजी होगी। युद्ध के मैदान में जो दिखता है वह पूरी सच्चाई नहीं होती। इतिहास गवाह है कि जब कोई देश अपनी अस्मिता और अस्तित्व के लिए लड़ता है तो वह अंतिम साधन तक लड़ता है। मध्य पूर्व में स्थायी शांति के लिए सैन्य समाधान नहीं बल्कि कूटनीतिक संवाद ही एकमात्र रास्ता है।
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