ईरान जंग की आग भारत तक पहुंची! गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को किया अलर्ट
ईरान जंग का डर, सेंसेक्स 914 अंक गिरा, निफ्टी 24,932 पर; लाखों करोड़ डूबे, रुपया भी 91.29 पर कमजोर
Iran war impact India: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखा। बाजार खुलते ही सेंसेक्स 914 अंक से अधिक टूट गया और निफ्टी 25000 के अहम स्तर से नीचे जा गिरा। हर सेक्टर में बिकवाली देखी गई और निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये एक झटके में स्वाहा हो गए।
Iran war impact India: दलाल स्ट्रीट तक पहुँची मिडिल ईस्ट की जंग
मिडिल ईस्ट में भड़की जंग की आग सोमवार को दलाल स्ट्रीट तक आ पहुँची। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद पूरे मध्य पूर्व में भारी अनिश्चितता का माहौल है और इसका सीधा असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर पड़ा। भारतीय बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा। सोमवार की सुबह जैसे ही बाजार खुला वैसे ही बड़े पैमाने पर बिकवाली शुरू हो गई और देखते ही देखते बाजार में हाहाकार मच गई।
Iran war impact India: सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट
सोमवार को सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर जब बाजार खुला तो बीएसई सेंसेक्स 914 अंक से भी अधिक की जोरदार गिरावट के साथ 80 हजार 373 के स्तर पर आ गया। वहीं एनएसई का निफ्टी भी 246 अंक से अधिक टूटकर 24 हजार 932 के स्तर पर फिसल गया। निफ्टी का 25000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे जाना बाजार में घबराहट का संकेत था। निवेशकों की चिंता साफ दिख रही थी और हर तरफ बिकवाली का दौर था।
Iran war impact India: हर सेक्टर लाल रंग में: चौतरफा बिकवाली
सोमवार के कारोबारी सत्र में शेयर बाजार का कोई भी सेक्टर हरे रंग में नहीं था। सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल रंग में कारोबार कर रहे थे। सबसे अधिक मार रियल्टी सेक्टर पर पड़ी जो 2 प्रतिशत से भी अधिक गिर गया। इंटरग्लोब एविएशन, लार्सन एंड टूब्रो, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स जैसी बड़ी और प्रतिष्ठित कंपनियों के शेयरों में भारी नुकसान दर्ज किया गया। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ कमजोर रुख दिखा रहे थे।
आज के कारोबार में मारुति सुजुकी इंडिया, हुंडई मोटर इंडिया, हीरो मोटोकॉर्प, आयशर मोटर्स, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टीवीएस मोटर कंपनी और एस्कॉर्ट्स कुबोटा जैसे बड़े नामों पर निवेशकों की नजर रही। निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के शेयर पर भी बाजार की नजर थी।
Iran war impact India: कुछ शेयरों ने दिखाई हिम्मत
बाजार में चारों तरफ लाल रंग के बीच कुछ शेयर ऐसे भी थे जो ऊपर चढ़े। टॉप गेनर्स की सूची में ओएनजीसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और हिंडाल्को के नाम शामिल रहे। खासतौर पर ओएनजीसी का चढ़ना इसलिए भी समझ में आता है क्योंकि मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने की आशंका से तेल उत्पादक कंपनियों के शेयरों को समर्थन मिला। हालाँकि यह तेजी बाजार की बड़ी गिरावट के सामने बहुत कम थी।
Iran war impact India: मार्केट एक्सपर्ट्स का क्या कहना है
बाजार विशेषज्ञों ने इस गिरावट पर गंभीर चिंता जताई है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से पैदा हुई अनिश्चितता आने वाले दिनों में भी बाजार को प्रभावित करती रहेगी। उनके अनुसार इस पूरे संकट में सबसे बड़ा खतरा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से उत्पन्न होने वाला ऊर्जा जोखिम है।
वहीं ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुडी आर का कहना है कि निवेशकों के लिए जोखिम केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर यह क्षेत्रीय अस्थिरता लंबे समय तक बनी रही तो यह व्यापार मार्गों को बाधित कर सकती है, आपूर्ति शृंखला पर भारी दबाव डाल सकती है और अगर महंगाई की आशंकाएं फिर से मजबूत हुईं तो वैश्विक वित्तीय स्थिति और बिगड़ सकती है।
रुपया भी लड़खड़ाया: डॉलर के मुकाबले गिरावट
शेयर बाजार की गिरावट के साथ साथ भारतीय रुपये पर भी भारी दबाव देखा गया। सोमवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 21 पैसे कमजोर होकर 91.29 के स्तर पर पहुँच गया। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया सुबह 91.23 पर खुला और धीरे धीरे गिरकर 91.29 पर आ गया। यह पिछले शुक्रवार के बंद स्तर से 21 पैसे की कमजोरी है। शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 17 पैसे गिरकर 91.08 पर बंद हुआ था।
रुपये की इस कमजोरी के पीछे कई कारण हैं। एक तरफ कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं जिससे भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ेगा। दूसरी तरफ अमेरिकी डॉलर की मजबूती और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में उथल पुथल है। इसके अलावा घरेलू शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी बिकवाली ने भी रुपये पर दबाव बनाया।
आगे क्या होगा: निवेशकों के लिए सलाह
बाजार जानकारों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में स्थिति स्पष्ट नहीं होती तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। कच्चे तेल की कीमतों पर सबसे अधिक नजर रहेगी क्योंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है और कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ सकती है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे इस समय सतर्क रहें और किसी भी बड़े निवेश निर्णय से पहले बाजार की स्थिति का ध्यानपूर्वक आकलन करें।
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