स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ी हलचल, ईरान के ‘टोल टैक्स’ और तनाव के बीच ओमान तट से गुजरे 3 विशाल जहाज, क्या दुनिया को मिल गया नया वैकल्पिक समुद्री रास्ता?

ओमान तट के पास से गुजरे तीन बड़े जहाज, ईरान के टोल और तनाव के बीच उभरा नया मार्ग, बढ़ी वैश्विक चिंता

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Iran-US War: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक नई हलचल देखी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीन बड़े जहाज – दो ऑयल सुपरटैंकर और एक एलएनजी कैरियर – गुरुवार को ओमान के तट के बेहद करीब से होकर इस जलडमरूमध्य में दाखिल हुए। सामान्य रूट की बजाय ओमान के मुसंदम प्रायद्वीप के पास से गुजरने वाली इस मूवमेंट ने वैकल्पिक समुद्री रास्ते की संभावना को मजबूत कर दिया है।

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर भारी टोल वसूलने की योजना बना रहा है और कई देशों के जहाजों को अपने जलक्षेत्र से गुजरने में सतर्कता बरत रहा है।

ओमान के रास्ते मुसंदम प्रायद्वीप में जहाजों का प्रवेश

समुद्री निगरानी रिपोर्ट्स के अनुसार, दो विशाल ऑयल सुपरटैंकर और एक एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) जहाज ओमान की शिप मैनेजमेंट कंपनी के नियंत्रण में थे। ये सभी जहाज खुद को ओमानी फ्लैग के तहत दिखा रहे थे। खास बात यह रही कि ये जहाज पारंपरिक मार्ग (जो ईरान के जलक्षेत्र के करीब से गुजरता है) की बजाय ओमान के तट के बहुत निकट से होकर गुजरे।

जब ये जहाज मुसंदम प्रायद्वीप के पास पहुंचे, तो अचानक उनके ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) ट्रैकिंग सिग्नल बंद हो गए। इससे उनकी आगे की स्थिति और गंतव्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में सिग्नल जैमिंग और स्पूफिंग की घटनाएं हाल के दिनों में काफी बढ़ गई हैं।

जहाजों पर भारी ‘टोल’ और बढ़ता दबाव

ईरान ने हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले विदेशी जहाजों से प्रति यात्रा लगभग 2 मिलियन डॉलर तक का टोल वसूलने की चर्चा शुरू की है। यह कदम ईरान पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के जवाब में उठाया जा रहा है। ऐसे में कई शिपिंग कंपनियां अब जोखिम कम करने के लिए वैकल्पिक रूट तलाश रही हैं। ओमान के तट के करीब से गुजरना एक सुरक्षित और कम खर्चीला विकल्प साबित हो सकता है। ओमान इस घटना पर फिलहाल चुप्पी साधे हुए है, लेकिन ओमानी कंपनी द्वारा संचालित जहाजों का इस्तेमाल एक बड़ा संकेत है।

क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के तेल व्यापार का ‘गला’ है। यहां से रोजाना लगभग 21 मिलियन बैरल कच्चा तेल गुजरता है, जो दुनिया के कुल तेल निर्यात का करीब 20-25% हिस्सा है। सऊदी अरब, इराक, यूएई और कुवैत जैसे देश इसी मार्ग पर निर्भर हैं। भारत के लिए भी यह रास्ता सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि हमारे कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर आता है।

ऊर्जा सुरक्षा और सुरक्षित समुद्री मार्ग का सवाल

भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा को लेकर पहले भी चिंता जताई है। हाल ही में ब्रिटेन के नेतृत्व में हुई बैठक में भारत ने भी हिस्सा लिया था। ईरान ने भारत को सुरक्षा का आश्वासन दिया था, लेकिन बढ़ते तनाव के बीच दिल्ली बेहद सतर्क है। विशेषज्ञों का मानना है कि ओमान तट के करीब से जहाजों का गुजरना भारत के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। अगर यह रूट सफल रहता है, तो भारतीय शिपिंग कंपनियां इसका लाभ उठा सकती हैं।

ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उछाल और वैश्विक हलचल

अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस घटना पर नजर रखे हुए हैं। पेंटागन और ब्रिटिश नौसेना ने क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है। बाजार की प्रतिक्रिया भी तुरंत सामने आई है; ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। शिपिंग बीमा की लागत भी बढ़ रही है, जिससे वैश्विक व्यापार महंगा होने की आशंका है।

क्या स्थायी होगा यह वैकल्पिक मार्ग?

विश्लेषक दो संभावनाएं देख रहे हैं। पहली, ओमान वाला रूट एक स्थायी वैकल्पिक मार्ग बन सकता है, जिससे ईरान का एकाधिकार कम होगा। दूसरी, ईरान इसे चुनौती मानते हुए और सख्ती बरत सकता है। सिग्नल जैमिंग की बढ़ती घटनाएं सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बनी हुई हैं, क्योंकि इससे समुद्री दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

Iran-US War: ऊर्जा सुरक्षा का बदलता परिदृश्य

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तीन जहाजों की यह मूवमेंट बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों का हिस्सा है। ईरान के टोल प्लान और वैकल्पिक रूट की तलाश ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को नई दिशा दे दी है। भारत जैसे आयातक देशों को अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए अब और भी सक्रिय होना होगा।

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