Iran-US War: “पायलट बचाना तो बहाना था, असली मकसद यूरेनियम चोरी”, अमेरिका के रेस्क्यू मिशन पर ईरान का सनसनीखेज आरोप

Iran-US War: F-15E पायलट के रेस्क्यू ऑपरेशन को ईरान ने बताया 'चोरी का छल', विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी सेना के मिशन पर उठाए गंभीर सवाल।

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Iran-US War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान में गिराए गए F-15E स्ट्राइक ईगल जेट के पायलट को दो दिन बाद सुरक्षित निकाल लिया था। इस रेस्क्यू ऑपरेशन को अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसी अभियान बताया जा रहा है। लेकिन ईरान ने इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीर आरोप लगाया है।

ईरान का कहना है कि अमेरिका पायलट बचाने का बहाना बनाकर उसका समृद्ध यूरेनियम चुराने की कोशिश कर रहा था। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसे स्पष्ट रूप से चोरी का छल अभियान बताया है।

“अमेरिका ने रची यूरेनियम लूट की साजिश”

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाई ने रविवार को बयान जारी कर अमेरिका पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि इस अभियान की कई संभावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

बाक़ाई ने दावा किया कि अमेरिकी सेना का मिशन समृद्ध यूरेनियम चोरी करने का था। उन्होंने कहा कि जिस इलाके में पायलट के होने का दावा किया गया था, वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम से काफी दूर था। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने जानबूझकर गलत जगह पर ऑपरेशन चलाया ताकि यूरेनियम तक पहुंच बनाई जा सके। बाक़ाई ने पूरे अभियान को अमेरिका के लिए एक बड़ी आपदा बताया।

क्या था अमेरिकी सेना का वो ‘साहसी’ रेस्क्यू ऑपरेशन?

5 अप्रैल को ईरान ने अमेरिका का F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान मार गिराया था। इसमें एक पायलट लापता हो गया था। अमेरिकी सेना ने दो दिन बाद दक्षिण-पश्चिम ईरान में साहसी रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर पायलट को सुरक्षित निकाल लिया। इस ऑपरेशन को अमेरिकी सेना ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन बताया था। लेकिन ईरान अब इसी ऑपरेशन पर सवाल उठा रहा है और इसे यूरेनियम चोरी का प्रयास बता रहा है।

क्यों अमेरिका की है इस पर नजर?

खबरों के अनुसार ईरान के पास 400 से 450 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम है जो परमाणु हथियार बनाने में उपयोगी हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही ईरान से परमाणु सामग्री सौंपने की मांग की थी। अगर ईरान इनकार करता है तो बलपूर्वक जब्त करने की भी चर्चा चल रही है। ईरान के कई यूरेनियम ठिकानों पर अमेरिका की नजर है। इनमें इस्फ़हान और नतान्ज़ जैसे प्रमुख केंद्र शामिल हैं।

क्या इस आरोप से और भड़केगी आग?

ईरान का यह आरोप अमेरिका-ईरान युद्ध को और भड़का सकता है। अमेरिका पहले ही ईरान पर बड़े हमलों की धमकी दे चुका है। ट्रंप ने कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो ईरान में बड़ी तबाही मचाई जा सकती है। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। अब यूरेनियम चोरी का आरोप दोनों देशों के बीच नया विवाद खड़ा कर रहा है।

IAEA की रिपोर्ट और ठिकानों पर हमलों का सच

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने कहा है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम मुख्य रूप से दो स्थलों पर केंद्रित है। अमेरिका ने इन दोनों स्थलों पर हमले किए थे। अब ईरान का आरोप है कि अमेरिका इन हमलों के बहाने यूरेनियम हथियाने की कोशिश कर रहा है। IAEA की रिपोर्ट में ईरान के पास उपलब्ध यूरेनियम की मात्रा का जिक्र किया गया है जो चिंता का विषय बना हुआ है।

दबाव बनाने की नई रणनीति?

विदेश नीति विशेषज्ञों के अनुसार ईरान का यह आरोप तनाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वे मानते हैं कि अमेरिका वाकई यूरेनियम पर नजर रख रहा है लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन को चोरी से जोड़ना ईरान की तरफ से दबाव बनाने का तरीका है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब दोनों देशों के बयानों पर नजर रखे हुए है।

क्या थमेगा विवाद या होगी नई कार्रवाई?

ईरान के आरोप के बाद अमेरिका की प्रतिक्रिया का इंतजार है। अगर अमेरिका इस आरोप को खारिज करता है तो तनाव और बढ़ सकता है। दोनों देशों के बीच बातचीत की गुंजाइश अभी कम नजर आ रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।

Iran-US War: निष्कर्ष

ईरान ने अमेरिका के रेस्क्यू अभियान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अमेरिका यूरेनियम चोरी करने की कोशिश कर रहा था। इस बयान से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। ईरान का दावा है कि अमेरिकी सेना का मिशन पायलट बचाने का नहीं बल्कि परमाणु सामग्री हथियाने का था। अमेरिका अब इस आरोप पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकता है। वर्तमान में स्थिति काफी संवेदनशील है और आगे क्या होता है इस पर पूरी दुनिया की नजर है।

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