ईरान-अमेरिका युद्ध: ट्रंप का तंज – “अभी ईरान को पाषाण युग में भेजा नहीं, पुल और बिजलीघर अगले निशाने पर”, तेहरान में भीषण बमबारी जारी, 13 मौतें

ट्रंप ने कहा “अभी ईरान को पाषाण युग में नहीं भेजा, पुल और बिजलीघर अगले निशाने पर”, तेहरान में रिहायशी इलाकों पर बमबारी, 13 मौतें

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Middle East Crisis: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर लगातार दबाव बढ़ाते हुए एक बार फिर तीखा तंज कसा है। ईरान के सबसे बड़े पुल पर हुए मिसाइल हमले के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना ने अभी ईरान के बचे हुए लक्ष्यों को पूरी तरह नष्ट करना शुरू भी नहीं किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगला निशाना ईरान के प्रमुख पुलों और बिजली उत्पादन संयंत्रों पर होगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब तेहरान और आसपास के इलाकों में रिहायशी क्षेत्रों, यूनिवर्सिटी और सैन्य ठिकानों पर बमबारी की खबरें लगातार आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह टिप्पणी ईरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है।

ट्रंप का सोशल मीडिया पोस्ट: “पुल, फिर बिजलीघर… पाषाण युग अभी दूर है”

ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर लिखा, “अमेरिकी सेना ने ईरान में बचे हुए लक्ष्यों को नष्ट करना भी शुरू नहीं किया… अगले निशाने पुल, फिर बिजली संयंत्र… लगता है कि ‘पाषाण युग’ अभी बहुत दूर है?” इस पोस्ट में उन्होंने स्पष्ट रूप से ईरान को चेतावनी दी कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए नहीं खोलता और समझौते की दिशा में नहीं बढ़ता, तो अमेरिका बड़े पैमाने पर हमले करेगा। ट्रंप ने कहा कि अगले दो-तीन हफ्तों में ईरान पर “बहुत भारी हमले” किए जाएंगे।

Middle East Crisis: ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता खतरा

ट्रंप की धमकी में ईरान के बड़े पुलों और बिजली उत्पादन संयंत्रों को विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। अभी तक अमेरिका-इजरायल ने मुख्य रूप से सैन्य ठिकानों और मिसाइल सुविधाओं पर हमले किए हैं। लेकिन अगर बिजलीघर और पुल जैसे नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया तो ईरान में मानवीय संकट और बिजली संकट गहरा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली संयंत्रों पर हमला होने से ईरान की अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह ठप हो सकती है।

ईरान का जवाब: “हम सभ्यता हैं, बमों से नहीं मरते”

ईरान ने ट्रंप की धमकी को सिरे से खारिज करते हुए तीखा जवाब दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि पाषाण युग में मध्य पूर्व में तेल और गैस का उत्पादन नहीं होता था। उन्होंने पूछा, “क्या अमेरिका वाकई समय को पीछे ले जाना चाहता है?” ईरान ने आगे चेतावनी दी कि “ईरान सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि एक प्राचीन सभ्यता है। सभ्यताएं बमों से नहीं मरा करती हैं।” तेहरान ने कहा कि वह अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।

युद्ध की वर्तमान स्थिति: तेहरान में भीषण बमबारी जारी

पिछले कुछ दिनों में तेहरान के दक्षिण-पश्चिम इलाके में रिहायशी इमारतों पर हमले में 13 लोगों की मौत हो चुकी है। शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी को भी निशाना बनाया गया, जहां बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े काम होते हैं। कोम शहर में भी अलग हमला हुआ, जिसमें 5 मौतें रिपोर्ट की गईं। रात भर तेहरान में धमाकों की आवाजें गूंजती रहीं और कम ऊंचाई पर उड़ते लड़ाकू विमानों की गड़गड़ाहट सुनाई देती रही। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड अब वैकल्पिक ठिकानों का इस्तेमाल कर रहा है।

45 दिन का सीजफायर प्लान: मध्यस्थों की कोशिश

इस बीच मध्यस्थ देश (कतर और ओमान समेत) दो चरण वाली डील पर काम कर रहे हैं। पहले चरण में 45 दिनों का सीजफायर प्रस्तावित है, जिसमें दोनों पक्ष स्थायी शांति पर बातचीत करेंगे। अगर प्रगति हुई तो सीजफायर बढ़ाया जा सकता है। ट्रंप आज एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं, जिसमें ईरान पर सफल रेस्क्यू ऑपरेशन और आगे की रणनीति की जानकारी देने की उम्मीद है।

वैश्विक प्रभाव: भारत समेत कई देश चिंतित

भारत ईरान से तेल आयात करने वाला प्रमुख देश है। इस युद्ध से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और हॉर्मुज स्ट्रेट पर कोई भी बाधा भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। विदेश मंत्रालय ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है। ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। भारत ने ईरान में फंसे अपने नागरिकों से सतर्क रहने को कहा है।

आगे क्या? युद्ध की संभावित दिशा

विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर सीजफायर नहीं हुआ तो ईरान जवाबी हमले कर सकता है। अमेरिका और इजरायल के ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल अटैक की आशंका बनी हुई है। लेकिन दोनों पक्ष पूर्ण पैमाने पर जंग से बचना चाहते हैं क्योंकि इससे क्षेत्रीय अस्थिरता और वैश्विक आर्थिक संकट गहरा सकता है। ट्रंप की “पाषाण युग” वाली धमकी और ईरान का “सभ्यता” वाला जवाब इस युद्ध को मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी ले जा रहा है।

निष्कर्ष

ईरान और अमेरिका के बीच का यह वाकयुद्ध अब खतरनाक मोड़ पर है। ट्रंप की सीधी धमकी और ईरान का सभ्यता वाला तर्क यह दर्शाता है कि तनाव कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है। पूरी दुनिया की नजरें अब ट्रंप की आगामी प्रेस कॉन्फ्रेंस और मध्यस्थों के सीजफायर प्रयासों पर टिकी हैं।

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