ईरान ने अमेरिका से बातचीत से किया इनकार! बहरीन में पेंटागन दफ्तर जलकर राख
खामेनेई की मौत के बाद लाल झंडा, बहरीन में पेंटागन दफ्तर जलकर राख, ईरान का बदले का ऐलान
Iran US talks refusal: अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान के बाद ईरान की तरफ से एक और बड़ा और कड़ा संदेश आया है। ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी और पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के सबसे करीबी और विश्वसनीय सलाहकारों में से एक अली लारिजानी ने साफ कह दिया है कि ईरान अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत नहीं करेगा। यह बयान ऐसे वक्त आया है जब बहरीन में पेंटागन से जुड़े दफ्तर पर ईरानी मिसाइलें गिरीं और पूरी बिल्डिंग आग की लपटों में घिर गई। बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर भी हमला हुआ। युद्ध हर घंटे नया और खतरनाक मोड़ ले रहा है।
Iran US talks refusal: लारिजानी का दो टूक इनकार, कोई बातचीत नहीं
ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारिजानी ने सोमवार को एक बड़ा बयान जारी किया जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। उन्होंने बिल्कुल साफ शब्दों में कहा कि ईरान अब संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं करेगा। अली लारिजानी ईरान के सबसे अनुभवी और ताकतवर राजनीतिक व सुरक्षा अधिकारियों में से एक हैं। वे खामेनेई के बेहद करीबी और भरोसेमंद सलाहकार रहे हैं। उनका यह बयान ईरान की आधिकारिक नीति का प्रतिनिधित्व करता है। इस बयान का मतलब यह है कि जब तक अमेरिका और इजरायल के हमले जारी हैं तब तक ईरान किसी भी राजनयिक मार्ग पर नहीं चलेगा। ईरान ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वह युद्ध के बीच में बातचीत की मेज पर नहीं बैठेगा।
Iran US talks refusal: ईरान के विदेश मंत्री बोले, अमेरिकी फौज की कमजोरी जानते हैं
लारिजानी के बयान से पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी एक बेहद तीखा और आत्मविश्वास से भरा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान को पूर्व और पश्चिम में अमेरिकी सेना की पराजय का अध्ययन करने के लिए दो दशक का समय मिला है। उन्होंने कहा कि ईरान ने उन अनुभवों से सबक सीखे हैं और उन्हें आत्मसात किया है। विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि राजधानी तेहरान पर बमबारी से ईरान की युद्ध संचालन क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने बताया कि ईरान की विकेंद्रीकृत मोजेक रक्षा प्रणाली उसे यह तय करने में सक्षम बनाती है कि यह युद्ध कब और कैसे समाप्त होगा। यह बयान अमेरिका को सीधी चुनौती था।
Iran US talks refusal: बहरीन में पेंटागन से जुड़े दफ्तर पर मिसाइल हमला
युद्ध के मोर्चे पर सोमवार को एक और बड़ी और चौंकाने वाली खबर आई। ईरान की मिसाइलें सीधे बहरीन में पेंटागन से जुड़े दफ्तर तक पहुंच गईं। हमले के बाद पूरी बिल्डिंग में आग लग गई और काला धुआं आसमान में दूर तक दिखाई दिया। यह तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गए जो इस बात की गवाही दे रहे थे कि ईरान के हमले कितने सटीक और घातक हैं। यह हमला उस बहरीन में हुआ जहां अमेरिका का पांचवां बेड़ा तैनात है और जहां अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का बड़ा केंद्र है। इससे पहले भी ईरान बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कई बार हमला कर चुका था लेकिन पेंटागन से जुड़े दफ्तर पर सीधा हमला इस युद्ध में एक बड़ी और नई घटना मानी जा रही है।
Iran US talks refusal: बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर गोलीबारी
बहरीन के साथ साथ इराक की राजधानी बगदाद में भी हालात बिगड़ गए। बगदाद के सुरक्षित माने जाने वाले ग्रीन जोन से आतंकवादियों ने अमेरिकी दूतावास पर गोलीबारी की। इन हमलावरों को ग्रीन जोन का आतंकवादी बताया गया है। गोलीबारी का वीडियो भी सामने आया जिसमें हमलावर अमेरिकी दूतावास पर हमला करने के नारे लगाते दिखे। जवाब में इराकी पुलिस ने हमलावरों पर फायरिंग की जिसके बाद मौके पर भगदड़ मच गई और लोग तेजी से वहां से भागते दिखे।
Iran US talks refusal: होर्मुज के पास चीनी पोत का GPS हुआ हैक
युद्ध के बीच एक और चिंताजनक खबर सामने आई। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक चीनी पोत पर तैनात कर्मियों ने बताया कि उनके जहाज का GPS सिग्नल अचानक हैक हो गया। जहाज की घड़ियां गड़बड़ाने लगीं और तेजी से घूमने लगीं। GPS सिग्नल पूरी तरह बेकार हो गया और स्थिर खड़ा जहाज 33 समुद्री मील की गति दिखाने लगा। इस घटना ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस जलमार्ग से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल आपूर्ति प्राप्त करता है।
Iran US talks refusal: ट्रंप ने बताए ईरान के अगले नेता के 3 संभावित नाम
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए साक्षात्कार में एक दिलचस्प बात कही। उन्होंने कहा कि खामेनेई की मौत के बाद ईरान के भावी नेता के लिए उनके पास तीन बहुत अच्छे विकल्प हैं। हालांकि जब उनसे इन नामों को सार्वजनिक करने का आग्रह किया गया तो उन्होंने विशिष्ट नाम बताने से इनकार कर दिया। ट्रंप का यह बयान इस बात का संकेत देता है कि अमेरिका पहले से ही ईरान में सत्ता परिवर्तन की योजना बना रहा है और वह यह तय करने की स्थिति में है कि खामेनेई की जगह कौन आएगा।
Iran US talks refusal: खामेनेई के बाद ईरान में शासन की व्यवस्था
खामेनेई की मौत के बाद ईरान में सत्ता का शून्य भरने के लिए एक तीन सदस्यीय परिषद का गठन किया गया है जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, मुख्य न्यायाधीश मोहसेनी एजेई और मौलवी अलीरेजा अराफी शामिल हैं। यह परिषद तब तक शासन संभालेगी जब तक असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नए सुप्रीम लीडर का चुनाव नहीं कर लेती। लेकिन लारिजानी का बातचीत से इनकार और विदेश मंत्री का आत्मविश्वास से भरा बयान यह साफ करता है कि ईरान का नेतृत्व भले ही बदल गया हो लेकिन उसकी नीति और इरादा नहीं बदला है। ईरान यह जंग अपनी शर्तों पर खत्म करना चाहता है।
Iran US talks refusal: युद्ध का विस्तार और दुनिया पर असर
यह युद्ध अब सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहा। बगदाद, बहरीन, बेरूत, दुबई और साइप्रस तक इसकी आग पहुंच चुकी है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा मंडरा रहा है जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। दुनिया का बड़ा हिस्सा इस युद्ध को रोकने की अपील कर रहा है लेकिन लारिजानी के बयान के बाद यह उम्मीद और कम हो गई है कि जल्द कोई बातचीत होगी। यह जंग अब उस मोड़ पर है जहां से वापसी बेहद मुश्किल दिखती है।
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