ईरान पर अमेरिकी हमले की आशंका, ट्रंप ने दिए संकेत, विरोध प्रदर्शन में 2500 से ज्यादा मौतें

HRANA के अनुसार 2571 मौतें, ट्रंप ने कड़ी चेतावनी दी; अमेरिकी हमले की आशंका बढ़ी

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Iran Protest: ईरान में पिछले दो हफ्ते से जारी हिंसक विरोध प्रदर्शन अब एक अंतरराष्ट्रीय संकट का रूप लेता जा रहा है। ईरान की सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 2571 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए प्रदर्शनकारियों को अपना समर्थन देने का संकेत दिया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि किसी भी समय अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

कितने लोग मारे गए?

अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (HRANA) ने अपनी जांच में बताया है कि पिछले 17 दिनों में 2403 प्रदर्शनकारी, सरकार से जुड़े 147 लोग, 9 निर्दोष नागरिक और 12 बच्चों की मौत हुई है। यह आंकड़े इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद एकत्र किए गए हैं।

ईरान के एक सरकारी अधिकारी ने रॉयटर्स से बात करते हुए माना कि 2000 से अधिक लोग मारे गए हैं, लेकिन इसके लिए उन्होंने आतंकवादियों को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है क्योंकि कई इलाकों से सूचना नहीं मिल पाई है।

Iran Protest: ट्रंप की सख्त चेतावनी

Iran Protest
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर एक मजबूत संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि ईरान के अधिकारियों को इन हत्याओं के लिए बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।

ट्रंप ने ईरान की जनता को संबोधित करते हुए कहा, “ईरानी देशभक्तों, विरोध प्रदर्शन जारी रखें। अपने संस्थानों पर नियंत्रण लें। हत्यारों और अत्याचारियों के नाम नोट करके रखें। उन्हें बड़ी कीमत चुकानी होगी। मैंने प्रदर्शनकारियों की निर्मम हत्या रुकने तक ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द कर दी हैं। मदद अपने रास्ते पर है।” जब पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि मदद रास्ते में है से उनका क्या मतलब है, तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि आपको इसका पता लगाना होगा।

ईरान सरकार का अमेरिका पर आरोप

ईरान सरकार ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह विरोध प्रदर्शन (Iran Protest) को बहाना बनाकर सैन्य हस्तक्षेप की साजिश रच रहा है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के मिशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिका की नीति शासन परिवर्तन में निहित है।

ईरान ने कहा, “अमेरिका प्रतिबंध, धमकियां, जानबूझकर फैलाई गई अशांति और अराजकता को सैन्य हस्तक्षेप का बहाना बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।”

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की सरकार का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।

आज होगी पहली फांसी

ईरान में विरोध प्रदर्शन से जुड़े पहले मामले में आज एक युवक को फांसी दी जाएगी। 26 वर्षीय इरफान सोल्टानी को पिछले गुरुवार को गिरफ्तार किया गया था। सिर्फ एक हफ्ते में ही उन पर मुकदमा चलाया गया, दोषी करार दिया गया और फांसी की सजा सुना दी गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोल्टानी को बुधवार को फांसी दे दी जाएगी। उन्हें तेहरान के उत्तर-पश्चिमी इलाके करज में गिरफ्तार किया गया था। वह पिछले सप्ताह गिरफ्तार किए गए हजारों प्रदर्शनकारियों में से एक हैं।

फांसी पर ट्रंप की प्रतिक्रिया

डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को चेतावनी दी कि अगर ईरानी अधिकारी प्रदर्शनकारियों (Iran Protest) को फांसी देते हैं तो बहुत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, “अगर उन्होंने ऐसा कुछ किया तो हम बहुत सख्त कार्रवाई करेंगे। जब वे हजारों लोगों को मारना शुरू कर देंगे और अब फांसी देना शुरू करेंगे, तो हम देखेंगे कि उनके लिए क्या होता है।”

यह बयान साफ संकेत देता है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है।

Iran Protest: अमेरिकी हमले के संकेत

कई घटनाक्रम ऐसे हैं जो संकेत दे रहे हैं कि अमेरिका किसी भी समय ईरान (Iran Protest) पर सैन्य हमला कर सकता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने नागरिकों को तुरंत ईरान छोड़ देने की सलाह दी है। विभाग ने कहा है कि यदि सुरक्षित हो तो जमीनी रास्ते से आर्मेनिया या तुर्की जाने पर विचार करें। यह कदम आमतौर पर किसी सैन्य कार्रवाई से पहले उठाया जाता है।

इजरायल की आपातकालीन बैठक

इजरायल की सुरक्षा कैबिनेट ने मंगलवार शाम आपातकालीन बैठक बुलाई थी। इस बैठक का एकमात्र एजेंडा ईरान था। इजरायल अमेरिका का सबसे करीबी सहयोगी है और ईरान के खिलाफ किसी भी कार्रवाई में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

पेंटागन की तैयारी

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने राष्ट्रपति ट्रंप के सामने ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य विकल्प प्रस्तुत किए हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है।

Iran Protest: ईरान क्राउन प्रिंस के साथ गुप्त बैठक

एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने बीते सप्ताहांत में ईरान के क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी से गुप्त मुलाकात की। रेजा पहलवी अमेरिका में निर्वासन की जिंदगी जी रहे हैं। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि दोनों ने विरोध प्रदर्शनों पर विस्तार से चर्चा की।

सुरक्षा बलों की क्रूरता

द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान के केवल एक अस्पताल में 400 से अधिक लोग आए हैं जिनकी आंखों में गोली लगने से चोटें आई हैं। यह दर्शाता है कि सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों (Iran Protest) पर कितनी बेरहमी से हमला कर रहे हैं।

चश्मदीदों का कहना है कि सुरक्षा बल जानबूझकर प्रदर्शनकारियों (Iran Protest) के चेहरे और आंखों पर निशाना साध रहे हैं। इससे कई लोग स्थायी रूप से अपनी दृष्टि खो चुके हैं।

स्टारलिंक की मदद

ब्लूमबर्ग न्यूज के अनुसार, एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनी स्टारलिंक ने ईरान के लोगों को मुफ्त इंटरनेट की पेशकश की है। ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट पांच दिनों से अधिक समय से जारी है।

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के लोगों के लिए मेंबरशिप फीस माफ कर दी गई है ताकि जिनके पास रिसीवर है वे बिना भुगतान किए सेवा का उपयोग कर सकें। यह कदम प्रदर्शनकारियों को संगठित होने और दुनिया से जुड़े रहने में मदद करेगा।

Iran Protest: विरोध प्रदर्शन क्यों शुरू हुआ?

ईरान में विरोध प्रदर्शन (Iran Protest) की शुरुआत आर्थिक संकट, भ्रष्टाचार और सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ हुई। देश में बेरोजगारी और महंगाई चरम पर है। युवाओं में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

प्रदर्शनकारी सरकार से बुनियादी अधिकार, आर्थिक सुधार और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार ने इन मांगों को दबाने के लिए हिंसक कार्रवाई का रास्ता चुना है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

दुनिया भर के देशों और मानवाधिकार संगठनों ने ईरान सरकार (Iran Protest) की कार्रवाई की निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल जांच की मांग की है। यूरोपीय संघ ने भी ईरान पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। ब्रिटेन और फ्रांस ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों पर हिंसा तुरंत बंद होनी चाहिए।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?

ईरान (Iran Protest) में जारी अशांति का भारत पर भी असर पड़ रहा है। भारत ईरान को बासमती चावल का बड़ा निर्यातक है। इस संकट के कारण निर्यात बाधित हो रहा है और कीमतों में गिरावट आई है।

इसके अलावा, ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भी चिंता का विषय है। भारतीय विदेश मंत्रालय स्थिति पर नजर रख रहा है।

Iran Protest: आगे क्या होगा?

स्थिति अत्यंत गंभीर और अनिश्चित है। अगर ईरान सरकार प्रदर्शनकारियों (Iran Protest) को फांसी देना शुरू करती है तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है। इससे पूरे मध्य पूर्व में संकट पैदा हो सकता है।

दूसरी ओर, अगर विरोध प्रदर्शन और तीव्र होता है तो ईरान में शासन परिवर्तन की संभावना भी है। लेकिन इसकी कीमत हजारों और जानें हो सकती हैं।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय को शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रयास करने चाहिए। ईरान सरकार को प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान देना चाहिए और हिंसा बंद करनी चाहिए। लेकिन फिलहाल ऐसा होता नहीं दिख रहा। अगले कुछ दिन ईरान (Iran Protest) और पूरे मध्य पूर्व के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। दुनिया की नजरें तेहरान पर टिकी हैं।

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