ईरान-इजरायल जंग से आपकी जेब पर पड़ेगी मार! वित्त मंत्रालय ने खुलासा किया — होर्मुज बंद हुआ तो रुपये पर दबाव, महंगाई बढ़ेगी, पेट्रोल-डीजल-खाद सब महंगा, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत

वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट: पश्चिम एशिया संकट लंबा खिंचा तो रुपये कमजोर, महंगाई बढ़ेगी, तेल-खाद महंगे, लेकिन भारत की बुनियाद मजबूत

0

Iran Israel war impact India: मध्य पूर्व में जारी युद्ध अब केवल उस इलाके की समस्या नहीं रही। इसकी आँच धीरे-धीरे भारत की अर्थव्यवस्था तक भी पहुँचने लगी है। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को अपनी फरवरी महीने की आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट जारी की जिसमें साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि यदि पश्चिम एशिया संकट लंबे समय तक जारी रहा तो भारत की अर्थव्यवस्था पर इसके कई प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं। रुपये की विनिमय दर से लेकर महंगाई तक और कच्चे तेल से लेकर उर्वरकों तक, हर मोर्चे पर चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं। हालाँकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियाद फिलहाल मजबूत है और देश के पास इस झटके को संभालने की क्षमता है।

Iran Israel war impact India: होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हुआ तो बड़ी मुसीबत

वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में होर्मुज जलडमरूमध्य का विशेष उल्लेख किया गया है। यह वह संकरा समुद्री रास्ता है जिसके जरिए दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति होती है। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद से इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही पहले ही बाधित हो चुकी है। जब दुनिया के इस सबसे अहम तेल मार्ग पर संकट आता है तो इसका असर तुरंत वैश्विक तेल कीमतों पर दिखता है। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत पहले ही करीब 9 प्रतिशत उछलकर 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँच गई है। यह वृद्धि भारत जैसे देश के लिए चिंताजनक है जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है।

Iran Israel war impact India: एलएनजी की कीमतें 50 प्रतिशत तक उछलीं

केवल कच्चे तेल पर ही नहीं, इस संकट का असर प्राकृतिक गैस बाजार पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी एलएनजी की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। यह एक बेहद बड़ा उछाल है। एलएनजी की कीमतें बढ़ने का सीधा असर उन उद्योगों पर पड़ता है जो इसे ईंधन के रूप में उपयोग करते हैं। इसके अलावा उर्वरक उद्योग भी एलएनजी पर काफी निर्भर है। यदि उर्वरक महंगे हुए तो खेती की लागत बढ़ेगी और सब्जियों तथा अनाज की कीमतें भी बढ़ सकती हैं जिसका सीधा बोझ आम जनता पर पड़ेगा।

Iran Israel war impact India: रुपये पर बढ़ सकता है दबाव

वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि पश्चिम एशिया संकट लंबा खिंचा तो रुपये की विनिमय दर पर दबाव बढ़ सकता है। इसके दो मुख्य कारण बताए गए हैं। पहला यह कि जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है तो विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर डॉलर जैसी सुरक्षित संपत्तियों में लगाते हैं। इससे भारतीय रुपये पर बिकवाली का दबाव आता है। दूसरा कारण यह है कि महंगे तेल के कारण भारत का आयात बिल बढ़ जाता है जिससे चालू खाते का घाटा बढ़ता है और यह भी रुपये को कमजोर करने में योगदान देता है।

Iran Israel war impact India: किन क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा असर

वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में दो प्रमुख क्षेत्रों को सबसे अधिक जोखिम में बताया गया है। पहला है उर्वरक क्षेत्र। एलएनजी और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से उर्वरक बनाने की लागत बढ़ जाती है। यदि सरकार सब्सिडी नहीं बढ़ाती तो किसानों को महंगी खाद खरीदनी पड़ेगी और यदि सब्सिडी बढ़ाई जाती है तो सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ेगा। दूसरा क्षेत्र है पेट्रोरसायन यानी पेट्रोकेमिकल उद्योग। यह उद्योग कच्चे तेल को आधार बनाकर प्लास्टिक, रबर, रंग और कई अन्य उत्पाद बनाता है। कच्चे तेल के महंगे होने से इस पूरे क्षेत्र की उत्पादन लागत बढ़ जाती है जिसका असर अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ता है।

Iran Israel war impact India: लेकिन भारत की स्थिति मजबूत

हालाँकि रिपोर्ट में केवल चेतावनियाँ ही नहीं हैं बल्कि भारत की आर्थिक मजबूती को भी रेखांकित किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है। वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.6 प्रतिशत और वास्तविक सकल मूल्यवर्धन वृद्धि 7.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके साथ ही भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है, चालू खाते का घाटा नियंत्रण में है और मुद्रास्फीति अभी तक संतुलित स्तर पर है। ये तीनों कारक भारत को वैश्विक झटकों से बचाने में मददगार हैं।

Iran Israel war impact India: व्यापार कूटनीति से मिलेगी ताकत

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौतों की दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहा है। इससे निर्यात बाजारों का विविधीकरण होगा और मध्यम अवधि में देश की बाहरी आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी। जनवरी 2026 में आर्थिक गतिविधियाँ व्यापक आधार पर मजबूत रहीं जिन्हें लॉजिस्टिक गतिविधि में तेजी, पीएमआई में विस्तार और मजबूत घरेलू माँग का समर्थन मिला। यह संकेत देता है कि भारत की आंतरिक आर्थिक गतिविधियाँ फिलहाल स्वस्थ हैं।

read more here

NCB ने नेपाल-भारत-श्रीलंका का खतरनाक ड्रग नेटवर्क तोड़ा! 77.60 किलो हैशिश ऑयल और 2 किलो चरस जब्त, 10 करोड़ की नशीली दवाएं धूल चाट गईं, मास्टरमाइंड श्रीलंका में

ईरानी राष्ट्रपति घुटने टेके! पड़ोसी देशों से माफी मांगी, हमले रोकने का ऐलान किया लेकिन फिर बोले ,- “कभी नहीं करेंगे सरेंडर”, मध्य-पूर्व में तनाव थमा या नया खेल शुरू?

बागपत में ‘रीलबाज’ युवक की हरकत पड़ी भारी, अवैध हथियार लहराकर बनाया वीडियो तो पुलिस ने कसा शिकंजा

IND vs NZ Pitch Report: अहमदाबाद की पिच रिपोर्ट आई सामने, बल्लेबाजों का होगा राज, 200+ का स्कोर संभव

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.