ईरान पर हमले से एक कदम दूर था अमेरिका, विदेश मंत्री के एक मैसेज ने बदली पूरी कहानी

आखिरी समय में टला बड़ा खतरा, जानें कैसे रुका अमेरिकी सैन्य हमला

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Iran Aftermath Update: ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन और सरकारी दमन के बीच दुनिया एक बड़े युद्ध के करीब पहुंच गई थी। अमेरिकी लड़ाकू विमान हमले के लिए तैयार खड़े थे, लेकिन आखिरी समय में ईरानी विदेश मंत्री का एक टेक्स्ट मैसेज पूरी स्थिति को बदल गया। यह जानकारी वॉशिंगटन पोस्ट की ताजा रिपोर्ट में सामने आई है।

Iran Aftermath Update: कैसे टला सैन्य हमला

वॉशिंगटन पोस्ट की विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान (Iran Aftermath Update) के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ को एक अहम संदेश भेजा था। इस टेक्स्ट मैसेज में बताया गया कि ईरानी सरकार ने करीब 800 लोगों को फांसी देने की अपनी योजना रोक दी है।

यह संदेश तनाव कम करने की एक बड़ी पहल के रूप में देखा गया। इसके बाद व्हाइट हाउस में माहौल पूरी तरह बदल गया और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई को फिलहाल टालने का फैसला लिया।

इजराइल ने भी की थी मनाही

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका के सबसे करीबी सहयोगी इजराइल ने भी ट्रंप प्रशासन से ईरान पर हमला न करने की अपील की थी। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खुद ट्रंप को फोन कर संयम बरतने को कहा था।

नेतन्याहू की चिंता यह थी कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो जवाबी कार्रवाई का सामना इजराइल को करना पड़ सकता है। उन्होंने साफ कहा कि बिना मजबूत अमेरिकी सैन्य समर्थन के इजराइल ऐसी स्थिति के लिए तैयार नहीं है।

Iran Aftermath Update: ईरान में क्या हो रहा है?

पिछले कुछ हफ्तों से ईरान (Iran Aftermath Update) अपने इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक संकट से गुजर रहा है। देशभर में सरकार विरोधी प्रदर्शन जोरों पर हैं। ये प्रदर्शन सीधे तौर पर सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की सत्ता को चुनौती दे रहे हैं। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पों में हजारों लोगों के मारे जाने की खबरें आई हैं। हालांकि सटीक आंकड़े स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन स्थिति काफी गंभीर बताई जा रही है।

विदेश से आए थे 5000 लड़ाके

16 जनवरी की रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में विरोध प्रदर्शन दबाने के लिए इराक से करीब 5000 लड़ाकों को बुलाया गया था। एक यूरोपीय सैन्य सूत्र और इराकी सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि ये लड़ाके इराक के दक्षिणी सीमा रास्तों से ईरान में दाखिल हुए थे। मायसान प्रांत के शैब बॉर्डर और वासित प्रांत के ज़ुर्बतिया बॉर्डर से इन्हें भेजा गया था।

ट्रंप और खामेनेई के बीच जुबानी जंग

अमेरिकी सैन्य हमले का खतरा तो टल गया है, लेकिन ट्रंप और खामेनेई के बीच जुबानी जंग अब भी जारी है। ईरान (Iran Aftermath Update) के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई ने ट्विटर पर कई पोस्ट करते हुए ट्रंप पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति को अंतरराष्ट्रीय अपराधी मानता है। खामेनेई ने आरोप लगाया कि ईरान में हुई मौतों और नुकसान के लिए ट्रंप जिम्मेदार हैं। उन्होंने दावा किया कि हाल के विद्रोह की साजिश अमेरिका ने रची थी।

खामेनेई ने लिखा, “हम अमेरिकी राष्ट्रपति को ईरान में हुई मौतों, नुकसानों और मानहानि के लिए दोषी पाते हैं। अमेरिका ने ही योजना बनाई और कार्रवाई की।”

ट्रंप का पलटवार

खामेनेई (Iran Aftermath Update) के बयान के बाद ट्रंप ने भी पलटवार किया। उन्होंने खामेनेई को ‘पागल आदमी’ और ‘बीमार व्यक्ति’ कहा। ट्रंप ने कहा कि 37 साल से चल रही खामेनेई की सत्ता को खत्म होना चाहिए। ट्रंप ने कहा, “यह आदमी पागल है, जिसे अपने देश को ठीक से चलाना चाहिए और लोगों की हत्याएं रोकनी चाहिए। उसके नेतृत्व में उसका देश ऐसी जगह बन गया है जहां कोई नहीं रहना चाहेगा।”

उन्होंने साफ संकेत दिया कि ईरान में नई सत्ता देखने का समय आ गया है और अब नए नेतृत्व पर विचार करना चाहिए।

Iran Aftermath Update: ट्रंप की सैन्य हस्तक्षेप की धमकी

Iran Aftermath Update
Iran Aftermath Update

प्रदर्शनों के दौरान ट्रंप ने कई बार संकेत दिए थे कि अमेरिका ईरान में प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सैन्य कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने ईरानियों से विरोध जारी रखने और सरकारी संस्थानों पर कब्जा करने की अपील तक की थी।

हालांकि बुधवार को ट्रंप ने अपना रुख थोड़ा नरम करते हुए कहा कि उन्हें भरोसा दिलाया गया है कि अब हत्याएं रुक गई हैं।

800 फांसी वाला विवादित बयान

ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले के आकार को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप का बयान और भी विवादित हो गया। उन्होंने कहा, “खामेनेई (Iran Aftermath Update) ने दो दिन पहले 800 से ज्यादा लोगों को फांसी न देकर अपने जीवन का सबसे अच्छा फैसला लिया।” यह बयान साफ संकेत था कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई के बिल्कुल करीब पहुंच गया था।

खामेनेई ने गिनाए नुकसान

खामेनेई ने ट्विटर पर एक लंबा बयान जारी कर ईरान में हुए नुकसान की जानकारी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजराइल के एजेंटों ने घिनौने अपराध किए।

उन्होंने दावा किया कि इस विद्रोह में 250 मस्जिदों और 250 से अधिक शैक्षणिक तथा वैज्ञानिक केंद्रों में तोड़फोड़ की गई। बिजली व्यवस्था, बैंकों और स्वास्थ्य सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया गया। कई हजार लोगों की हत्या की गई। खामेनेई (Iran Aftermath Update) ने कहा कि विद्रोहियों के पास विदेश से मिले हथियार थे। उन्होंने तीन साल की बच्ची समेत कई निर्दोष नागरिकों की हत्या कर दी।

Iran Aftermath Update: चीन ने दिया ईरान को समर्थन

इस पूरे मामले में चीन ने खुलकर ईरान का समर्थन किया है। चीनी राजदूत शू फेहॉन्ग ने बताया कि शनिवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बात की। चीन ने भरोसा दिलाया कि वह ईरानी सरकार और वहां के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। चीन ने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और हितों की रक्षा करने में सक्षम है और जल्द ही देश में स्थिरता बहाल हो जाएगी।

भारतीय नाविकों का मामला

इस पूरे घटनाक्रम के बीच 16 भारतीय नाविक पिछले एक महीने से ईरान (Iran Aftermath Update) में फंसे हुए हैं। भारतीय दूतावास ने इस मामले पर अपडेट जारी किया है। दिसंबर के मध्य में ईरानी अधिकारियों ने एक जहाज MT Valiant Roar को रोक लिया था। इस जहाज पर 16 भारतीय नाविक सवार हैं जो अब तक फंसे हुए हैं।

भारत सरकार अब इस मामले में पूरी तरह सक्रिय हो गई है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ईरानी सरकार पर काउंसलर एक्सेस देने और न्यायिक कार्यवाही में तेजी लाने के लिए लगातार दबाव बना रहा है।

अमेरिकी सीनेटर का बयान

ट्रंप के करीबी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस पूरे मामले को एक नया आयाम दिया है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष सिर्फ राजनीतिक या सैन्य नहीं है, बल्कि एक वैचारिक और धार्मिक लड़ाई का रूप ले चुका है।

ग्राहम ने दावा किया कि यह टकराव अगले हजार साल तक मध्य पूर्व की राजनीति, सुरक्षा ढांचे और धार्मिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

Iran Aftermath Update: ईरान के युवराज की अपील

ईरान के निर्वासित युवराज रजा पहलवी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि ईरानी सरकार के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सब चुप बैठे रहे तो बहुत से लोग मारे जाएंगे।

आगे क्या होगा

फिलहाल सैन्य हमले (Iran Aftermath Update) का खतरा टल गया है, लेकिन स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि सभी विकल्प खुले हैं। अगर अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया तो कड़ा जवाब दिया जाएगा।

दूसरी तरफ खामेनेई ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अमेरिका को जवाबदेह ठहराने से नहीं चूकेंगे। उन्होंने कहा कि ईरान देश को युद्ध की ओर नहीं ले जाना चाहता, लेकिन देश के भीतर और बाहर के अपराधियों को नहीं छोड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाती है, यह देखना बाकी है। लेकिन एक बात तय है कि एक टेक्स्ट मैसेज ने एक बड़े युद्ध को टालने में अहम भूमिका निभाई है।

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