ऑस्कर में भारत का जलवा! भानु अथैया से लेकर ‘नाटू नाटू’ तक, इन भारतीय फिल्मों और कलाकारों ने दुनिया के सबसे बड़े मंच पर रचा इतिहास

भानु अथैया, एआर रहमान से ‘नाटू नाटू’ तक, जानिए ऑस्कर में चमके भारतीय सिनेमा के सितारे

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India at Oscars: 98वां ऑस्कर समारोह 16 मार्च को होने वाला है। इस मौके पर जानिए उन भारतीय फिल्मों और कलाकारों के बारे में जिन्होंने हॉलीवुड के सबसे बड़े मंच पर तिरंगे की शान बढ़ाई।

India at Oscars: ऑस्कर और भारत का पुराना रिश्ता

ऑस्कर यानी अकादमी पुरस्कार दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित फिल्म पुरस्कार माना जाता है। हर साल दुनियाभर के फिल्मकार इस मंच पर अपनी पहचान बनाने का सपना देखते हैं। भारतीय सिनेमा के लिए यह सफर आसान नहीं रहा है लेकिन कुछ ऐसी फिल्में और कलाकार जरूर रहे हैं जिन्होंने इस मंच पर भारत का नाम रोशन किया। 98वां ऑस्कर समारोह 16 मार्च 2026 को भारतीय समयानुसार आयोजित होने वाला है। इस अवसर पर आइए उन भारतीय फिल्मों और प्रतिभाओं पर नजर डालते हैं जिन्होंने ऑस्कर के मंच पर इतिहास रचा। इस साल भारत की आधिकारिक एंट्री फिल्म होमबाउंड थी जो सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म की श्रेणी में भेजी गई थी। हालांकि इस बार पुरस्कार नहीं मिला लेकिन भारतीय सिनेमा की यह यात्रा हमेशा से प्रेरणादायक रही है।

India at Oscars: भानु अथैया, ऑस्कर जीतने वाली पहली भारतीय

भारत और ऑस्कर के रिश्ते की बात करें तो इसकी शुरुआत 1982 में हुई जब कॉस्ट्यूम डिजाइनर भानु अथैया ने इतिहास रच दिया। वह ऑस्कर पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। उन्होंने मशहूर निर्देशक रिचर्ड एटनबरो की ऐतिहासिक फिल्म गांधी के लिए सर्वश्रेष्ठ कॉस्ट्यूम डिजाइन का पुरस्कार जीता। गांधी फिल्म उस साल की सबसे बड़ी फिल्म थी और उसने कुल आठ ऑस्कर अपने नाम किए। भानु अथैया की यह उपलब्धि आज भी भारतीय सिनेमा जगत के लिए गर्व का विषय है।

India at Oscars: स्लमडॉग मिलियनेयर ने दिलाए तीन ऑस्कर

2008 में डैनी बॉयल द्वारा निर्देशित फिल्म स्लमडॉग मिलियनेयर ने दुनियाभर में तहलका मचा दिया। यह फिल्म भले ही ब्रिटिश प्रोडक्शन थी लेकिन इसकी आत्मा पूरी तरह भारतीय थी। मुंबई की गलियों में बसी इस कहानी ने ऑस्कर में भारतीय प्रतिभाओं का डंका बजाया। महान संगीतकार एआर रहमान ने इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ मूल संगीत और सर्वश्रेष्ठ मूल गीत के दो ऑस्कर अपने नाम किए। इसके साथ ही साउंड मिक्सर रेसुल पुकुट्टी ने सर्वश्रेष्ठ साउंड मिक्सिंग का ऑस्कर जीता। महान गीतकार गुलजार ने भी इस फिल्म के गीत जय हो के लिए 81वें ऑस्कर समारोह में सर्वश्रेष्ठ मूल गीत का पुरस्कार जीता।

India at Oscars: स्माइल पिंकी ने दिखाई भारत की ताकत

उसी साल यानी 2008 में एक और फिल्म ने ऑस्कर में भारत का परचम लहराया। मेगन मायलन द्वारा निर्देशित डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट फिल्म स्माइल पिंकी ने सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट फिल्म का पुरस्कार जीता। यह फिल्म ग्रामीण भारत की एक युवती पिंकी की कहानी पर आधारित थी जिसके कटे होंठ की सर्जरी की गई। इस फिल्म ने दुनिया को दिखाया कि एक छोटा सा चिकित्सा हस्तक्षेप किसी इंसान की जिंदगी को किस तरह पूरी तरह बदल सकता है। भारतीय समाज की संवेदनशीलता और मानवता को दर्शाती इस फिल्म ने दर्शकों के दिल जीते।

India at Oscars: पीरियड एंड ऑफ सेंटेंस ने बदली सोच

2018 में गुनीत मोंगा द्वारा निर्मित डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट फिल्म पीरियड एंड ऑफ सेंटेंस ने 91वें ऑस्कर पुरस्कार समारोह में सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट फिल्म का पुरस्कार जीता। यह फिल्म ग्रामीण भारत में महिलाओं के मासिक धर्म से जुड़ी जागरूकता और सामाजिक कलंक पर आधारित थी। इस संवेदनशील विषय को जिस खूबसूरती से पर्दे पर उतारा गया उसने दुनिया का ध्यान खींचा। इस फिल्म ने न केवल ऑस्कर जीता बल्कि भारत में महिला स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने में भी अहम भूमिका निभाई।

India at Oscars: नाटू नाटू ने मचाई धूम

2023 में एसएस राजामौली की महाकाव्य फिल्म आरआरआर ने पूरी दुनिया को झुमा दिया। इस फिल्म के ऊर्जावान और जोशीले गीत नाटू नाटू ने 95वें ऑस्कर समारोह में सर्वश्रेष्ठ मूल गीत का पुरस्कार जीता। यह किसी भारतीय फिल्म के गीत के लिए इस श्रेणी में पहली जीत थी। एमएम कीरावानी के संगीत और चंद्रबोस की कलम से निकले इस गीत ने पहले गोल्डन ग्लोब जीता और फिर ऑस्कर। राजामौली की यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी जबरदस्त रही और दुनियाभर में करीब 1200 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की।

India at Oscars: द एलिफेंट व्हिस्परर्स ने रचा इतिहास

उसी साल 95वें ऑस्कर में भारत को एक और खुशी मिली। तमिल डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट फिल्म द एलिफेंट व्हिस्परर्स ने सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट फिल्म का पुरस्कार जीता। कार्तिकी गोंसाल्वेस के निर्देशन और गुनीत मोंगा के निर्माण में बनी यह नेटफ्लिक्स फिल्म तमिलनाडु के एक आदिवासी दंपति की कहानी है जो एक अनाथ हाथी के बच्चे की माता-पिता की तरह देखभाल करते हैं। इंसान और जानवर के बीच के इस अनोखे और भावुक रिश्ते ने दुनियाभर के दर्शकों की आंखें नम कर दीं। यह पुरस्कार जीतकर गुनीत मोंगा ने एक ही रात में दो ऑस्कर अपने नाम किए जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी।

India at Oscars: नामांकन तक पहुंचीं ये दिग्गज फिल्में

जहां तक सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म की श्रेणी की बात है तो भारत अभी तक इसमें जीत हासिल नहीं कर पाया है। लेकिन कई फिल्में इस पुरस्कार के बेहद करीब पहुंची हैं। 1957 में मदर इंडिया, 1988 में सलाम बॉम्बे और 2001 में आशुतोष गोवारिकर की लगान इस श्रेणी में नामांकित हुईं। लगान तो इस पुरस्कार की दौड़ में बेहद करीब पहुंच गई थी लेकिन आखिरी समय में जीत से चूक गई। भारतीय सिनेमा की यह ऑस्कर यात्रा बताती है कि जब भी हमारे फिल्मकारों ने सच्ची और मौलिक कहानियां कही हैं, दुनिया ने उन्हें सराहा है।

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