मिडिल ईस्ट संकट से भारत का फल निर्यात ठप, बंदरगाहों पर सड़ने लगे केला-अंगूर; सरकार ने स्टोरेज चार्ज माफ कर किसानों और निर्यातकों को दी बड़ी राहत

JNPA ने स्टोरेज और ग्राउंड रेंट पूरी तरह माफ किया, रीफर कंटेनरों पर 80% छूट

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JNPA relief package: अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े युद्ध ने जहां एक तरफ पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को बाधित किया है, वहीं इसका एक और गंभीर असर भारत के फल और सब्जी निर्यातकों पर पड़ा है। खाड़ी देशों की तरफ जाने वाले जहाजों की आवाजाही लगभग पूरी तरह ठप हो जाने से देशभर के बंदरगाहों पर सैकड़ों रीफर कंटेनर फंसे पड़े हैं। इनमें केला, अंगूर, प्याज, तरबूज और अन्य नाशवान माल भरा हुआ है जो हर गुजरते घंटे के साथ सड़ने के करीब आ रहा है। इस संकट की गंभीरता को समझते हुए जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी यानी JNPA ने तत्काल राहत उपायों का ऐलान किया है जिससे निर्यातकों और किसानों को बड़ी राहत मिली है।

JNPA relief package: क्या है पूरा मामला?

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और स्वेज कैनाल मार्ग पर शिपिंग सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। दुनिया की प्रमुख शिपिंग कंपनियों जैसे Maersk, MSC और CMA CGM ने मध्य पूर्व के रूट्स पर अपनी सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं। इसका सीधा नतीजा यह हुआ कि भारत से खाड़ी देशों को निर्यात होने वाला माल बंदरगाहों पर ही अटकता चला गया। अकेले JNPA में 250 से लेकर 1000 तक फल और सब्जी से भरे कंटेनर फंसे हुए हैं। गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर भी करीब 150 कंटेनर इसी संकट की चपेट में हैं। पूरे देश में मिलाकर लगभग 1000 कंटेनर इस संकट से प्रभावित हैं जिनमें बड़े पैमाने पर केला, अंगूर और प्याज जैसी नाशवान वस्तुएं हैं।

JNPA relief package: JNPA ने दी बड़ी राहत, स्टोरेज चार्ज पूरी तरह माफ

महाराष्ट्र के मंत्री जयकुमार रावल ने इस राहत पैकेज की जानकारी देते हुए बताया कि JNPA ने फंसे हुए निर्यात कंटेनरों पर ग्राउंड रेंट, स्टोरेज और ड्वेल टाइम चार्जेस में 100 प्रतिशत की पूरी माफी दी है। सरल शब्दों में कहें तो जो कंटेनर बंदरगाह पर रुके हुए हैं उनसे स्टोरेज का एक भी पैसा नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही रीफर कंटेनरों यानी उन कंटेनरों के लिए जिनमें ताजे फल और सब्जियां ठंडे तापमान पर रखी जाती हैं, बिजली कनेक्शन और प्लग-इन चार्जेस में 80 प्रतिशत की भारी छूट दी गई है। इन कंटेनरों को ठंडा रखने के लिए लगातार बिजली की जरूरत होती है और यह खर्च निर्यातकों के लिए बहुत बड़ा बोझ बन रहा था।

JNPA relief package: राहत की अवधि और पात्रता

यह राहत 28 फरवरी 2026 की मध्यरात्रि से लेकर 14 मार्च 2026 की मध्यरात्रि तक यानी कुल 15 दिनों के लिए लागू रहेगी। इस राहत के दायरे में वे कंटेनर आएंगे जो 28 फरवरी 2026 से टर्मिनल में मौजूद थे या जो 8 मार्च 2026 की सुबह 7 बजे तक गेट-इन हो चुके थे। JNPA ने टर्मिनल ऑपरेटरों को निर्देश दिए हैं कि यह छूट तत्काल प्रभाव से लागू की जाए और प्रभावित कार्गो को प्राथमिकता दी जाए। JNPA ने यह भी आश्वासन दिया है कि प्रभावित कंटेनरों के लिए बंदरगाह पर अतिरिक्त स्टोरेज स्पेस और स्टैकिंग सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी ताकि कोई भी कंटेनर बाहर खुले में न छोड़ना पड़े।

JNPA relief package: किसानों और निर्यातकों के लिए कितनी जरूरी है यह राहत?

यह समझना जरूरी है कि फल और सब्जियों का निर्यात कोई साधारण व्यापार नहीं है। ये सारा माल नाशवान है यानी इसे एक निश्चित समय के भीतर गंतव्य तक पहुंचाना जरूरी होता है। जब जहाज ही नहीं चलेंगे और माल बंदरगाह पर पड़ा रहेगा तो सड़ने का खतरा बढ़ता जाएगा। केला हो या अंगूर, प्याज हो या तरबूज, सभी कुछ ही दिनों में खराब होने लगते हैं। ऐसे में अगर ऊपर से स्टोरेज चार्ज और बिजली बिल भी देना पड़े तो छोटे और मझोले निर्यातक पूरी तरह बर्बाद हो सकते हैं। यही वजह है कि JNPA का यह फैसला किसानों, निर्यातकों और एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट समुदाय के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।

JNPA relief package: वैकल्पिक रूट की तलाश जारी

फिलहाल शिपिंग कंपनियां और सरकार मिलकर वैकल्पिक समुद्री रास्तों की तलाश में जुटी हैं। अफ्रीका के दक्षिणी सिरे से होकर जाने वाला केप ऑफ गुड होप रूट एक विकल्प के रूप में सामने आया है लेकिन यह रास्ता सामान्य मार्ग से काफी लंबा है जिससे समय और लागत दोनों बढ़ेंगे। फिर भी यह नाशवान माल को सड़ने से बचाने का एकमात्र व्यावहारिक विकल्प फिलहाल नजर आ रहा है। महाराष्ट्र सरकार और JNPA की यह संयुक्त पहल इस बात का संकेत है कि सरकार इस संकट को गंभीरता से ले रही है और निर्यातकों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।

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