अमेरिकी LNG पर भारत का स्पष्ट रुख: सस्ती गैस पर ही होगा सौदा, पेट्रोनेट CEO ने दिया साफ संदेश
पेट्रोनेट CEO का साफ संदेश: सस्ती गैस पर ही सौदा, 2030 तक ऊर्जा मिश्रण में 15% हिस्सेदारी लक्ष्य
India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक रिश्तों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संदेश सामने आया है। देश की सबसे बड़ी तरलीकृत प्राकृतिक गैस आयातक कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अक्षय कुमार सिंह ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि भारत अमेरिका से एलएनजी तभी खरीदेगा जब वह उचित और प्रतिस्पर्धी कीमत पर उपलब्ध होगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर गहन बातचीत चल रही है।
सिंह ने जोर देकर कहा कि भारत ऐसी गैस खरीदना चाहता है जो किफायती हो और देश के उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि गैस की कीमत अन्य ईंधन विकल्पों की तुलना में प्रतिस्पर्धी रहेगी, तभी उपभोक्ता कोयले और तेल जैसे पारंपरिक ईंधनों से गैस की ओर स्थानांतरित होंगे।
India-US Trade Deal: अमेरिकी व्यापार समझौते का संदर्भ
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आयात शुल्क: हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर आयात शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की।
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व्यापार लक्ष्य: भारत ने अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदने की इच्छा जताई है। इस लक्ष्य में एलएनजी की महत्वपूर्ण भूमिका होने की उम्मीद है।
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आर्थिक विवेक: पेट्रोनेट के सीईओ का बयान दर्शाता है कि भारत राजनीतिक दबाव में आकर महंगी वस्तुओं की खरीद नहीं करेगा, जो अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक हो सकती है।
India-US Trade Deal: ऊर्जा मिश्रण में गैस की बढ़ती हिस्सेदारी
भारत वर्तमान में विश्व का चौथा सबसे बड़ा एलएनजी आयातक देश है।
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लक्ष्य 2030: सरकार ने महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है कि 2030 तक देश के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी वर्तमान 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत की जाएगी।
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बढ़ती मांग: फर्टिलाइजर, सिटी गैस वितरण, रिफाइनिंग और बिजली उत्पादन जैसे क्षेत्रों में गैस की मांग तेजी से बढ़ रही है।
India-US Trade Deal: बिजली क्षेत्र की चुनौती
भारत में लगभग 27,000 मेगावाट की गैस आधारित बिजली उत्पादन क्षमता स्थापित है।
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कम उपयोग: सस्ती गैस की अनुपलब्धता के कारण ये संयंत्र अपनी क्षमता के केवल एक-चौथाई से भी कम पर संचालित हो रहे हैं।
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समाधान: यदि सस्ती एलएनजी उपलब्ध हो, तो ये निष्क्रिय या कम उपयोग वाले संयंत्र फिर से सक्रिय हो सकते हैं, जिससे कोयले पर निर्भरता कम होगी और उत्सर्जन कटौती के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
India-US Trade Deal: दीर्घकालिक अनुबंध और वैश्विक बाजार
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पेट्रोनेट की रणनीति: कंपनी कतर और ऑस्ट्रेलिया से दीर्घकालिक अनुबंधों के तहत गैस आयात करती है और अब नए समझौतों की तलाश कर रही है। साथ ही दाहेज टर्मिनल का विस्तार और गोपालपुर में नया टर्मिनल स्थापित किया जा रहा है।
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बाजार की स्थिति: अमेरिका एक प्रमुख निर्यातक बन गया है, लेकिन अमेरिकी एलएनजी अक्सर पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं की तुलना में महंगी होती है।
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भारत का संदेश: भारत राजनीतिक दबाव में आर्थिक रूप से अव्यावहारिक सौदे नहीं करेगा। यह दृष्टिकोण दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
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