India-US Trade Deal: भारत के इतिहास में पहली बार एक साल में 5 ट्रेड डील, वैश्विक GDP में 50% से अधिक की साझेदारी

अमेरिका और यूरोपियन यूनियन से समझौते ने रचा इतिहास, ग्लोबल ट्रेड में भारत की मजबूत स्थिति

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India-US Trade Deal: भारत ने अपने आर्थिक इतिहास में पहली बार एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। देश ने बीते एक साल के भीतर पांच बड़े व्यापारिक समझौते किए हैं, जिनकी वैश्विक GDP में कुल हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से भी अधिक है। सबसे ताजा ट्रेड डील की घोषणा अमेरिका के साथ हुई है, जो पिछले कुछ महीनों से दोनों देशों के बीच तनाव का मुद्दा बनी हुई थी। इससे पहले भारत ने यूरोपियन यूनियन के साथ भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर मुहर लगाई थी।

India-US Trade Deal: अमेरिका के साथ ऐतिहासिक ट्रेड डील

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात करने के बाद भारतीय सामानों पर लगने वाले टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के लिए जो अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, उसे भी खत्म किया जा रहा है। यह भारत के लिए बेहद बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक सफलता है।

अमेरिका क्यों है भारत के लिए खास

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है। पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में भारत के कुल निर्यात का करीब 20 प्रतिशत माल अमेरिका गया, जबकि भारत के आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 6.3 प्रतिशत रही। दोनों देशों के बीच ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल शुरू होने के बाद से ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही थी। इसके तहत मौजूदा 191 अरब डॉलर के व्यापार को 2030 तक 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

यूरोपियन यूनियन से भी बड़ी सफलता

कुछ ही दिन पहले भारत और यूरोपियन यूनियन ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर मुहर लगाई है। इस तरह से भारत के आर्थिक इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि दुनिया के दो सबसे बड़े व्यापारिक समूहों के साथ एक साल के भीतर व्यापारिक संधि हो गई है। यूरोपियन यूनियन में 27 देश शामिल हैं और यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

India-US Trade Deal: एक साल में पांच बड़ी ट्रेड डील

अमेरिका और यूरोपियन यूनियन से पहले भारत ने ब्रिटेन (यूके), ओमान और न्यूजीलैंड के साथ भी ट्रेड डील पूरी कर ली है। यह सभी समझौते पिछले एक साल के भीतर हुए हैं, जो भारत की आक्रामक और सकारात्मक व्यापार कूटनीति का परिणाम है। इन पांचों समझौतों ने मिलकर भारत को वैश्विक व्यापार में एक मजबूत स्थिति प्रदान की है।

वैश्विक GDP में 50% से अधिक साझेदारी

अगर 2025 के वैश्विक GDP में मोटे तौर पर हिस्सेदारी देखें तो भारत, अमेरिका, यूरोपियन यूनियन (27 देश), यूके, ओमान और न्यूजीलैंड को मिलाकर यह 50 प्रतिशत से 55 प्रतिशत तक हो जाती है। अकेले यूरोपियन यूनियन और भारत की ही वैश्विक GDP में हिस्सेदारी जोड़ें तो यह करीब 25 प्रतिशत है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत ने दुनिया की आधी से ज्यादा अर्थव्यवस्था के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत कर लिए हैं।

प्रतिस्पर्धी देशों पर अधिक टैरिफ

अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील इस मायने में और भी खास है कि अब बांग्लादेश (20%), वियतनाम (20%) और थाईलैंड (19%) जैसे देशों पर लगा अमेरिकी टैरिफ भारत से ज्यादा हो गया है। यह भारतीय निर्यातकों को इन देशों के मुकाबले प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देगा। भारतीय सामान अब अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी दरों पर उपलब्ध हो सकेंगे।

India-US Trade Deal: ग्लोबल ट्रेड में बड़ी हिस्सेदारी

अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, यूरोपियन यूनियन दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (अगर चीन को अकेले देखें तो) और भारत चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। ब्रिटेन हाल तक टॉप फाइव इकॉनमी में शामिल रहा है। इस तरह से दुनिया की सबसे प्रभावशाली अर्थव्यवस्थाओं का एक बड़ा समूह अब भारत के साथ व्यापारिक रूप से मजबूती से जुड़ चुका है। अगर ग्लोबल ट्रेड में इन सभी की हिस्सेदारी देखें तो यह 38 से 40 प्रतिशत के करीब है।

पहले से मौजूद व्यापार संधियां

इन पांच नए समझौतों के अलावा भारत का कई देशों के साथ पहले से ही रीजनल ट्रेड एग्रीमेंट और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट चल रहा है। इनमें जापान, दक्षिण कोरिया, आसियान क्षेत्र के देश, सार्क से जुड़े देश, मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल हैं। इन सभी समझौतों को मिलाकर देखें तो भारत की वैश्विक व्यापार में पहुंच और भी व्यापक हो जाती है।

निर्यात को मिलेगा बढ़ावा

इन व्यापारिक समझौतों से भारतीय निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। कम टैरिफ का मतलब है कि भारतीय उत्पाद विदेशी बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे। इससे भारतीय कंपनियों को नए बाजार मिलेंगे और निर्यात में वृद्धि होगी। फार्मा, ऑटो, टेक्सटाइल, IT और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों को विशेष लाभ होगा।

India-US Trade Deal: रोजगार सृजन की संभावना

निर्यात में वृद्धि से भारत में रोजगार सृजन में भी मदद मिलेगी। जब कंपनियां अधिक उत्पादन करेंगी और नए बाजारों में प्रवेश करेंगी, तो स्वाभाविक रूप से अधिक लोगों को नौकरी मिलेगी। विशेषकर विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे। यह सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी बल देगा।

विदेशी निवेश में बढ़ोतरी

मजबूत व्यापारिक संबंध विदेशी निवेश को भी आकर्षित करते हैं। जब विदेशी कंपनियां देखती हैं कि भारत के पास मजबूत व्यापार समझौते हैं और वैश्विक बाजारों तक पहुंच है, तो वे भारत में निवेश करने के लिए अधिक इच्छुक होती हैं। इससे एफडीआई में वृद्धि होगी और भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

कूटनीतिक सफलता का प्रतीक

ये व्यापारिक समझौते केवल आर्थिक नहीं, बल्कि कूटनीतिक सफलता के भी प्रतीक हैं। भारत ने दिखाया है कि वह वैश्विक स्तर पर अपने हितों की रक्षा करने और बेहतर सौदे करने में सक्षम है। ट्रंप प्रशासन जैसे कठोर रुख वाले प्रशासन से भी भारत ने फायदेमंद समझौता किया, यह भारतीय कूटनीति की परिपक्वता का संकेत है।

India-US Trade Deal: वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका

इन समझौतों से यह भी स्पष्ट होता है कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। दुनिया के प्रमुख आर्थिक गुट भारत को एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझीदार के रूप में देख रहे हैं। यह भारत के बढ़ते आर्थिक कद और वैश्विक महत्व का प्रमाण है।

भारत के लिए यह ऐतिहासिक उपलब्धि है कि एक साल के भीतर पांच बड़े व्यापारिक समझौते हुए हैं जो वैश्विक GDP के आधे से अधिक हिस्से को कवर करते हैं। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करता है।

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