भारत-ब्रिटेन FTA मई की शुरुआत तक लागू होने की उम्मीद, 99% भारतीय निर्यात को मिलेगी शून्य टैरिफ पहुंच, GCC और इजरायल वार्ता संघर्ष के कारण धीमी, जानें सभी व्यापार समझौतों का पूरा स्टेटस
99% भारतीय उत्पाद होंगे ड्यूटी फ्री, EU बाजार में भी बड़ी एंट्री, जानें भारत को कितना होगा लाभ
India-UK Trade Deal: भारत सरकार विभिन्न देशों और आर्थिक समूहों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों पर तेजी से काम कर रही है। इन समझौतों का मुख्य उद्देश्य भारतीय निर्यात को बढ़ावा देना, विदेशी बाजारों तक आसान पहुंच बनाना, रोजगार सृजन करना और देश की आर्थिक विकास दर को गति देना है। ब्रिटेन के साथ FTA सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जल्द लागू होने वाला है। इसके अलावा यूरोपीय संघ के साथ हुआ समझौता जिसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है वह भी बहुत बड़ा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इन सभी व्यापार समझौतों की वर्तमान स्थिति क्या है और इनसे भारत को क्या फायदे होंगे।
भारत-ब्रिटेन FTA मई तक लागू होने की तैयारी
भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता यानी Comprehensive Economic and Trade Agreement पर 24 जुलाई 2025 को औपचारिक हस्ताक्षर किए गए थे। यह समझौता दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक ब्रेक्सिट के बाद की सबसे बड़ी आर्थिक डील है। लगभग 4 साल की लंबी और जटिल बातचीत के बाद यह समझौता संभव हो सका। अब इस समझौते को व्यावहारिक रूप से लागू करने के लिए कुछ अंतिम प्रक्रियाएं बाकी हैं। सबसे पहले ब्रिटेन की संसद यानी पार्लियामेंट से इस समझौते को औपचारिक मंजूरी मिलनी जरूरी है।
ब्रिटिश संसद में यह मामला पेश किया जा चुका है और विभिन्न समितियां इसकी जांच कर रही हैं। उम्मीद है कि अप्रैल के अंत तक संसदीय मंजूरी मिल जाएगी। दूसरी ओर कुछ तकनीकी और गठबंधन से जुड़े मुद्दे हैं जिन्हें दोनों पक्षों की टीमें सुलझा रही हैं। इनमें कुछ उत्पादों की टैरिफ लाइनें, सेवा क्षेत्र के नियम और मानक प्रमाणीकरण से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि ये सभी मुद्दे छोटे हैं और जल्द सुलझ जाएंगे। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मई 2026 की शुरुआत में यह समझौता पूरी तरह लागू हो जाएगा।
ब्रिटेन FTA से भारत को बड़े फायदे
भारत-ब्रिटेन FTA के तहत भारत के 99 प्रतिशत निर्यात उत्पादों को ब्रिटिश बाजार में शून्य टैरिफ यानी बिना किसी सीमा शुल्क के प्रवेश मिलेगा। यह बहुत बड़ा फायदा है। इससे भारतीय वस्त्र उद्योग, चमड़ा उद्योग, जूता उद्योग, आभूषण क्षेत्र, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य श्रम गहन उत्पादों को ब्रिटेन में आसानी से और प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बाजार तक पहुंच मिलेगी। वर्तमान में इन उत्पादों पर 5 से 15 प्रतिशत तक टैरिफ लगता है। टैरिफ हटने से भारतीय उत्पाद सस्ते हो जाएंगे और मांग बढ़ेगी। इससे निर्यात में बड़ी वृद्धि होगी।
दूसरी ओर ब्रिटेन के कुछ प्रमुख उत्पादों जैसे लग्जरी कारों, वाइन, व्हिस्की और अन्य वस्तुओं पर भारत में लागू आयात शुल्क में क्रमिक कमी की जाएगी। यह कमी तुरंत नहीं बल्कि 10 से 15 साल की अवधि में धीरे धीरे लागू होगी ताकि भारतीय उद्योग को समायोजन का समय मिले। इससे ये उत्पाद भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सस्ते हो जाएंगे। यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने, दोनों देशों में रोजगार सृजन और समग्र आर्थिक विकास को गति देने के लिए सावधानीपूर्वक डिजाइन किया गया है।
EU FTA को “मदर ऑफ ऑल डील्स” क्यों कहा जा रहा?
इस साल 27 जनवरी 2026 को भारत और यूरोपीय संघ यानी EU ने मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत सफलतापूर्वक पूरी होने की आधिकारिक घोषणा की थी। इस समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” यानी सभी डील्स की जननी कहा गया है क्योंकि यह आकार और महत्व में अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता है। यूरोपीय संघ में 27 विकसित देश शामिल हैं जिनमें जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्पेन, नीदरलैंड, बेल्जियम, पोलैंड, स्वीडन और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं हैं। इस समझौते के तहत भारत के 93 प्रतिशत निर्यात उत्पादों को इन 27 देशों के विशाल बाजार में ड्यूटी फ्री यानी बिना शुल्क के पहुंच मिलेगी।
यह भारतीय निर्यातकों के लिए सुनहरा अवसर है। वस्त्र, चमड़ा, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, रसायन, फार्मा और कृषि उत्पादों के निर्यात में जबरदस्त वृद्धि की उम्मीद है। दूसरी ओर यूरोपीय देशों से आने वाली लग्जरी कारों विशेष रूप से जर्मन ब्रांड जैसे मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी और अन्य, साथ ही फ्रेंच और इतालवी वाइन पर भारत में लगने वाले भारी आयात शुल्क में कमी की जाएगी। इससे ये उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते हो जाएंगे। हालांकि भारत ने अपने किसानों और घरेलू उद्योग के हितों का पूरा ध्यान रखा है। डेयरी उत्पाद, कुछ कृषि वस्तुएं और संवेदनशील उद्योगों को इस समझौते से बाहर रखा गया है।
EU FTA का अनुसमर्थन नवंबर तक
यूरोपीय संघ के साथ हुआ व्यापार समझौता अब अनुसमर्थन यानी Ratification की प्रक्रिया में है। अनुसमर्थन का मतलब है कि EU के सभी 27 सदस्य देशों की संसदों और यूरोपीय पार्लियामेंट को इस समझौते को औपचारिक रूप से मंजूरी देनी होगी। यह एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है। अधिकारियों के अनुसार यूरोपीय संघ ने इस अनुसमर्थन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए नवंबर 2026 तक की समयसीमा निर्धारित की है।
अगर सब कुछ योजना के अनुसार चला तो यह महत्वपूर्ण समझौता भी साल 2026 के अंत तक यानी नवंबर या दिसंबर तक पूरी तरह लागू हो सकता है। इससे भारत के निर्यात को बहुत बड़ा बूस्ट मिलेगा। यूरोपीय बाजार दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे समृद्ध बाजार है। वहां उच्च क्रय शक्ति वाले उपभोक्ता हैं। भारतीय उत्पादों की अच्छी मांग है। टैरिफ हटने से निर्यात में 30 से 40 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।
GCC और इजरायल के साथ वार्ता क्यों धीमी पड़ी?
भारत खाड़ी सहयोग परिषद यानी GCC के साथ भी FTA पर बातचीत कर रहा है। GCC में छह देश शामिल हैं: सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन। ये सभी तेल समृद्ध और आर्थिक रूप से मजबूत देश हैं। भारत का इनके साथ बहुत गहरा व्यापार संबंध है। ये देश भारत को कच्चा तेल बेचते हैं और भारत इन्हें खाद्य पदार्थ, निर्मित सामान और सेवाएं निर्यात करता है। एक FTA से दोनों पक्षों को फायदा होगा।
इसी तरह इजरायल के साथ भी FTA की बातचीत चल रही थी। इजरायल तकनीकी रूप से बहुत उन्नत देश है और रक्षा, कृषि तकनीक, जल प्रबंधन और अन्य क्षेत्रों में सहयोग संभव है। लेकिन दुर्भाग्य से पिछले कुछ महीनों से मध्य पूर्व में गंभीर सैन्य संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव चल रहा है। ईरान और इजरायल के बीच सीधा संघर्ष हो गया है। अमेरिका भी शामिल है। इस क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण GCC देश और इजरायल अभी व्यापार वार्ता पर पूरा ध्यान नहीं दे पा रहे। उनकी प्राथमिकता सुरक्षा और स्थिरता है। इसलिए इन देशों के साथ चल रही व्यापार वार्ताएं अस्थायी रूप से धीमी पड़ गई हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही स्थिति सामान्य होगी बातचीत फिर तेज हो जाएगी।
अमेरिका के साथ व्यापार डील की स्थिति
संयुक्त राज्य अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। द्विपक्षीय व्यापार 200 बिलियन डॉलर से अधिक का है। दोनों देशों के बीच एक व्यापक व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है। लेकिन अमेरिका के साथ डील बहुत जटिल है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया जारी है लेकिन कोई भी अंतिम समझौता इस बात पर निर्भर करता है कि भारत को बेहतर और तरजीही बाजार पहुंच मिलती है या नहीं।
तरजीही बाजार पहुंच का मतलब है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों को अन्य देशों की तुलना में कम टैरिफ और आसान नियमों के साथ प्रवेश मिले। अगर भारत को यह महत्वपूर्ण लाभ मिलता है तभी यह डील आगे बढ़ेगी। नहीं तो भारत के लिए यह समझौता फायदेमंद नहीं होगा। अमेरिका अपनी शर्तें लगाता है और कई मुद्दों पर सख्त रुख रखता है। इसलिए बातचीत धीरे चल रही है। लेकिन दोनों पक्ष प्रतिबद्ध हैं और एक संतुलित डील की तलाश में हैं।
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