India mobile manufacturing scheme: मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग को नई उड़ान, सरकार लाएगी 62,500 करोड़ रुपये की स्कीम, Apple और Samsung को बड़ा फायदा

Apple, Samsung समेत कंपनियों को मिलेगा इंसेंटिव, रोजगार और निर्यात को मिलेगी नई रफ्तार

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India mobile manufacturing scheme: भारत सरकार डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया अभियान को एक नई और अभूतपूर्व गति देने के लिए पूरी तरह तैयार है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए 62,500 करोड़ रुपये की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी प्रोत्साहन स्कीम को मंजूरी दे दी है। यह नई स्कीम देश के भीतर इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को बढ़ाने, वैश्विक एक्सपोर्ट में हिस्सेदारी मजबूत करने और बड़े स्तर पर रोजगार सृजन में एक महत्वपूर्ण व युगांतकारी भूमिका निभाएगी। एप्पल (Apple), सैमसंग (Samsung) जैसी दिग्गज ग्लोबल कंपनियां और स्थापित भारतीय ब्रांड्स इस सरकारी स्कीम का सीधा फायदा उठा सकेंगे, जिससे देश में स्मार्टफोन उत्पादन में भारी तेजी आएगी और भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन का एक बेहद मजबूत हिस्सा बनकर उभरेगा।

नई स्कीम के मुख्य प्रावधान, पांच वर्षों की अवधि और रोजगार सृजन का बड़ा लक्ष्य

सरकार की इस नई मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत मोबाइल फोन निर्माताओं को उनकी वास्तविक घरेलू बिक्री के आधार पर 2.25 प्रतिशत से लेकर 5 प्रतिशत तक का नकद इंसेंटिव प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर सोर्सिंग किए जाने वाले विभिन्न मोबाइल कंपोनेंट्स और कल-पुर्जों पर कंपनियों को अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। भारतीय मूल के घरेलू ब्रांड्स को बढ़ावा देने के लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और एडवांस डिजाइनिंग के लिए उनकी कुल बिक्री पर 3 प्रतिशत का अतिरिक्त इंसेंटिव देने का नियम बनाया गया है। इस पूरी स्कीम की कुल अवधि पांच वर्ष की तय की गई है, जो आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 से शुरू होकर वित्तीय वर्ष 2030-31 तक निर्बाध रूप से चलेगी। सरकारी आकलनों के अनुसार, इस बड़ी योजना से देश में लगभग 60,000 अतिरिक्त प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की ठोस उम्मीद है और इसके प्रभाव से कुल मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग का आंकड़ा 39 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच सकता है।

पिछली पीएलआई (PLI) स्कीम का सफल सफर और इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट का नया रिकॉर्ड

देश में इससे पहले लागू की गई प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम ने भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को एक नई और ऐतिहासिक ऊंचाई प्रदान की थी। उसी नीति का परिणाम था कि एप्पल और सैमसंग जैसी दुनिया की अग्रणी टेक कंपनियों ने भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और असेंबलिंग प्लांट्स का तेजी से विस्तार किया। इसके चलते भारत से आईफोन (iPhone) का वैश्विक निर्यात बहुत तेजी से बढ़ा और देश का कुल इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट रिकॉर्ड स्तर पर जा पहुंचा। सरकार की यह नई नीति पुरानी सफल स्कीम के अनुभवों और उसकी ऐतिहासिक सफलता को और आगे बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

एप्पल और सैमसंग की मजबूत भूमिका, फॉक्सकॉर्न व टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का वैश्विक प्रभाव

वर्तमान में एप्पल की प्रमुख ग्लोबल पार्टनर कंपनियां जैसे कि फॉक्सकॉर्न (Foxconn) और घरेलू स्तर पर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) भारत में बहुत ही बड़े पैमाने पर आईफोन के लेटेस्ट मॉडल्स को असेंबल और मैन्युफैक्चर कर रही हैं। इसके साथ ही, दक्षिण कोरियाई दिग्गज कंपनी सैमसंग भी देश के भीतर दुनिया का अपना सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र संचालित कर रही है। सरकार की यह नई 62,500 करोड़ रुपये की नीति इन सभी बड़ी कंपनियों को भारत में अपनी उत्पादन क्षमता को दोगुना करने के लिए और अधिक प्रोत्साहित करेगी, जिससे आने वाले समय में प्रीमियम आईफोन और सैमसंग फोन्स का भारत से उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय निर्यात कई गुना बढ़ जाएगा।

देश की अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव, अमेरिकी बाजारों में मांग और एमएसएमई (MSME) को लाभ

इस मेगा प्रोत्साहन स्कीम से न केवल इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में काम करने वाले लाखों कुशल व अकुशल युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, बल्कि पूरी औद्योगिक सप्लाई चेन मजबूत होने से देश के छोटे उद्योगों और एमएसएमई (MSME) सेक्टर को भी कल-पुर्जे बनाने के नए ठेके मिलेंगे। इस नीति के दम पर भारत आने वाले वर्षों में मोबाइल फोन निर्यात के मामले में विश्व का सबसे प्रमुख और विश्वसनीय केंद्र बन सकता है, जिससे अमेरिका और यूरोपीय देशों जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत में बने स्मार्टफोन्स की मांग में भारी इजाफा होगा।

India mobile manufacturing scheme: औद्योगिक चुनौतियां, सरकार की आंतरिक तैयारी और भारतीय घरेलू ब्रांड्स को मिलने वाले नए अवसर

हालांकि इस बड़ी स्कीम के सफल क्रियान्वयन के साथ कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं, जिसमें देश के भीतर एक उच्च कुशल वर्कफोर्स (Skilled Workforce) तैयार करना, विश्वस्तरीय औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास करना और वैश्विक कंपनियों से स्थानीय स्तर पर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को सुगम बनाना शामिल है। भारत सरकार वर्तमान में इन सभी महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दों पर बहुत बारीकी से फोकस कर रही है और स्थानीय कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग को अनिवार्य रूप से बढ़ावा देने से देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता काफी मजबूत होगी। इसके साथ ही, माइक्रोमैक्स (Micromax) और लावा (Lava) जैसे पारंपरिक भारतीय ब्रांड्स को भी R&D पर विशेष ध्यान देने के कारण बाजार में दोबारा मजबूती से खड़े होने के नए अवसर प्राप्त होंगे।

निष्कर्ष: सरकार द्वारा स्वीकृत की गई 62,500 करोड़ रुपये (India mobile manufacturing scheme) की यह नई व्यापक नीति देश के मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को एक नई और ऐतिहासिक उड़ान देने की क्षमता रखती है। इससे एप्पल, सैमसंग और घरेलू भारतीय कंपनियों को समान रूप से आगे बढ़ने का मौका मिलेगा, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा। बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और एक्सपोर्ट में होने वाली भारी बढ़ोतरी देश की जीडीपी ग्रोथ को रफ्तार देगी और यह कदम मेक इन इंडिया को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दिलाएगा।

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