भारत ने बचाई ईरानी नाविकों की जान! अमेरिकी हमले से डूबे IRIS Dena के 183 क्रू मेंबर्स को कोच्चि में दी शरण, 32 बचाए गए, 87 शहीद
IRIS Dena अमेरिकी पनडुब्बी से डूबा, भारत ने IRIS Lavan को कोच्चि में डॉकिंग दी, 183 नाविक सुरक्षित, 32 बचाए गए
IRIS Dena incident: हिंद महासागर में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत ने एक बेहद संवेदनशील और मानवीय कदम उठाया है। जब ईरान का युद्धपोत IRIS Lavan तकनीकी खराबी के कारण हिंद महासागर में मुश्किल में फंसा, तो भारत ने बिना देरी किए उसे कोच्चि बंदरगाह में शरण देने की इजाजत दे दी। इस युद्धपोत पर सवार सभी 183 नाविक अभी सुरक्षित हैं और उन्हें कोच्चि स्थित नौसेना परिसर में ठहराया गया है।
IRIS Dena incident: तकनीकी खराबी ने बदल दिया पूरा घटनाक्रम
सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 28 फरवरी 2026 को IRIS Lavan में अचानक कुछ तकनीकी दिक्कतें सामने आईं। इसके बाद ईरान ने भारत सरकार से संपर्क कर इस युद्धपोत को भारतीय बंदरगाह पर डॉकिंग की अनुमति मांगी। भारत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 1 मार्च को ही इसकी औपचारिक मंजूरी दे दी। इसके बाद यह युद्धपोत 4 मार्च को कोच्चि बंदरगाह पर डॉक हो गया। यह युद्धपोत पहले से ही इस इलाके में मौजूद था क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने के लिए हिंद महासागर क्षेत्र में तैनात था। तकनीकी खराबी के समय यह श्रीलंका के दक्षिणी हिस्से के करीब था।
IRIS Dena incident: IRIS Dena पर हुआ वो हमला जिसने दुनिया को हिला दिया
भारत द्वारा IRIS Lavan को डॉकिंग की मंजूरी दिए जाने के कुछ ही दिन बाद एक बेहद गंभीर घटना घटी। ईरान का एक और युद्धपोत IRIS Dena, जो इसी क्षेत्र में था, उसे श्रीलंका के पास अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने टारपीडो हमले में नष्ट कर दिया। यह घटना मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के संदर्भ में अत्यंत विस्फोटक मानी जा रही है। IRIS Dena कोई साधारण जलपोत नहीं था। यह भारी तोपों, जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, एंटी शिप मिसाइलों और टारपीडो जैसे आधुनिक हथियारों से पूरी तरह लैस था। यह युद्धपोत विशाखापत्तनम में आयोजित मिलान नौसेना युद्धाभ्यास में भाग लेने के बाद वापस ईरान की ओर लौट रहा था।
IRIS Dena incident: 87 नाविक शहीद, 32 को बचाया गया
इस टारपीडो हमले में IRIS Dena हिंद महासागर की गहराइयों में समा गया। इस दुखद हादसे में कम से कम 87 ईरानी नाविकों की जान चली गई। मुंबई में ईरान के कॉन्सुल जनरल सईद रजा मोसायेब मोतलाग ने बताया कि अमेरिकी पनडुब्बी ने इस युद्धपोत को पहले से कोई चेतावनी नहीं दी और अचानक हमला कर दिया, जिससे जहाज में जोरदार धमाका हुआ। उन्होंने कहा कि इस हमले में करीब 100 या उससे भी अधिक बहादुर ईरानी सैनिक शहीद हो गए। युद्धपोत से आपातकालीन संदेश मिलते ही श्रीलंका ने तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू किया। इस अभियान में लगभग 32 नाविकों को सुरक्षित बचाने में सफलता मिली।
IRIS Dena incident: भारतीय नौसेना ने भी निभाई जिम्मेदारी
इस आपातकालीन स्थिति में भारतीय नौसेना ने भी बेहद तत्परता से अपनी जिम्मेदारी निभाई। डिस्ट्रेस कॉल मिलते ही नौसेना ने खोज और बचाव अभियान के लिए INS तरंगिनी को तुरंत रवाना किया। इसके साथ ही INS इक्शाक को भी उस इलाके में भेजा गया। भारतीय नौसेना श्रीलंका की नौसेना के साथ मिलकर पूरे अभियान में समन्वय बना रही है। यह भारत की उस परंपरा का हिस्सा है जिसमें हिंद महासागर क्षेत्र में किसी भी संकट के समय भारत पहले मददगार के रूप में सामने आता है, चाहे वह किसी भी देश का मामला हो।
IRIS Dena incident: ईरान का आरोप, बिना चेतावनी हुआ हमला
ईरान ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि अमेरिकी पनडुब्बी ने किसी भी अंतरराष्ट्रीय नियम का पालन किए बिना और बिना कोई पूर्व चेतावनी दिए, सीधे हमला कर दिया। यह घटना ऐसे समय में हुई जब मध्य पूर्व में पहले से ही तनाव चरम पर है और अमेरिका तथा ईरान के बीच कूटनीतिक रिश्ते बेहद खराब दौर से गुजर रहे हैं। इस घटना के बाद पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में हलचल मच गई है। कई देशों ने इस हमले पर चिंता जताई है।
IRIS Dena incident: भारत की कूटनीतिक समझदारी की मिसाल
इस पूरे घटनाक्रम में भारत की भूमिका बेहद संतुलित और दूरदर्शी रही। एक तरफ जहाँ अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव हो रहा है, वहीं भारत ने मानवीय आधार पर ईरानी नाविकों की मदद करने में कोई देरी नहीं की। IRIS Lavan के 183 क्रू मेंबर्स को भारतीय नौसेना की सुविधाओं में सुरक्षित रखा गया है। भारत की यह नीति हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी “नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर” की भूमिका को और मजबूत करती है। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह किसी भी देश के नाविकों की जान बचाने में पीछे नहीं हटेगा।
आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस हमले के बाद ईरान क्या कदम उठाएगा। IRIS Lavan अभी कोच्चि में है और उसके नाविक भारतीय नौसेना की देखरेख में सुरक्षित हैं। युद्धपोत की तकनीकी मरम्मत के बाद यह ईरान वापस लौटेगा। लेकिन इस बीच हिंद महासागर में बढ़ते अमेरिका ईरान तनाव को देखते हुए भारत के लिए यह इलाका कूटनीतिक दृष्टि से और भी संवेदनशील हो गया है। भारत सरकार ने अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक भारत स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है और अपने राष्ट्रीय हितों तथा मानवीय दायित्वों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
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