मुंबई में भारत की पहली मेलोडी रोड का उद्घाटन, गाड़ी गुजरते ही बजेगी ‘जय हो’ की धुन
CM देवेंद्र फडणवीस ने किया शुभारंभ, कोस्टल रोड पर 500 मीटर के हिस्से में लगाई गई विशेष संगीत पट्टियां
Mumbai: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में बुधवार 11 फरवरी 2026 को एक अनोखी और रोमांचक पहल का उद्घाटन किया गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने धर्मवीर स्वराज्यरक्षक छत्रपति संभाजी महाराज मुंबई कोस्टल रोड पर देश की पहली ‘मेलोडी रोड’ यानी म्यूजिकल रोड का शुभारंभ किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना के प्रमुख एकनाथ शिंदे भी उपस्थित रहे। यह मेलोडी रोड अमरसन्स गार्डन से ब्रीच कैंडी तक फैली हुई है।
इस अभिनव परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जब कोई वाहन इस सड़क के निर्धारित हिस्से पर निश्चित गति से गुजरता है तो सड़क से ऑस्कर विजेता फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ के प्रसिद्ध गीत ‘जय हो-जय हो’ की मधुर धुन सुनाई देने लगती है। यह प्रयोग दुनिया में पांचवां और भारत में पहला है। पहले चरण में 500 मीटर लंबा यह म्यूजिकल रोड सेक्शन तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस अवसर पर कहा कि यह पहल मुंबई की पहचान में एक नया आयाम जोड़ेगी। अब कोस्टल रोड पर यात्रा न केवल तेज और ट्रैफिक-फ्री होगी बल्कि संगीतमय और यादगार भी होगी। यह परियोजना आधुनिक इंजीनियरिंग और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का अनूठा मिश्रण है। आइए विस्तार से जानते हैं कि यह मेलोडी रोड कैसे काम करती है, इसके पीछे की तकनीक क्या है और दुनिया में इस तरह के कौन से अन्य उदाहरण मौजूद हैं।
मेलोडी रोड का स्थान और विवरण
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मुंबई की यह पहली मेलोडी रोड धर्मवीर स्वराज्यरक्षक छत्रपति संभाजी महाराज कोस्टल रोड पर स्थित है।
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मेलोडी रोड का यह खंड अमरसन्स गार्डन से ब्रीच कैंडी तक फैला हुआ है।
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विशेष रूप से, यह संगीतमय सड़क नरीमन पॉइंट से वर्ली की ओर जाने वाली लेन पर बनाई गई है।
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पहले चरण में केवल 500 मीटर लंबे हिस्से को मेलोडी रोड के रूप में विकसित किया गया है।
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इस 500 मीटर के खंड में सड़क की सतह पर विशेष ग्रूव्स यानी संगीत पट्टियां बनाई गई हैं।
Mumbai: कैसे काम करती है मेलोडी रोड?
मेलोडी रोड की तकनीक बेहद दिलचस्प और वैज्ञानिक है। इसमें ध्वनि विज्ञान और इंजीनियरिंग का सुंदर संयोजन है।
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सड़क की सतह पर विशेष ग्रूव्स (खांचे या पट्टियां) बनाई गई हैं। ये खांचे विभिन्न गहराई, चौड़ाई और एक-दूसरे से निश्चित दूरी पर स्थित हैं।
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जब कोई वाहन 70-80 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से इन पट्टियों पर से गुजरता है तो वाहन के टायर इन खांचों से टकराते हैं।
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यह टकराव एक प्रकार का घर्षण और कंपन पैदा करता है। प्रत्येक खांचे की विशिष्ट संरचना एक विशेष आवृत्ति की ध्वनि उत्पन्न करती है।
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जब वाहन निरंतर गति से आगे बढ़ता है तो ये अलग-अलग आवृत्तियां एक क्रम में सुनाई देती हैं। यह क्रम मिलकर एक संगीत धुन बनाता है।
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गति बहुत महत्वपूर्ण है। यदि वाहन बहुत धीरे या बहुत तेज चलता है तो धुन स्पष्ट नहीं सुनाई देगी।
मेलोडी रोड का आविष्कार और इतिहास
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मेलोडी रोड का आविष्कार एक आकस्मिक खोज का परिणाम था। इसकी शुरुआत वर्ष 2007 में जापान में हुई थी।
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जापान के इंजीनियर शिजुओ शिनोदा (Shizuo Shinoda) ने बुलडोजर से सड़क पर काम करते समय एक विशेष ध्वनि प्रभाव की खोज की।
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जापान के बाद यह अवधारणा हंगरी, दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भी फैली।
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मुंबई की मेलोडी रोड दुनिया में पांचवीं और भारत में पहली ऐसी सड़क है।
Mumbai: ‘जय हो’ गीत का चयन क्यों?
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‘जय हो’ फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ का प्रसिद्ध गीत है जिसे एआर रहमान ने संगीतबद्ध किया था।
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यह गीत 2009 में ऑस्कर पुरस्कार जीत चुका है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संगीत की पहचान है।
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‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ फिल्म की कहानी मुंबई में ही सेट है, इसलिए मुंबई की सड़क के लिए इस गीत का चयन और भी प्रासंगिक है।
BMC का बयान – सुरमयी होगी यात्रा
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अनुसार, यह पहल आधुनिक इंजीनियरिंग और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का अनोखा संगम है।
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कोस्टल रोड पर अब यात्रा केवल तेज ही नहीं होगी बल्कि ट्रैफिक-फ्री और सुरमयी भी होगी।
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यह पर्यटकों के लिए भी एक आकर्षण बनेगी। लोग विशेष रूप से इस सड़क पर ड्राइव करने आएंगे।
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BMC ने यह भी संकेत दिया है कि यदि यह प्रयोग सफल रहा तो भविष्य में अन्य स्थानों पर भी इसे दोहराया जा सकता है।
Mumbai: चुनौतियां और रखरखाव
मेलोडी रोड को बनाए रखना एक चुनौती हो सकती है। सड़क की सतह पर बने खांचे समय के साथ घिस सकते हैं। भारी वर्षा, तापमान परिवर्तन और भारी यातायात इन खांचों को प्रभावित कर सकते हैं। नियमित रखरखाव आवश्यक होगा ताकि धुन विकृत न हो।
निष्कर्ष
मुंबई में भारत की पहली मेलोडी रोड का उद्घाटन एक ऐतिहासिक क्षण है। CM देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी CM एकनाथ शिंदे द्वारा शुभारंभ की गई यह परियोजना इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना है। कोस्टल रोड पर 500 मीटर के इस खंड पर 70-80 किमी प्रति घंटे की गति से गुजरने पर ‘जय हो’ की धुन सुनाई देती है। यह दुनिया की पांचवीं और भारत की पहली ऐसी सड़क है। यह मुंबई की पहचान में नया आयाम जोड़ेगी।
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