India-EU Trade Deal: भारत-यूरोप की ट्रेड डील से पाकिस्तान-बांग्लादेश में डर का माहौल, समझें पूरा माजरा

भारत-EU FTA से टेक्सटाइल में बड़ा फायदा, पाकिस्तान-बांग्लादेश को झटका। भारत के कपड़े जीरो ड्यूटी पर, प्रतिस्पर्धियों पर शुल्क बढ़ेगा

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India-EU Trade Deal: भारत की विदेश व्यापार नीति में नई उड़ान भरते हुए देश ने यूरोपीय संघ के साथ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता किया है। यह डील न केवल भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है बल्कि इससे दक्षिण एशिया के व्यापारिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। खासतौर पर पाकिस्तान और बांग्लादेश इस समझौते से काफी चिंतित हैं क्योंकि उनके टेक्सटाइल उद्योग पर इसका सीधा असर पड़ने वाला है।

भारत का व्यापार अभियान

पिछले एक साल में भारत ने कई बड़े देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं। ओमान, न्यूजीलैंड और यूनाइटेड किंगडम के साथ डील करने के बाद भारत ने इस साल यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौते किए हैं। ये समझौते भारत की बढ़ती वैश्विक आर्थिक ताकत को दर्शाते हैं।

भारत सरकार की यह रणनीति देश के निर्यात को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल व्यापार बढ़ेगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

भारत को कैसे होगा फायदा?

वर्तमान में यूरोपीय देश भारतीय कपड़ों के निर्यात पर 9 प्रतिशत से लेकर 12 प्रतिशत तक की आयात शुल्क लगाते हैं। मुक्त व्यापार समझौता लागू होने के बाद भारतीय कपड़ों के निर्यात पर यह शुल्क घटकर शून्य हो जाएगा। यह भारतीय टेक्सटाइल उद्योग के लिए गेम चेंजर साबित होगा।

इसके अलावा भारत के पास अपना कपास और धागा है जो टेक्सटाइल उद्योग का मूल कच्चा माल है। कर खत्म होने के बाद यूरोपीय देशों में भारतीय कपड़ों की कीमत बांग्लादेश के कपड़ों से भी कम हो जाएगी या बराबर हो जाएगी। यह भारतीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देगा।

भारत की उन्नत तकनीक और बड़ी उत्पादन क्षमता भी इस समझौते का पूरा फायदा उठाने में मदद करेगी। भारतीय कंपनियां यूरोपीय बाजार में अपनी पहुंच तेजी से बढ़ा सकेंगी।

बांग्लादेश की सबसे बड़ी चिंता

बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपड़ों का निर्यातक देश है। हालांकि बांग्लादेश 2029 के बाद एलडीसी यानी कम विकसित देश का दर्जा खो देगा। यह उसके लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है।

वर्तमान में बांग्लादेश को एलडीसी का दर्जा मिला हुआ है जिसके तहत उसे यूरोपीय देशों में कपड़ों के निर्यात पर शुल्क में छूट मिलती है। लेकिन 2029 के बाद यह सुविधा खत्म हो जाएगी और उसे पूरा शुल्क चुकाना पड़ेगा।

जहां एक तरफ भारत के कपड़े शुल्क-मुक्त रहने की वजह से सस्ते होंगे वहीं दूसरी तरफ बांग्लादेश के कपड़ों पर शुल्क लगने से वे महंगे हो जाएंगे। ऐसी परिस्थितियों में यूरोपीय कंपनियां बांग्लादेश के कपड़ों की तुलना में भारत के कपड़ों को ज्यादा तवज्जो देंगी।

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था काफी हद तक टेक्सटाइल निर्यात पर निर्भर है। इस उद्योग में संकट आने से उनकी पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

पाकिस्तान क्यों घबरा रहा है?

पाकिस्तान को यूरोप में जीएसपी प्लस के तहत टैरिफ में छूट मिलती है। जीएसपी प्लस यानी सामान्यीकृत प्राथमिकता योजना के तहत पाकिस्तान कुछ शर्तों को पूरा करते हुए यूरोप में रियायती दरों पर सामान निर्यात कर सकता है।

यही वजह है कि पाकिस्तान के लिए यूरोप सबसे बड़ा बाजार है। अभी पाकिस्तान को जीएसपी प्लस के तहत टैरिफ में छूट मिलने की वजह से कम लागत में अच्छा मुनाफा हो रहा है।

लेकिन जब भारत का माल जीरो ड्यूटी पर यूरोप पहुंचेगा तो पाकिस्तान के मुनाफे पर बुरा असर पड़ेगा। पाकिस्तान के मुकाबले भारत के पास जबरदस्त तकनीक और ज्यादा पूंजी है जिसका इस्तेमाल यूरोपीय बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।

इस प्रतिस्पर्धा का मुकाबला करना पाकिस्तान के लिए काफी मुश्किल होगा। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही कमजोर है और इस नए दबाव से स्थिति और खराब हो सकती है।

व्यापारिक समीकरण में बदलाव

भारत के साथ डील फाइनल होने के बाद यूरोप में सस्ते और बढ़िया माल की मांग बढ़ जाएगी जिसका सबसे ज्यादा फायदा भारत को मिलेगा। भारत के पास पर्याप्त कच्चा माल है और उसे निर्यात पर कोई टैक्स भी नहीं चुकाना होगा।

जबकि बांग्लादेश एलडीसी का दर्जा खोने वाला है जिससे उसकी लागत बढ़ जाएगी। नतीजन उसके माल की कीमतें बढ़ेंगी और डिमांड में गिरावट आएगी जिससे मुनाफा कम हो जाएगा।

वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान को जहां जीएसपी प्लस की वजह से ज्यादा मुनाफा हो रहा है, बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से वह भी बहुत कम हो जाएगा।

India-EU Trade Deal: भारत की रणनीतिक जीत

यह समझौता भारत की कूटनीतिक और आर्थिक रणनीति की बड़ी जीत है। एक साथ कई देशों के साथ व्यापार समझौते करना भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत को दर्शाता है।

इस समझौते से न केवल भारत का निर्यात बढ़ेगा बल्कि देश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। टेक्सटाइल उद्योग में लाखों लोगों को रोजगार मिलता है और यह समझौता इस क्षेत्र को और मजबूत करेगा।

भारत की यह सफलता दर्शाती है कि सही नीतियों और रणनीति के साथ देश वैश्विक व्यापार में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

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