फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का बड़ा बयान ’15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करें PM मोदी’, फ्रांस में लागू हो चुका है प्रतिबंध
फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने PM मोदी से 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया।
India AI Summit 2026: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गुरुवार 19 फरवरी 2026 को India AI Summit 2026 में एक महत्वपूर्ण और चर्चा में आने वाला बयान दिया है। मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आह्वान किया कि वे भी 15 साल की उम्र से कम के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दें। फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि फ्रांस ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बंद कर दिया है। हम इस रास्ते पर आगे निकल चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी भी इसी रास्ते पर चलेंगे। यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा के मुद्दे को उठाता है जो दुनिया भर में चिंता का विषय बन गया है। सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग और उसके नकारात्मक प्रभावों को लेकर माता पिता, शिक्षक और नीति निर्माता चिंतित हैं।
मैक्रों का यह बयान एक अंतरराष्ट्रीय बहस को और आगे बढ़ा सकता है। इंडिया एआई समिट 2026 में मैक्रों ने न केवल सोशल मीडिया प्रतिबंध की बात की बल्कि भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले दस वर्षों में डिजिटल क्षेत्र में जो प्रगति की है वह अभूतपूर्व है। मैक्रों ने भारत की डिजिटल पहचान प्रणाली, यूपीआई पेमेंट सिस्टम और डिजिटल स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने वह किया है जो दुनिया के किसी भी देश ने नहीं किया है।
India AI Summit 2026: बच्चों की सुरक्षा नियम नहीं बल्कि सभ्यता का मुद्दा
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री मोदी भी इस क्लब में शामिल होंगे। मैक्रों ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मोदी बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के लिए कार्रवाई करेंगे। उन्होंने एक बेहद महत्वपूर्ण बात कहते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा कोई नियम नहीं बल्कि सभ्यता है। यह बयान गहरा अर्थ रखता है। मैक्रों ने यह स्पष्ट किया कि बच्चों को सोशल मीडिया के संभावित नुकसान से बचाना केवल एक कानूनी या नियामक मुद्दा नहीं है। यह एक सभ्यता का सवाल है।
यह दर्शाता है कि हम एक समाज के रूप में अपने बच्चों की रक्षा को कितनी प्राथमिकता देते हैं। बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण प्रदान करना हर सभ्य समाज की जिम्मेदारी है। सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों में साइबर बुलिंग, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, नींद की कमी, शारीरिक गतिविधि में कमी और अनुचित सामग्री का संपर्क शामिल हैं। कई अध्ययनों ने दिखाया है कि अत्यधिक सोशल मीडिया उपयोग से बच्चों और किशोरों में चिंता, अवसाद और कम आत्मसम्मान की समस्याएं बढ़ती हैं।
फ्रांस ने क्या किया और क्यों किया?
फ्रांस ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। फ्रांस में यह माना गया कि युवा मस्तिष्क अभी विकसित हो रहे होते हैं और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग उनके संज्ञानात्मक और भावनात्मक विकास को प्रभावित कर सकता है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए खाता बनाना प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस प्रतिबंध को लागू करने के लिए कंपनियों को उम्र सत्यापन प्रणाली लागू करनी होगी।
माता पिता की सहमति भी आवश्यक हो सकती है। जो कंपनियां इस नियम का पालन नहीं करेंगी उन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। फ्रांस का यह कदम यूरोपीय संघ के व्यापक बाल ऑनलाइन सुरक्षा ढांचे का हिस्सा है। कई यूरोपीय देश बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं और सख्त नियम बना रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया ने भी हाल ही में सोशल मीडिया पर 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंध लगाया है।
India AI Summit 2026: मैक्रों ने गिनाई भारत की डिजिटल उपलब्धियां
इमैनुएल मैक्रों ने India AI Summit में भारत की डिजिटल प्रगति की भूरि भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि दस साल पहले मुंबई में एक स्ट्रीट वेंडर अपना बैंक खाता नहीं खोल सकता था। लेकिन आज वही वेंडर अपने फोन पर पेमेंट लेता है। यह बयान भारत में वित्तीय समावेशन की यात्रा को दर्शाता है। मैक्रों ने आगे कहा कि भारत ने कुछ ऐसा बनाया है जो विश्व के किसी भी देश ने नहीं किया है। भारत ने 1.4 अरब लोगों के लिए डिजिटल पहचान बनाई है। यह आधार कार्ड की ओर इशारा है जो दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली है।
मैक्रों ने कहा कि भारत ने एक पेमेंट सिस्टम बनाया है जो अब हर महीने 20 अरब लेनदेन कराता है। यह यूपीआई यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस की ओर संकेत है। यूपीआई ने भारत में डिजिटल पेमेंट में क्रांति ला दी है। छोटे से छोटा व्यापारी भी अब डिजिटल पेमेंट स्वीकार करता है। मैक्रों ने भारत के हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने 50 करोड़ डिजिटल स्वास्थ्य आईडी जारी की हैं। यह आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का हिस्सा है।
विभाजन के बजाय जोड़ने पर फोकस करें: मैक्रों
फ्रांस के राष्ट्रपति ने एक व्यापक संदेश देते हुए कहा कि ऐसे वक्त में जब तनाव बढ़ रहा है हमारे सभी डिजिटल टूल्स को समावेशी दृष्टिकोण की तरफ निर्देशित करने की जरूरत और भी बढ़ गई है। मैक्रों ने कहा कि हमें न सिर्फ भारत में बल्कि अफ्रीकी महाद्वीप में भी मजबूत होना चाहिए। उन्होंने आह्वान किया कि आइए हम सब मिलकर विभाजन के बजाय जोड़ने विनाश के बजाय सृजन करने और लेने के बजाय साझा करने पर फोकस करें।
यह बयान वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में बेहद प्रासंगिक है। दुनिया में भू राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं। व्यापार युद्ध, प्रौद्योगिकी युद्ध और विभिन्न गुटबाजी दिखाई दे रही है। ऐसे में मैक्रों का संदेश सहयोग और साझेदारी का है। मैक्रों ने आगे कहा कि मैं फ्रांस की जी7 अध्यक्षता का उपयोग इस दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए करना चाहता हूं। मुझे पता है कि भारत भी अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के जरिए ऐसा ही करेगा। यह भारत फ्रांस सहयोग की संभावनाओं को दर्शाता है।
India AI Summit 2026: डेटा संप्रभुता का महत्वपूर्ण मुद्दा
मैक्रों ने एक और महत्वपूर्ण बिंदु उठाया। उन्होंने कहा कि कोई भी देश केवल एक मार्केट के रूप में काम करने के लिए बाध्य नहीं है जहां विदेशी कंपनियां अपने मॉडल बेचती हैं और नागरिकों का डेटा डाउनलोड करती हैं। यह डेटा संप्रभुता का महत्वपूर्ण मुद्दा है। कई विकासशील देशों में बड़ी तकनीकी कंपनियां आती हैं अपने उत्पाद और सेवाएं बेचती हैं और उपयोगकर्ताओं का डेटा एकत्र करती हैं। यह डेटा अक्सर उन देशों के बाहर संग्रहीत और संसाधित किया जाता है। इससे गोपनीयता और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे उठते हैं। मैक्रों का कहना है कि देशों को अपनी डिजिटल संप्रभुता बनाए रखनी चाहिए। उन्हें अपना डिजिटल बुनियादी ढांचा विकसित करना चाहिए।
भारत में सोशल मीडिया प्रतिबंध की संभावना और चुनौतियां
मैक्रों के बयान के बाद अब सवाल यह है कि क्या भारत 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाएगा। यह एक जटिल और बहुआयामी मुद्दा है। एक ओर बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। दूसरी ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल अधिकारों के सवाल हैं। भारत में पहले से ही सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और अन्य कानून हैं जो ऑनलाइन सामग्री को नियंत्रित करते हैं। हालांकि उम्र आधारित प्रतिबंध लागू करना व्यावहारिक चुनौतियां पेश करता है। उम्र सत्यापन कैसे किया जाएगा। क्या माता पिता की सहमति आवश्यक होगी। कंपनियां इसका पालन कैसे सुनिश्चित करेंगी। ये सभी महत्वपूर्ण प्रश्न हैं। भारत सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना होगा और सभी पक्षों से परामर्श करना होगा।
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