हरियाणा में 6 साल में 18 हजार युवाओं की हार्ट अटैक से मौत! विधानसभा में पेश हुए जिलेवार-सालवार आंकड़े, 18-45 साल के युवा सबसे ज्यादा प्रभावित, विशेषज्ञ बोले जीवनशैली में बदलाव जरूरी
2020-2026 के बीच 18-45 साल के 17,973 युवाओं की हार्ट अटैक/फेलियर से मौत, विधानसभा में सरकार ने पेश किए आंकड़े, यमुनानगर सबसे ज्यादा प्रभावित
Haryana heart attack: जब एक युवा अचानक सीने में दर्द की शिकायत करे और अगले ही पल उसकी सांसें थम जाएं, तो यह सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। हरियाणा विधानसभा में बुधवार को पेश किए गए आंकड़े ठीक यही चेतावनी दे रहे हैं।
Haryana heart attack: हरियाणा विधानसभा में क्या पेश हुआ डेटा?
हरियाणा सरकार ने विधानसभा को बताया कि जनवरी 2020 से जनवरी 2026 तक 18 से 45 साल की उम्र के कुल 17,973 युवाओं की मौत हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर से हुई। यह जानकारी कांग्रेस के एक विधायक के लिखित प्रश्न के जवाब में सामने आई। विधायक ने साल दर साल और जिला दर जिला मौतों का ब्योरा मांगा था। सरकार ने जिलों से एकत्र जानकारी के आधार पर यह डेटा प्रस्तुत किया।
Haryana heart attack: साल दर साल कितनी हुईं मौतें?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में 2,394 युवाओं की हार्ट अटैक से मौत हुई। वर्ष 2021 में यह संख्या बढ़कर 3,188 हो गई जो इस पूरी अवधि का सबसे अधिक वार्षिक आंकड़ा है। वर्ष 2022 में 2,796 और 2023 में 2,886 मौतें दर्ज की गईं। वर्ष 2024 में 3,063 और 2025 में 3,255 युवाओं ने इस बीमारी से जान गंवाई। जनवरी 2026 के पहले महीने में ही 391 मौतें दर्ज हो चुकी थीं।
Haryana heart attack: कौन से जिले सबसे अधिक प्रभावित रहे?
जिलेवार डेटा में यमुनानगर जिले की स्थिति चिंताजनक रही। यहां 2020 से 2025 के बीच प्रतिवर्ष 375 से 461 तक मौतें दर्ज हुईं। दूसरी तरफ रोहतक जिले में सबसे कम मौतें दर्ज हुईं। यहां 2020 से 2025 तक प्रतिवर्ष 27 से 41 के बीच मौतें हुईं जो राज्य के अन्य जिलों की तुलना में काफी कम है। गुरुग्राम में 2020 से 2025 के बीच प्रतिवर्ष 83 से 116 मौतें दर्ज की गईं।
Haryana heart attack: क्या कोविड या वैक्सीन से है इन मौतों का संबंध?
विधायक ने अपने प्रश्न में यह भी पूछा था कि क्या सरकार ने कोविड-19 संक्रमण या कोविड-19 वैक्सीन से इन मौतों का कोई संबंध जानने के लिए कोई सर्वे या अध्ययन किया है। सरकार ने स्पष्ट जवाब दिया कि ऐसा कोई सर्वे या अध्ययन अब तक नहीं किया गया है। इसका अर्थ यह है कि इन मौतों के पीछे के कारणों की कोई आधिकारिक वैज्ञानिक जांच अभी तक नहीं हुई है।
Haryana heart attack: विशेषज्ञ क्या कहते हैं युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक के बारे में?
हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार युवाओं में हार्ट अटैक के मामले पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। इसके पीछे बदलती जीवनशैली, तनाव, नींद की कमी, धूम्रपान और जंक फूड का अत्यधिक सेवन प्रमुख कारण माने जाते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि 18 से 45 वर्ष की आयु में हार्ट अटैक का बढ़ना इस बात का संकेत है कि देश में कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के प्रति जागरूकता और नियमित स्वास्थ्य जांच की सख्त जरूरत है। हरियाणा जैसे कृषि और औद्योगिक राज्य में युवाओं पर शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार का दबाव अधिक होता है।
Haryana heart attack: क्या है इस डेटा की सीमाएं और खामियां?
यह डेटा जिलों द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित है। इसमें यह स्पष्ट नहीं है कि मौतों की पहचान किस आधार पर की गई, यानी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, अस्पताल रिकॉर्ड या परिवार की जानकारी के आधार पर। जानकारों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मौतें दर्ज ही नहीं होतीं। ऐसे में वास्तविक आंकड़े सरकारी डेटा से और अधिक हो सकते हैं। इसलिए इस मुद्दे पर व्यापक और स्वतंत्र अध्ययन की मांग तेज हो रही है।
निष्कर्ष: डेटा से परे जाकर देखने की जरूरत
हरियाणा विधानसभा में पेश हुए ये आंकड़े केवल संख्याएं नहीं हैं। यह 18 हजार परिवारों की पीड़ा है, हजारों अधूरे सपने हैं और एक समाज की बदलती जीवनशैली का आईना है। जब तक इन मौतों के कारणों की वैज्ञानिक जांच नहीं होती, तब तक ठोस नीतिगत कदम उठाना कठिन रहेगा। सरकार को चाहिए कि वह स्वतंत्र चिकित्सा अध्ययन कराए और युवाओं को हृदय रोग के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करे।
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