Chaitra Navratri 2026: 19 मार्च से शुरू होगी चैत्र नवरात्रि, इन 9 दिनों में करें माता दुर्गा के 108 नामों का जप, सोया भाग्य जागेगा और हर मनोकामना होगी पूरी

19 मार्च से शुरू चैत्र नवरात्रि, 9 दिन करें मां दुर्गा के 108 नामों का जप

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Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व सबसे पवित्र और शक्तिशाली त्योहारों में से एक माना जाता है। साल में चार बार नवरात्रि आती है लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्रि का महत्व सबसे अधिक होता है। इस बार चैत्र नवरात्रि 2026 का आरंभ 19 मार्च से हो रहा है। यह पावन पर्व नौ दिनों तक चलेगा जिसमें माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। भक्त व्रत रखते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और माता के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि के दिनों में माता दुर्गा के 108 नामों का जप करने से कई गुना अधिक फल मिलता है? आइए जानते हैं इसका महत्व और माता के वे 108 पवित्र नाम जिनका जप आपके जीवन को बदल सकता है।

चैत्र नवरात्रि 2026 की तिथि और महत्व

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि का पवित्र पर्व आरंभ होता है। इस वर्ष यह तिथि 19 मार्च 2026 को पड़ रही है। नौ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में माता शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री के क्रमशः पूजन का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार चैत्र नवरात्रि में की गई पूजा-अर्चना और जप-तप का फल अन्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक होता है।

Chaitra Navratri 2026: माता दुर्गा के 108 नाम क्यों हैं इतने शक्तिशाली

हिंदू परंपरा में 108 की संख्या अत्यंत पवित्र मानी जाती है। माला में भी 108 मनके होते हैं। माता दुर्गा के 108 नामों का जप करना एक संपूर्ण आराधना मानी जाती है। प्रत्येक नाम माता के किसी एक गुण, शक्ति या स्वरूप को दर्शाता है। इन नामों के जप से साधक को मानसिक शांति मिलती है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में आ रही बाधाएं समाप्त होती हैं। भक्तों का विश्वास है कि इन नामों के नियमित जप से सोया हुआ भाग्य जागता है और माता की कृपा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

माता दुर्गा के 108 पवित्र नाम

नवरात्रि के नौ दिनों में प्रतिदिन इन नामों का जप करें। आप चाहें तो सुबह स्नान के बाद माता के सामने बैठकर माला लेकर इन नामों का जप कर सकते हैं।

ॐ शिवायै नमः, ॐ भद्रायै नमः, ॐ श्रियै नमः, ॐ विजयायै नमः, ॐ उमायै नमः, ॐ भारत्यै नमः, ॐ शर्वाण्यै नमः, ॐ सर्वगतायै नमः, ॐ जयायै नमः, ॐ वाण्यै नमः, ॐ गौर्यै नमः, ॐ मायायै नमः, ॐ वाराह्यै नमः, ॐ कमलप्रियायै नमः, ॐ सरस्वत्यै नमः, ॐ कमलायै नमः, ॐ मातंग्यै नमः, ॐ अपरायै नमः, ॐ कुण्डल्यै नमः, ॐ अजायै नमः, ॐ शांकभर्यै नमः, ॐ चण्डयै नमः, ॐ वैष्णव्यै नमः, ॐ क्रियायै नमः, ॐ ऐन्द्रयै नमः, ॐ मधुमत्यै नमः, ॐ गिरिजायै नमः, ॐ सुभगायै नमः, ॐ अंबिकायै नमः, ॐ तारायै नमः, ॐ पद्मावत्यै नमः, ॐ हंसायै नमः, ॐ पद्मनाभसहोदर्यै नमः, ॐ अपर्णायै नमः, ॐ ललितायै नमः, ॐ धात्र्यै नमः, ॐ कुमार्यै नमः, ॐ शिखवाहिन्यै नमः, ॐ शांभव्यै नमः, ॐ सुमुख्यै नमः, ॐ मैत्र्यै नमः, ॐ त्रिनेत्रायै नमः, ॐ विश्वरूपिण्यै नमः, ॐ आर्यायै नमः, ॐ मृडान्यै नमः, ॐ हींकार्यै नमः, ॐ क्रोधिन्यै नमः, ॐ सुदिनायै नमः, ॐ अचलायै नमः, ॐ सूक्ष्मायै नमः, ॐ परात्परायै नमः, ॐ शोभायै नमः, ॐ सर्ववर्णायै नमः, ॐ हरप्रियायै नमः, ॐ महालक्ष्म्यै नमः, ॐ महासिद्धयै नमः, ॐ स्वधायै नमः, ॐ स्वाहायै नमः, ॐ मनोन्मन्यै नमः, ॐ त्रिलोकपालिन्यै नमः, ॐ उद्भूतायै नमः, ॐ त्रिसन्ध्यायै नमः, ॐ त्रिपुरान्तक्यै नमः, ॐ त्रिशक्त्यै नमः, ॐ त्रिपदायै नमः, ॐ दुर्गायै नमः, ॐ ब्राह्मयै नमः, ॐ त्रैलोक्यवासिन्यै नमः, ॐ पुष्करायै नमः, ॐ अत्रिसुतायै नमः, ॐ गूढ़ायै नमः, ॐ त्रिवर्णायै नमः, ॐ त्रिस्वरायै नमः, ॐ त्रिगुणायै नमः, ॐ निर्गुणायै नमः, ॐ सत्यायै नमः, ॐ निर्विकल्पायै नमः, ॐ निरंजिन्यै नमः, ॐ ज्वालिन्यै नमः, ॐ मालिन्यै नमः, ॐ चर्चायै नमः, ॐ क्रव्यादोप निबर्हिण्यै नमः, ॐ कामाक्ष्यै नमः, ॐ कामिन्यै नमः, ॐ कान्तायै नमः, ॐ कामदायै नमः, ॐ कलहंसिन्यै नमः, ॐ सलज्जायै नमः, ॐ कुलजायै नमः, ॐ प्राज्ञ्यै नमः, ॐ प्रभायै नमः, ॐ मदनसुन्दर्यै नमः, ॐ वागीश्वर्यै नमः, ॐ विशालाक्ष्यै नमः, ॐ तमोपहायै नमः, ॐ सुमंगल्यै नमः, ॐ काल्यै नमः, ॐ भैरव्यै नमः, ॐ महेश्वर्यै नमः, ॐ चण्ड्यै नमः, ॐ भुवनेश्वर्यै नमः, ॐ दुर्गापरमेश्वर्यै नमः, ॐ नित्यायै नमः, ॐ सानन्दविभवायै नमः, ॐ सत्यज्ञानायै नमः, ॐ महेश्वरप्रियंकर्यै नमः, ॐ महात्रिपुरसुन्दर्यै नमः।

Chaitra Navratri 2026: जप करने की सही विधि

नवरात्रि के दिनों में इन नामों का जप करने के लिए प्रतिदिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। माता दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठें और दीपक व अगरबत्ती जलाएं। 108 मनकों वाली माला लेकर प्रत्येक मनके पर एक नाम का उच्चारण करें। जप के समय मन को एकाग्र रखें और माता का ध्यान करते रहें। जप पूरा होने के बाद माता से अपनी मनोकामना प्रकट करें और उनसे कृपा की प्रार्थना करें।

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