ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया बैन का असर अधूरा! TikTok और Snapchat से दूर नहीं हो पाए किशोर, रिपोर्ट में खुलासा—बैन के बाद भी 20% बच्चे कर रहे इस्तेमाल
Australia social media ban: ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के लिए बैन के बावजूद किशोर कर रहे सोशल मीडिया उपयोग
Australia social media ban: ऑस्ट्रेलिया सरकार ने जब 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया था तो उम्मीद थी कि इससे किशोरों का स्क्रीन टाइम काफी हद तक कम हो जाएगा। लेकिन अब जो तस्वीर सामने आई है वह सरकार और अभिभावकों दोनों के लिए चिंता बढ़ाने वाली है। एक नई रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि बैन लागू होने के करीब दो महीने बाद भी लगभग पांच में से एक किशोर अब भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहा है। यह रिपोर्ट पेरेंटल कंट्रोल सॉफ्टवेयर कंपनी क्यूस्टोडियो द्वारा जारी की गई है जिसमें ऑस्ट्रेलिया के परिवारों से जुटाए गए आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।
Australia social media ban: क्या है ऑस्ट्रेलिया का सोशल मीडिया बैन
ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला ऐसा देश बना जिसने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर कानूनी रोक लगाई। दिसंबर 2024 में यह प्रतिबंध लागू किया गया था। इस कानून के दायरे में इंस्टाग्राम, फेसबुक, थ्रेड्स, यूट्यूब, टिकटॉक और स्नैपचैट जैसा तमाम बड़े प्लेटफॉर्म आते हैं। सरकार का मानना था कि सोशल मीडिया बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है और उन्हें इससे दूर रखना जरूरी है। यह फैसला दुनियाभर में चर्चा का विषय बना और कई देशों ने इसे बड़े ध्यान से देखा क्योंकि वे खुद भी इस तरह के नियम लागू करने पर विचार कर रहे हैं।
Australia social media ban: बैन के बाद भी जारी है सोशल मीडिया का इस्तेमाल
क्यूस्टोडियो की रिपोर्ट के मुताबिक 13 से 15 साल के बच्चों के बीच टिकटॉक और स्नैपचैट जैसे लोकप्रिय ऐप्स का इस्तेमाल पहले की तुलना में जरूर कम हुआ है लेकिन यह पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। आंकड़ों के अनुसार दिसंबर में बैन लागू होने के बाद फरवरी तक इन ऐप्स के उपयोग में कमी तो आई लेकिन फिर भी करीब 20 प्रतिशत से अधिक किशोर इन प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय बने रहे। यह संख्या इस बात की गवाही देती है कि केवल कानून बना देने से बच्चों को सोशल मीडिया से दूर करना आसान नहीं है।
Australia social media ban: किस ऐप पर कितनी आई कमी
रिपोर्ट के विस्तृत आंकड़े बताते हैं कि नवंबर से फरवरी के बीच 13 से 15 साल के बच्चों में स्नैपचैट का इस्तेमाल करीब 13.8 प्रतिशत घटकर लगभग 20.3 प्रतिशत पर आ गया। वहीं टिकटॉक का उपयोग करीब 5.7 प्रतिशत कम होकर लगभग 21.2 प्रतिशत तक पहुंच गया। यूट्यूब के इस्तेमाल में भी थोड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह लगभग 36.9 प्रतिशत तक दर्ज हुआ। गिरावट के ये आंकड़े बताते हैं कि बैन का असर आंशिक रूप से हुआ है लेकिन लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हुआ है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि जो बच्चे इन ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे थे वे अपने अकाउंट में लॉग इन थे या बिना लॉगिन के सामग्री देख रहे थे।
Australia social media ban: WhatsApp का बढ़ा इस्तेमाल
एक दिलचस्प पहलू यह भी सामने आया है कि जिन प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा है उनका इस्तेमाल कम होने के साथ-साथ मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप के उपयोग में इस आयु वर्ग में थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई है। विशेषज्ञों को पहले से यह आशंका थी कि बैन के बाद किशोर किसी ऐसे प्लेटफॉर्म की ओर रुख कर सकते हैं जहां नियम कम सख्त हों या जिन पर बैन न लगा हो। व्हाट्सऐप के बढ़ते इस्तेमाल को इसी रुझान से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि अभी तक किसी वैकल्पिक प्लेटफॉर्म पर बड़े पैमाने पर बच्चों के जाने के संकेत नहीं मिले हैं।
Australia social media ban: कंपनियों पर लटकी भारी जुर्माने की तलवार
ऑस्ट्रेलिया के नए कानून के तहत सोशल मीडिया कंपनियों पर नियमों का पालन न करने पर 49.5 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान है। यह रकम किसी भी कंपनी के लिए एक बड़ी चेतावनी है। देश की इंटरनेट निगरानी संस्था ईसेफ्टी कमिश्नर ने हालांकि यह भी कहा है कि प्लेटफॉर्म्स को नई व्यवस्था के अनुसार खुद को ढालने के लिए कुछ समय दिया जाएगा। अभी सरकार और कंपनियां दोनों मिलकर यह तय करने की कोशिश कर रही हैं कि एज वेरिफिकेशन सिस्टम को और कैसे मजबूत बनाया जाए।
Australia social media ban: दुनिया के लिए एक बड़ा प्रयोग
ऑस्ट्रेलिया का यह कदम वैश्विक स्तर पर एक अनूठा और साहसी प्रयोग माना जा रहा है। दुनिया के कई देश इस प्रयोग के नतीजों पर गहरी नजर रखे हुए हैं। ब्रिटेन, कनाडा और यूरोपीय देशों में भी बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर बहस तेज हो रही है और कई देश इसी तरह के कानून लाने की सोच रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया की सरकार और कई विश्वविद्यालय इस बैन के दीर्घकालिक प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक सरकारी आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
Australia social media ban: माता-पिता की जिम्मेदारी और भी बड़ी
इस पूरे मामले से एक बात साफ हो जाती है कि केवल सरकारी कानून से बच्चों को सोशल मीडिया के नुकसान से नहीं बचाया जा सकता। माता-पिता की भूमिका इस लड़ाई में सबसे अहम है। बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करना, उनके स्क्रीन टाइम पर नजर रखना और उन्हें सोशल मीडिया के सही और गलत पहलुओं के बारे में जागरूक करना उतना ही जरूरी है जितना कानूनी प्रतिबंध। कुल मिलाकर ऑस्ट्रेलिया का यह प्रयोग बताता है कि डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा के लिए केवल बैन पर्याप्त नहीं है बल्कि तकनीकी, सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर एकजुट प्रयास जरूरी हैं।
read more here
IPL 2026 से पहले पठान की सलाह, CSK में युवाओं को जिम्मेदारी देने का समय आ गया