आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयर में 20% तक की भयंकर गिरावट, 590 करोड़ के फ्रॉड ने निवेशकों का भरोसा तोड़ा, 14,000 करोड़ का बाजार पूंजीकरण डूबा

चंडीगढ़ ब्रांच में सरकारी खाते से 590 करोड़ की हेराफेरी, 4 कर्मचारी निलंबित, मार्केट कैप में 14,000 करोड़ का नुकसान

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IDFC First Bank Fraud: प्राइवेट सेक्टर के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयरों में सोमवार को भारी गिरावट देखी गई। चंडीगढ़ ब्रांच में हुए 590 करोड़ रुपये के बड़े फ्रॉड की खबर ने निवेशकों का भरोसा पूरी तरह डगमगा दिया। बाजार खुलते ही निवेशकों ने भारी बिकवाली शुरू कर दी, जिससे बैंक के शेयर में 20 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज हुई।

IDFC First Bank Fraud: शेयर की गिरावट का ब्यौरा

सोमवार को बाजार में बैंक के शेयरों की स्थिति कुछ इस प्रकार रही:

  • पिछला बंद (शुक्रवार): 83.56 रुपये

  • सोमवार ओपनिंग: 75.21 रुपये

  • इंट्राडे लो (आज का निचला स्तर): 66.85 रुपये

  • दोपहर 12:07 बजे की स्थिति: 70.05 रुपये (16.17% की गिरावट)

  • 52-वीक हाई / लो: 87.00 रुपये / 52.50 रुपये

इस गिरावट के कारण बैंक की मार्केट कैपिटलाइजेशन में लगभग 14,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

IDFC First Bank Fraud: फ्रॉड का पूरा मामला क्या है?

बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को सूचित किया कि चंडीगढ़ ब्रांच में सरकारी खाते से 590 करोड़ रुपये का फ्रॉड हुआ है:

  • आंतरिक साजिश: जांच में सामने आया है कि इस घोटाले में कोई बाहरी साइबर क्रिमिनल नहीं, बल्कि बैंक के ही कुछ अधिकारी शामिल थे।

  • कार्यप्रणाली: फर्जी दस्तावेजों और आंतरिक साजिश के जरिए बिना उचित प्रक्रिया के फंड ट्रांसफर किया गया।

  • एजेंसियों को सूचना: बैंक ने इसकी जानकारी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी दी है।

IDFC First Bank Fraud: निवेशकों पर क्या असर?

  • पूंजी का नुकसान: मार्केट कैप में 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की गिरावट से निवेशकों को भारी चपत लगी है।

  • भरोसे में कमी: बैंक के अपने अधिकारियों की संलिप्तता के खुलासे ने बैंक की छवि और निवेशकों के विश्वास को गहरा झटका दिया है।

  • विश्लेषकों का मत: हालांकि फ्रॉड की रकम कुल एसेट्स के मुकाबले छोटी है, लेकिन बाजार की समग्र तेजी के बीच बैंक के शेयर में भारी बिकवाली चिंता का विषय है।

IDFC First Bank Fraud: बैंक की प्रतिक्रिया और आगे की राह

  • कड़ी कार्रवाई: बैंक ने बयान जारी कर कहा कि वह मामले की गहन जांच कर रहा है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • ग्राहकों को भरोसा: बैंक ने आश्वासन दिया है कि ग्राहकों के निजी खातों और जमा राशि पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

  • नियामक निगरानी: आरबीआई ने बैंक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और मामले पर नजर बनाए रखी है।

निष्कर्ष: यह घटना भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में आंतरिक फ्रॉड की चुनौतियों को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल ट्रांजेक्शन बढ़ने के साथ आंतरिक सतर्कता और ऑडिट सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत है।

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