आज जलेगी होलिका! जानें सही पूजा विधि वरना नहीं मिलेगा पूरा फल, 2 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा के पावन अवसर पर पूरे देश में होलिका दहन मनाया जाएगा
होलाष्टक खत्म, फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन; सही विधि से पूजा करें वरना फल अधूरा रहेगा
Phalguna Purnima: आज 2 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा के पावन अवसर पर पूरे देश में होलिका दहन मनाया जाएगा। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। अगर आप भी इस शुभ अवसर पर सही विधि से पूजा करना चाहते हैं तो यह पूरी खबर जरूर पढ़ें क्योंकि थोड़ी सी चूक से पूजा का फल अधूरा रह सकता है।
Phalguna Purnima: होलिका दहन का धार्मिक महत्व
फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला होलिका दहन हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन और पवित्र त्योहारों में से एक है। इस वर्ष होलिका दहन आज यानी 2 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि का आरंभ आज शाम 5 बजकर 56 मिनट से होगा। इस दिन का धार्मिक महत्व इतना गहरा है कि सदियों से यह त्योहार न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर में रहने वाले हिंदू समुदाय में बड़े उत्साह और आस्था के साथ मनाया जाता है। होलिका दहन को लेकर शास्त्रों में विस्तार से पूजा विधि बताई गई है और अगर इसे सही तरीके से किया जाए तो इसका पूरा फल मिलता है।
Phalguna Purnima: ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पक्ष
होलिका दहन केवल एक रस्म नहीं है बल्कि इसके पीछे एक गहरी धार्मिक कथा और आध्यात्मिक संदेश छुपा हुआ है। शास्त्रों में इस त्योहार का उल्लेख बहुत पुराने समय से मिलता है। इसका मूल शब्द होलाका बताया गया है और कुछ ग्रंथों में होलिका को हुताशनी भी कहा गया है। यह त्योहार यह संदेश देता है कि चाहे कितनी भी बड़ी बुराई हो अंततः सत्य और भक्ति की जीत होती है। इस दिन घर परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और नकारात्मकता का नाश होता है।
Phalguna Purnima: भक्त प्रह्लाद और होलिका की कथा
होलिका दहन की कथा भक्त प्रह्लाद की अटल विष्णु भक्ति से जुड़ी है। पौराणिक कथा के अनुसार राक्षसराज हिरण्यकश्यप खुद को ईश्वर से भी बड़ा मानता था और चाहता था कि सभी लोग उसकी पूजा करें। लेकिन उसका अपना पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था और किसी भी हालात में उनकी भक्ति नहीं छोड़ता था। हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की मदद लेने का निर्णय किया। होलिका को एक विशेष वरदान मिला हुआ था जिसके कारण वह आग में जल नहीं सकती थी। हिरण्यकश्यप ने होलिका को आदेश दिया कि वह प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर जलती हुई अग्नि में बैठ जाए। लेकिन जब होलिका ने इस वरदान का दुरुपयोग किया तो उसका वरदान निष्प्रभावी हो गया। भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बाहर निकल आए और होलिका अग्नि में भस्म हो गई।
Phalguna Purnima: होलिका दहन की संपूर्ण पूजा विधि
होलिका दहन की पूजा के लिए सबसे पहले घर के बाहर या किसी खुले स्थान पर लकड़ियाँ और उपले इकट्ठा करें और होलिका की संरचना तैयार करें। पूजा करते समय उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुँह करके बैठना शुभ माना जाता है। पूजा की शुरुआत में भगवान नरसिंह और भक्त प्रह्लाद का ध्यान करें। इसके बाद एक पात्र में पानी लेकर उसमें थोड़ा घी और दूध मिलाएँ और यह मिश्रण होलिका दहन वाले स्थान पर अर्पित करें। जल अर्पण के बाद चावल के दाने, ताजे फूल और अन्य पूजन सामग्री भी होलिका को अर्पित करें। गेहूँ की सात बालियाँ और गोबर से बने उपले भी इस अवसर पर चढ़ाए जाते हैं।
Phalguna Purnima: परिक्रमा और आहुति के नियम
अब कच्चे सूत का धागा लेकर होलिका के चारों ओर तीन बार या सात बार परिक्रमा करें। यह परिक्रमा श्रद्धा और भक्ति के साथ करनी चाहिए। परिक्रमा पूरी होने के बाद होलिका की अग्नि में जौ या गेहूँ की बालियाँ, चना, मूंग, चावल, नारियल, गन्ना और बताशे अर्पित करें। इन सभी वस्तुओं को अग्नि में डालना शुभ माना जाता है। होली की अग्नि में जौ की बालियों को भूनें और उन्हें प्रसाद के रूप में परिवार के सभी सदस्यों में बाँटें। होलिका दहन के बाद सभी उपस्थित लोगों को गुलाल का टीका जरूर लगाएँ। यह परंपरा खुशी और सौहार्द का प्रतीक मानी जाती है।
Phalguna Purnima: होलिका में डंडे का विशेष महत्व
होलिका दहन में एक विशेष परंपरा निभाई जाती है जो भक्त प्रह्लाद की रक्षा का प्रतीक है। होलिका की संरचना के बीच में एक डंडा मिट्टी में गाड़ा जाता है जो भक्त प्रह्लाद का प्रतीक होता है। जब होलिका प्रज्वलित की जाती है तो उसके चारों ओर की लकड़ियाँ और उपले जलते हैं लेकिन बीच वाले डंडे को आग लगने से पहले बाहर निकाल लिया जाता है। यह परंपरा इस बात का प्रतीक है कि सच्ची भक्ति में आस्था रखने वाले को कोई नुकसान नहीं पहुँचता।
Phalguna Purnima: होलिका दहन के बाद के कार्य
होलिका दहन के अगले दिन यानी होली के दिन सुबह उठकर स्नान करना चाहिए। होलिका की बची हुई राख को शुभ माना जाता है और इसे माथे पर लगाने की परंपरा कई इलाकों में है। इस राख को घर के आसपास भी रखा जाता है जिसे नकारात्मक शक्तियों को दूर रखने वाला माना जाता है। होलिका दहन के बाद पूरे परिवार के साथ मिलकर भगवान विष्णु की आराधना करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। ध्यान दें कि यहाँ दी गई जानकारी धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
read more here
संजू सैमसन रो पड़े मैदान पर! घुटने टेककर की प्रार्थना, बोले ‘शतक से भी बड़ा पल’
ईरान ने अमेरिका से बातचीत से किया इनकार! बहरीन में पेंटागन दफ्तर जलकर राख