इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, ट्रांसजेंडर जोड़े को लिव-इन रिलेशनशिप में रहने की मिली अनुमति, परिवार के हस्तक्षेप पर लगाई रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिवार के हस्तक्षेप पर रोक लगाई, संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 का हवाला

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UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति और उनके साथी को लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का पूर्ण अधिकार दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं के परिवार वाले या कोई अन्य व्यक्ति उनके जीवन और व्यक्तिगत चुनावों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं कर सकता। यह फैसला संविधान द्वारा प्रदत्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार को सर्वोपरि मानते हुए लिया गया है।

UP News: मुरादाबाद के जोड़े ने न्यायालय से मांगी सुरक्षा

यह मामला मुरादाबाद जिले के मझोला थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है:

  • स्वेच्छा से निर्णय: याचिका में दोनों पक्ष वयस्क हैं और उन्होंने अपनी मर्जी से लिव-इन रिलेशनशिप में एक साथ रहने का निर्णय लिया है।

  • परिवार से खतरा: याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय को बताया कि उन्हें मुख्य रूप से अपने ही परिवार के सदस्यों से जान-माल का खतरा है और उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही हैं।

  • पुलिस की निष्क्रियता: स्थानीय पुलिस से संपर्क करने के बाद भी जब कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो दोनों को इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।

UP News: संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का आधार

न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान प्रत्येक बालिग व्यक्ति को अपनी मर्जी से अपना जीवनसाथी चुनने का अधिकार देता है:

  • अनुच्छेद 14: कानून के समक्ष समानता का अधिकार।

  • अनुच्छेद 19: अभिव्यक्ति और निवास की स्वतंत्रता।

  • अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा।

न्यायालय ने कहा कि ये मौलिक अधिकार सभी नागरिकों को समान रूप से प्राप्त हैं, चाहे उनकी लैंगिक पहचान कुछ भी हो।

UP News: महत्वपूर्ण कानूनी संदर्भ

न्यायालय ने अपने फैसले को मजबूती प्रदान करने के लिए निम्नलिखित मामलों का हवाला दिया:

  1. नवतेज सिंह जोहर बनाम भारत संघ (2018): सुप्रीम कोर्ट का वह फैसला जिसने समलैंगिक संबंधों को मान्यता दी और धारा 377 को आंशिक रूप से असंवैधानिक घोषित किया।

  2. अकांक्षा बनाम यूपी राज्य (2025): इस हालिया मामले में यह पुष्टि की गई थी कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को भी वही संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त है जो विवाहित जोड़ों को मिलती है।

UP News: परिवार के हस्तक्षेप पर रोक और पुलिस को निर्देश

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि संविधान प्रत्येक वयस्क व्यक्ति को स्वतंत्र इकाई मानता है:

  • स्पष्ट रोक: याचिकाकर्ताओं के परिवार के सदस्यों को चेतावनी दी गई है कि वे उनके जीवन में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेंगे।

  • सुरक्षा निर्देश: यदि याचिकाकर्ताओं को खतरा महसूस होता है, तो वे तुरंत मुरादाबाद के पुलिस कमिश्नर या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) से संपर्क कर सकते हैं। पुलिस को तत्काल सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया गया है।

  • उम्र सत्यापन: पुलिस को याचिकाकर्ताओं की उम्र सत्यापित करने के लिए कानूनी प्रक्रिया (जैसे ऑसिफिकेशन टेस्ट) अपनाने की अनुमति दी गई है।

UP News: राज्य का संवैधानिक दायित्व

न्यायालय ने कहा कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति समाज के सबसे हाशिए पर रहने वाले समुदायों में से एक हैं, इसलिए राज्य की जिम्मेदारी और भी अधिक हो जाती है कि वह उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करे। यह फैसला एक व्यापक संदेश देता है कि LGBTQ+ समुदाय के सदस्यों को भी वही संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं जो किसी अन्य नागरिक को।

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