सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: OBC क्रीमी लेयर तय करने में सिर्फ माता-पिता की सैलरी नहीं होगी आधार; पद और सामाजिक स्थिति भी होगी अहम, लाखों अभ्यर्थियों को मिली बड़ी राहत
कोर्ट बोला, क्रीमी लेयर तय करने में सिर्फ आय नहीं, माता-पिता का पद और सामाजिक स्थिति भी अहम
OBC creamy layer issue: देश के लाखों ओबीसी उम्मीदवारों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और राहत देने वाला फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि OBC आरक्षण में क्रीमी लेयर तय करने के लिए केवल माता-पिता की सैलरी को आधार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि इसके लिए यह देखना भी उतना ही जरूरी है कि माता-पिता किस पद पर और किस सामाजिक स्थिति में काम कर रहे हैं। यह फैसला उन तमाम ओबीसी अभ्यर्थियों के लिए संजीवनी साबित हुआ है जिन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बावजूद केवल इसलिए नौकरी नहीं पाई क्योंकि उन्हें गलत तरीके से क्रीमी लेयर में डाल दिया गया था।
OBC creamy layer issue: क्या होती है क्रीमी लेयर और क्यों है यह इतनी अहम?
OBC आरक्षण व्यवस्था में क्रीमी लेयर एक ऐसी सीमा रेखा है जो यह तय करती है कि किस ओबीसी परिवार को आरक्षण का लाभ मिलेगा और किसे नहीं। जो ओबीसी परिवार आर्थिक और सामाजिक रूप से एक निश्चित स्तर से ऊपर पहुंच जाते हैं, उन्हें क्रीमी लेयर में माना जाता है और उन्हें आरक्षण का फायदा नहीं दिया जाता। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई थी ताकि आरक्षण का लाभ वास्तव में जरूरतमंद और पिछड़े तबके तक पहुंचे। लेकिन सवाल यह उठ रहा था कि क्रीमी लेयर तय करने का पैमाना क्या हो। क्या केवल माता-पिता की सैलरी देखकर यह फैसला किया जाए या उनके पद और सामाजिक हैसियत को भी ध्यान में रखा जाए? इसी सवाल का जवाब सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले में दिया है।
OBC creamy layer issue: कैसे शुरू हुआ यह पूरा विवाद?
यह विवाद तब सामने आया जब कई ऐसे ओबीसी उम्मीदवार सामने आए जिन्होंने कड़ी मेहनत से सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन नियुक्ति पत्र नहीं मिला। इन उम्मीदवारों के माता-पिता सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों यानी PSU, बैंकों या इसी तरह के संस्थानों में काम करते थे। सरकार ने 14 अक्टूबर 2004 के एक स्पष्टीकरण पत्र का हवाला देते हुए कहा कि यदि PSU या निजी क्षेत्र की नौकरी की तुलना सरकारी पद से नहीं हो सकती तो ऐसे में माता-पिता की आय के आधार पर क्रीमी लेयर तय की जा सकती है। इस व्याख्या के आधार पर जिन उम्मीदवारों के माता-पिता की सालाना आय तय सीमा से अधिक थी, उन्हें OBC आरक्षण से वंचित कर दिया गया और उनकी नियुक्ति रोक दी गई।
OBC creamy layer issue: ट्रिब्यूनल और हाई कोर्ट ने दिया था उम्मीदवारों का साथ
सरकार के इस फैसले को चुनौती देने के लिए प्रभावित उम्मीदवार पहले केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण यानी CAT पहुंचे। CAT ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद मद्रास, दिल्ली और केरल उच्च न्यायालयों में भी यह मामला पहुंचा और तीनों हाई कोर्ट ने उम्मीदवारों को राहत देते हुए उनके हक में फैसला दिया। लेकिन केंद्र सरकार ने इन सभी फैसलों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। अब देश की सर्वोच्च अदालत ने भी उम्मीदवारों के पक्ष में ही फैसला सुनाकर स्पष्ट कर दिया कि केवल आय के आधार पर किसी को क्रीमी लेयर में नहीं डाला जा सकता।
OBC creamy layer issue: 1993 के ऑफिस मेमोरेंडम का हवाला
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में 1993 के उस ऑफिस मेमोरेंडम का विस्तृत उल्लेख किया जो इंदिरा साहनी बनाम भारत सरकार के ऐतिहासिक फैसले के बाद तैयार किया गया था। कोर्ट ने कहा कि उस नीति दस्तावेज में बिल्कुल स्पष्ट लिखा है कि क्रीमी लेयर तय करते समय माता-पिता की सैलरी और खेती से होने वाली आय को गणना में नहीं जोड़ा जाएगा। उस नीति के अनुसार क्रीमी लेयर का मुख्य आधार माता-पिता का पद और उनकी सामाजिक स्थिति है, जबकि आय को केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में एक सहायक मानदंड के रूप में देखा जा सकता है।
OBC creamy layer issue: छह महीने में लागू करने का आदेश, बनाए जाएं अतिरिक्त पद
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की अर्जी को पूरी तरह खारिज करते हुए निर्देश दिया कि इस फैसले को छह महीने के भीतर लागू किया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़े तो इन प्रभावित उम्मीदवारों को सेवा में समायोजित करने के लिए अतिरिक्त पद सृजित किए जाएं। यह निर्देश उन उम्मीदवारों के लिए बेहद राहतभरा है जो वर्षों से न्याय के लिए दर-दर भटक रहे थे और अदालतों के चक्कर काट रहे थे। अब इस फैसले के बाद उन्हें जल्द ही नियुक्ति मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
OBC creamy layer issue: किन उम्मीदवारों को मिलेगा सीधा फायदा?
इस फैसले का सीधा लाभ उन OBC उम्मीदवारों को मिलेगा जिनके माता-पिता PSU, बैंकों, अर्ध-सरकारी संस्थाओं या इसी तरह के प्रतिष्ठानों में कार्यरत हैं और जिन्हें पहले केवल आय की अधिकता के कारण क्रीमी लेयर में डाल दिया गया था। ऐसे कई उम्मीदवार हैं जो UPSC सिविल सेवा परीक्षा, SSC, बैंकिंग और अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं में सफल हो चुके थे लेकिन नियुक्ति से वंचित थे। अब इस फैसले के बाद उनके मामलों की नए सिरे से समीक्षा होगी और उन्हें उनका हक मिलने की पूरी संभावना है।
OBC creamy layer issue: OBC समाज में फैसले का व्यापक स्वागत
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का देशभर में व्यापक स्वागत हो रहा है। ओबीसी संगठनों और सामाजिक न्याय के पैरोकारों ने इसे एक ऐतिहासिक और न्यायसंगत निर्णय बताया है। उनका कहना है कि क्रीमी लेयर का निर्धारण हमेशा से ही एक जटिल और विवादास्पद मुद्दा रहा है और इस फैसले ने उस भ्रम को दूर कर दिया है। अब सरकार को इस फैसले की रोशनी में क्रीमी लेयर निर्धारण की पूरी प्रक्रिया को नए सिरे से परिभाषित करना होगा ताकि भविष्य में किसी भी योग्य ओबीसी उम्मीदवार के साथ इस तरह का अन्याय न हो सके।
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