जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक उपलब्धि,- रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहली बार एंट्री, बंगाल को हराकर रचा इतिहास

बंगाल को हराकर इतिहास रचा, आकिब नबी ने 9 विकेट झटके, अब्दुल समद ने नाबाद 30 से लक्ष्य हासिल किया

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Ranji Trophy: भारतीय घरेलू क्रिकेट में एक नया और प्रेरणादायक अध्याय लिखा गया है। जम्मू-कश्मीर ने पहली बार अपने इतिहास में रणजी ट्रॉफी के फाइनल में प्रवेश करके एक असाधारण उपलब्धि हासिल की है। सेमीफाइनल मुकाबले में स्टार खिलाड़ियों से सजी बंगाल की टीम को हराकर जम्मू-कश्मीर ने यह कारनामा किया। चौथी पारी में 126 रन का लक्ष्य महज 6 विकेट खोकर हासिल करते हुए टीम ने अपनी जीत का जश्न मनाया।

Ranji Trophy: आकिब नबी बने मैच के हीरो

इस ऐतिहासिक जीत में आकिब नबी का योगदान सर्वाधिक रहा। उन्हें लगातार दूसरी बार मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार मिला:

  • सेमीफाइनल प्रदर्शन: बंगाल के खिलाफ नबी ने कुल 9 विकेट झटके। पहली पारी में उन्होंने पांच महत्वपूर्ण विकेट लिए और दूसरी पारी में चार और विकेट चटकाकर बंगाल की टीम को महज 99 रन पर समेट दिया।

  • क्वार्टरफाइनल रिकॉर्ड: क्वार्टरफाइनल में मध्य प्रदेश के खिलाफ भी उन्होंने कुल 12 विकेट झटके थे (पहली पारी में 7 और दूसरी पारी में 5)।

Ranji Trophy: अब्दुल समद का बल्ले से योगदान

गेंदबाजी के साथ-साथ बल्लेबाजी में अब्दुल समद ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:

  • पहली पारी: उन्होंने 82 रन की जिम्मेदार पारी खेली जिसने टीम को प्रतिस्पर्धी स्कोर तक पहुंचने में मदद की।

  • दूसरी पारी: जब टीम लक्ष्य का पीछा कर रही थी, तब समद ने नाबाद 30 रन बनाकर टीम को जीत की दहलीज तक पहुंचाया।

Ranji Trophy: मैच का रोमांचक सफर और निर्णायक मोड़

यह सेमीफाइनल मुकाबला शुरू से ही रोमांच से भरपूर रहा:

  1. बंगाल की शुरुआत: सुदीप कुमार घरामी के 146 रन की बदौलत बंगाल 328 रन तक पहुंची।

  2. शमी का कहर: जवाब में बंगाल के मोहम्मद शमी ने घातक गेंदबाजी करते हुए आठ विकेट झटके और जम्मू-कश्मीर की पहली पारी 302 रन पर रुक गई।

  3. गेंदबाजों की वापसी: 26 रन की बढ़त के बावजूद, जम्मू-कश्मीर के गेंदबाजों (आकिब नबी और सुनील कुमार) ने बंगाल को दूसरी पारी में सिर्फ 99 रन पर ढेर कर दिया।

  4. ऐतिहासिक लक्ष्य: 126 रन का पीछा करते हुए जम्मू-कश्मीर के बल्लेबाजों ने संयम का परिचय दिया और 6 विकेट रहते इतिहास रच दिया।

Ranji Trophy: जम्मू-कश्मीर क्रिकेट का सफर और राष्ट्रीय पहचान

राज्य की क्रिकेट टीम की यह यात्रा प्रेरणादायक है। बुनियादी ढांचे में सुधार और युवा प्रतिभाओं की पहचान में किए गए निवेश का परिणाम अब सामने आ रहा है। आकिब नबी और अब्दुल समद जैसे खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है, जिससे आईपीएल और अन्य लीगों में भी उनकी मांग बढ़ सकती है।

Ranji Trophy: फाइनल की चुनौती

अब जम्मू-कश्मीर की नजरें रणजी ट्रॉफी के खिताब पर हैं। फाइनल में उनका सामना कर्नाटक और उत्तराखंड के बीच जारी सेमीफाइनल मैच के विजेता से होगा। टीम की ताकत उनकी एकजुटता, अनुशासित गेंदबाजी और जिम्मेदार बल्लेबाजी रही है।

निष्कर्ष: जम्मू-कश्मीर की यह उपलब्धि भारतीय क्रिकेट के लिए एक सुखद कहानी है जो यह दर्शाती है कि घरेलू क्रिकेट में नई प्रतिभाएं लगातार उभर रही हैं।

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