अमेरिका के खिलाफ भड़के खाड़ी के दोस्त! ईरान जंग में ट्रंप ने किया ऐसा काम, सहयोगी हुए नाराज बहरीन और सऊदी अरब समेत कई देश नाखुश

ईरान जंग में अमेरिका ने खाड़ी सहयोगियों को पहले सूचना नहीं दी, कुवैत-बहरीन-सऊदी नाराज, होर्मुज पर खतरा

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US Iran war tension: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी जंग में एक नया और बड़ा मोड़ आ गया है। यह जंग अब केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रही बल्कि कूटनीतिक मोर्चे पर भी अमेरिका के लिए मुश्किलें खड़ी होने लगी हैं। खाड़ी क्षेत्र के कई देश जो अब तक अमेरिका के करीबी सहयोगी माने जाते रहे हैं, वे अब खुलकर नाराजगी जता रहे हैं। नाराजगी की वजह यह है कि अमेरिका ने ईरान पर हमला करने से पहले इन देशों को कोई पूर्व सूचना नहीं दी।

US Iran war tension: हमले की खबर पहले क्यों नहीं दी?

खाड़ी क्षेत्र के दो देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि उनकी सरकारें इस पूरे घटनाक्रम से बेहद निराश और नाराज हैं। उनकी सबसे बड़ी शिकायत यह है कि अमेरिका और इजरायल ने जब 28 फरवरी को ईरान पर हमला शुरू किया तो उससे पहले खाड़ी के किसी भी सहयोगी देश को इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई। यह एक बड़ा कूटनीतिक चूक माना जा रहा है क्योंकि खाड़ी देश भौगोलिक रूप से ईरान के बेहद करीब हैं। ऐसे में बिना बताए हमला करना इन देशों को खतरे में डालने जैसा था।

US Iran war tension: खाड़ी देशों की चेतावनी को किया नजरअंदाज

इससे भी बड़ी बात यह है कि खाड़ी देशों के अधिकारियों का आरोप है कि उन्होंने अमेरिका को पहले से आगाह किया था। उनका कहना है कि उन्होंने अमेरिकी प्रशासन को चेतावनी दी थी कि ईरान पर इस तरह के हमले के नतीजे पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए बेहद विनाशकारी हो सकते हैं। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया और अपनी योजना के मुताबिक आगे बढ़ता रहा। एक अधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि खाड़ी देश इस बात से नाखुश और नाराज हैं कि अमेरिकी सेना ने उनकी पर्याप्त सुरक्षा नहीं की।

US Iran war tension: ईरान ने खाड़ी देशों को भी बनाया निशाना

अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने केवल इजरायल या अमेरिकी ठिकानों पर ही हमले नहीं किए बल्कि खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में भी मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। इन हमलों ने खाड़ी देशों की आंखें खोल दीं। उन्हें एहसास हुआ कि अमेरिका के साथ रहने के बावजूद उनकी सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित नहीं थी। यही वह पल था जब इन देशों का धैर्य टूटा और उनकी नाराजगी खुलकर सामने आने लगी। खाड़ी में यह धारणा तेजी से पैर पसार रही है कि अमेरिका अपने हितों को सबसे ऊपर रखता है।

US Iran war tension: कुवैत, बहरीन और सऊदी का रुख

इस पूरे विवाद में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि कुवैत, बहरीन और सऊदी अरब की सरकारों ने आधिकारिक तौर पर इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। जब इन देशों की सरकारों से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। यह खामोशी अपने आप में बहुत कुछ कहती है। अक्सर कूटनीति में चुप्पी को सहमति नहीं बल्कि असहमति का संकेत माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि खाड़ी देश सार्वजनिक रूप से अमेरिका की आलोचना करने से बचते हैं क्योंकि वे अमेरिका पर सुरक्षा के लिए निर्भर हैं।

US Iran war tension: व्हाइट हाउस ने दी सफाई

अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस नाराजगी पर प्रतिक्रिया देते हुए व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने कहा कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का असर साफ दिख रहा है। उनका दावा है कि ईरान के जवाबी बैलिस्टिक मिसाइल हमले 90 फीसदी तक घट गए हैं। यह कमी इसलिए आई है क्योंकि अमेरिकी ऑपरेशन ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन लॉन्चर्स को नष्ट कर दिया है और उनके हथियार बनाने की क्षमता को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप सभी क्षेत्रीय साझेदार देशों के संपर्क में हैं।

US Iran war tension: क्या अमेरिका खो रहा है खाड़ी का भरोसा

यह सवाल अब सबसे बड़ा बन गया है। दशकों से अमेरिका खाड़ी देशों का सबसे बड़ा सुरक्षा गारंटर रहा है। इस क्षेत्र में अमेरिका के कई बड़े सैन्य अड्डे हैं और खाड़ी देशों ने अमेरिका के साथ अरबों डॉलर के रक्षा सौदे किए हैं। लेकिन अगर इस जंग के दौरान खाड़ी देशों को यह महसूस होने लगा कि अमेरिका उन्हें अंधेरे में रखकर फैसले करता है और जरूरत के वक्त उनकी सुरक्षा नहीं करता तो यह अमेरिका की खाड़ी नीति के लिए एक बड़ा झटका होगा। आने वाले दिनों में इस क्षेत्र की कूटनीति किस दिशा में जाती है यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।

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