सोने-चांदी में भूकंप, एक ही दिन में सोना ₹3800 और चांदी ₹13000 तक धड़ाम, एक्सपर्ट्स ने बताई गिरावट की तीन बड़ी वजहें
MCX पर सोना 2.50% टूटकर 1,50,964 रुपये/10 ग्राम, चांदी 4.40% गिरकर 2,29,352 रुपये/किलो, एक्सपर्ट्स ने बताई तीन बड़ी वजहें
Gold-Silver Price: सर्राफा बाजार में भारी उथल-पुथल मची। सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त गिरावट दर्ज हुई जिसने निवेशकों की नींद उड़ा दी। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अप्रैल 2026 डिलिवरी वाला सोना 2.50 प्रतिशत यानी 3,796 रुपये गिरकर 1,50,964 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जबकि पिछले सत्र में यह 1,54,760 रुपये पर बंद हुआ था।
दिन के कारोबार में सोने का निचला स्तर 1,50,730 रुपये रहा। चांदी में तो और भी बुरा हाल रहा। MCX पर मार्च डिलिवरी वाली चांदी में 4.40 प्रतिशत तक की गिरावट आई और यह 2,29,352 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर तक फिसल गई। भौतिक बाजार में भी 24 कैरेट सोना इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 1.88 प्रतिशत गिरकर 1,52,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया जबकि चांदी 2.73 प्रतिशत टूटकर 2,34,380 रुपये प्रति किलोग्राम पर बिकी।
Gold-Silver Price: रिकॉर्ड ऊंचाई से कितना गिरा सोना-चांदी
यह गिरावट कोई अचानक नहीं आई बल्कि पिछले कुछ हफ्तों से सोने-चांदी में बड़ा करेक्शन चल रहा है। MCX पर सोना अपने रिकॉर्ड उच्चतम स्तर 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम से लगभग 21 प्रतिशत नीचे आ चुका है। चांदी की स्थिति और भी खराब है जो अपने लाइफटाइम हाई 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम से करीब 45 प्रतिशत की भारी गिरावट पर ट्रेड कर रही है। वैश्विक बाजार में भी सोना 4,938 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है जो जनवरी के शिखर 5,600 डॉलर से काफी नीचे है। जनवरी 2026 के आखिरी दिन तो कीमती धातुओं में 1980 के बाद का सबसे बड़ा एकदिवसीय क्रैश आया था जब सोना 12 प्रतिशत और चांदी 31 प्रतिशत से अधिक गिरी थी। उस दिन से लेकर अब तक बाजार में अस्थिरता बरकरार है।
गिरावट की तीन बड़ी वजहें क्या हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं। पहला और सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना है। सोना और चांदी अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में मूल्यांकित होते हैं और जब डॉलर मजबूत होता है तो गैर-अमेरिकी खरीदारों के लिए ये महंगे हो जाते हैं जिससे मांग कम होती है। डॉलर इंडेक्स में करीब 1 प्रतिशत की तेजी ने सोने-चांदी पर दबाव बनाया। दूसरा कारण अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी है। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है तो सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्ति को रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है और संस्थागत निवेशक पूंजी बॉन्ड की ओर मोड़ देते हैं। तीसरा कारण प्रॉफिट बुकिंग है। पिछले 12 महीनों में सोना 96 प्रतिशत और चांदी 278 प्रतिशत चढ़ी थी। इतनी तेज रैली के बाद कीमतें ओवरबॉट ज़ोन में थीं और करेक्शन स्वाभाविक था।
Gold-Silver Price: CME मार्जिन बढ़ोतरी
गिरावट को और तेज करने में सीएमई ग्रुप की मार्जिन बढ़ोतरी ने बड़ी भूमिका निभाई। कॉमेक्स पर सोने और चांदी के वायदा कारोबार के लिए मार्जिन आवश्यकताओं में इजाफा किया गया ताकि अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित किया जा सके। मार्जिन बढ़ने से कारोबार की लागत बढ़ती है और सट्टा पोजीशन में जबरन बिकवाली होती है।
भारत में भी सेबी के गतिशील मार्जिन नियमों के कारण तेज उतार-चढ़ाव के दौरान मार्जिन बढ़ जाता है जिससे कई रिटेल ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन काटनी पड़ी। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत अनिश्चितता भी बाजार पर भारी पड़ रही है। इस हफ्ते एफओएमसी की मिनट्स जारी होनी हैं और ब्याज दर कटौती की उम्मीदों में बदलाव से बाजार में और अस्थिरता रह सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस सप्ताह अमेरिका या चीन से कोई बड़ा आर्थिक डेटा नहीं आने से सोने में कमजोर से रेंज-बाउंड रुख रह सकता है।
भारतीय बाजार पर क्या हो रहा असर
भारत में सोने-चांदी की कीमतें वैश्विक संकेतों के साथ चलती हैं लेकिन रुपये की स्थिति भी बड़ी भूमिका निभाती है। डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपये ने सोने की गिरावट को कुछ हद तक सीमित किया लेकिन वैश्विक कमजोरी इतनी तेज थी कि घरेलू कीमतें भी गिरीं।
IBJA के उपाध्यक्ष अक्षा कम्बोज ने कहा कि सोना मौजूदा बाजार में हल्की गिरावट में है लेकिन पिछले सप्ताह के स्तरों से अभी भी ऊपर है और कुल मिलाकर रुझान अभी भी सपोर्टिव है जो निरंतर सेफ-हेवन मांग दिखाता है। चांदी के बारे में उन्होंने कहा कि पिछले हफ्तों की मजबूत रैली के बाद चांदी में करेक्शन जारी है। एलकेपी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट जतीन त्रिवेदी ने कहा कि इस सप्ताह अमेरिका या चीन से कोई बड़ा डेटा नहीं आने से सोने में कमजोर से रेंज-बाउंड रुख रह सकता है।
Gold-Silver Price: निवेशकों के लिए क्या है सलाह
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मौजूदा गिरावट खरीदारी का अच्छा मौका है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड की ग्लोबल कमोडिटीज रिसर्च टीम की प्रमुख सूकी कूपर के अनुसार दोनों धातुएं काफी समय से ओवरबॉट जोन में थीं और लॉन्ग-टर्म अपट्रेंड को बनाए रखने के लिए यह करेक्शन जरूरी था। उन्होंने कहा कि भारत और चीन में मौसमी मांग की वापसी कीमतों को सहारा दे सकती है।
जे. सफरा सरासिन के एफएक्स स्ट्रैटेजिस्ट के अनुसार सोने को 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे तोड़ने के लिए किसी बड़े मैक्रो शॉक की जरूरत होगी। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए विशेषज्ञों की राय है कि ऐसे करेक्शन चरणबद्ध खरीदारी का अवसर दे सकते हैं बशर्ते निवेश वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप हो। हालांकि अल्पकालिक ट्रेडर्स को सावधान रहने और उचित जोखिम प्रबंधन के साथ कारोबार करने की सलाह दी जाती है क्योंकि अस्थिरता अभी जारी रह सकती है। विजडमट्री के कमोडिटी हेड नितेश शाह ने कहा कि 31 जनवरी का दिन सोने और चांदी दोनों के लिए इतिहास के सबसे अस्थिर दिनों में दर्ज होगा।
मैटिओली वुड्स की निवेश प्रबंधक केटी स्टोव्स ने गिरावट को बाजार व्यापी कंसंट्रेशन रिस्क का पुनर्मूल्यांकन बताया और कहा कि जैसे टेक शेयरों में भीड़ जमा होने पर गिरावट आती है वैसे ही सोने में भी अत्यधिक पोजिशनिंग के कारण जब सब एक ही दिशा में झुके होते हैं तो अच्छी संपत्तियां भी गिर सकती हैं। 2025 में वैश्विक सोने की मांग 5,002 टन रही और केंद्रीय बैंकों ने 863 टन सोना खरीदा, 2026 में यह करीब 850 टन रहने का अनुमान है जो दीर्घकालिक मांग को मजबूत बनाए रखता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए है। कमोडिटी बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।
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