सोना-चांदी अभी और सस्ता होगा, जानें मार्केट में लगातार आ रही गिरावट की बड़ी वजह

पिछले हफ्ते चांदी 5532 रुपये गिरी, सोना 444 रुपये चढ़ा, अमेरिकी GDP और PCE डेटा पर रहेगी नजर, FOMC मिनट्स भी अहम

0

Gold-Silver Price Crash: सोने और चांदी में निवेश करने वालों के लिए राहत की खबर है। आने वाले हफ्ते कीमती धातुओं की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है, जिससे खरीदारों को बेहतर दाम पर खरीदारी का मौका मिलेगा। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सर्राफा बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है और निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। पिछले हफ्ते मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी के वायदा भाव में 5,532 रुपये यानी 2.2 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई, जबकि सोने की कीमतों में 444 रुपये यानी 0.3 प्रतिशत की मामूली तेजी दर्ज हुई। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि निवेशक अमेरिकी अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों जैसे सकल घरेलू उत्पाद (GDP), व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) मुद्रास्फीति डेटा और फेडरल रिजर्व की नीतियों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस सप्ताह सोना-चांदी की कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है और निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

Gold-Silver Price Crash: पिछले हफ्ते का प्रदर्शन

सोना-चांदी की कीमतों में आने वाले सप्ताह की संभावित गतिविधियों को समझने के लिए पहले पिछले हफ्ते के प्रदर्शन पर नजर डालना जरूरी है:

MCX पर प्रदर्शन:

  • चांदी: पिछले सप्ताह चांदी के वायदा भाव में 5,532 रुपये की भारी गिरावट आई, जो 2.2 प्रतिशत की कमी दर्शाती है। यह गिरावट मुख्य रूप से मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड के कारण आई।

  • सोना: सोने की कीमतों में 444 रुपये यानी 0.3 प्रतिशत की मामूली तेजी देखी गई। यह तेजी भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की मांग से आई।

दिल्ली सर्राफा बाजार में शुक्रवार का भाव:

  • चांदी: शुक्रवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत 13,500 रुपये यानी 5.03 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ 2,55,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। गुरुवार को यह 2,68,500 रुपये प्रति किलोग्राम थी।

  • सोना (99.9% शुद्धता): सोना 2,400 रुपये यानी 1.5 प्रतिशत गिरकर 1,58,500 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह 1,60,900 रुपये प्रति 10 ग्राम था।

यह गिरावट दर्शाती है कि सर्राफा बाजार में दबाव बना हुआ है और खरीदारों के लिए यह अच्छा समय हो सकता है।

इस हफ्ते क्या होगा?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले सप्ताह में सोना और चांदी दोनों की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है, लेकिन अस्थिरता बनी रहेगी।

जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के उपाध्यक्ष (ईबीजी, कमोडिटी एंड करेंसी रिसर्च) प्रणव मेर का विश्लेषण:

प्रणव मेर ने कहा कि सोने और चांदी की कीमतों में कुछ मजबूती देखने को मिल सकती है (यानी थोड़ी रिकवरी), लेकिन अमेरिका की जीडीपी पर आने वाले आंकड़े, व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) मुद्रास्फीति डेटा और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की टिप्पणियों पर ध्यान केंद्रित होने से बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। निवेशकों को FOMC की बैठक के विवरण (मिनट्स) का भी इंतजार रहेगा, जो फेडरल रिजर्व की भविष्य की नीतियों के संकेत देंगे।

एंजेल वन के उपाध्यक्ष प्रथमेश माल्या का विश्लेषण:

प्रथमेश माल्या ने कहा, “फरवरी 2026 में सोने की कीमतों में तेज गिरावट आई है। 13 फरवरी को सोना अपने उच्चतम स्तर 1,80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद तेजी से गिरकर लगभग 1,53,800 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है।” यह लगभग 26,200 रुपये यानी 14.5% की गिरावट है, जो काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि उम्मीद से ज्यादा मजबूत अमेरिकी रोजगार आंकड़ों ने निकट अवधि में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कम कर दिया है, जिससे पिछले हफ्ते सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा।

Gold-Silver Price Crash: अमेरिकी रोजगार डेटा का असर

सोने और चांदी की कीमतों पर सबसे बड़ा असर अमेरिकी आर्थिक डेटा का पड़ता है, खासकर फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति से जुड़े संकेतों का। पिछले हफ्ते अमेरिका में जनवरी के रोजगार आंकड़े जारी हुए, जो उम्मीद से काफी मजबूत निकले। इससे यह संकेत मिला कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत है और फेडरल रिजर्व को जल्द ब्याज दरें घटाने की जरूरत नहीं है।

जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो:

  1. बॉन्ड और बैंक डिपॉजिट जैसे निवेश अधिक आकर्षक हो जाते हैं क्योंकि वे अच्छा रिटर्न देते हैं।

  2. सोना-चांदी जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों की मांग कम हो जाती है।

  3. अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, जिससे डॉलर में प्रतिशत सोना महंगा हो जाता है और मांग घटती है।

इसलिए, मजबूत अमेरिकी रोजगार डेटा ने सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव डाला। अब निवेशक इस सप्ताह आने वाले अमेरिकी GDP और PCE मुद्रास्फीति डेटा का इंतजार कर रहे हैं।

इस सप्ताह के महत्वपूर्ण डेटा पॉइंट्स

आने वाले सप्ताह में कई महत्वपूर्ण अमेरिकी आर्थिक आंकड़े जारी होंगे जो सोना-चांदी की कीमतों को प्रभावित करेंगे:

1. अमेरिकी GDP (सकल घरेलू उत्पाद) आंकड़े:

चौथी तिमाही 2025 की GDP वृद्धि दर जारी होगी। अगर GDP मजबूत आती है, तो यह दर्शाएगा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अच्छी है और फेड को ब्याज दरें घटाने की जल्दी नहीं है। इससे सोने पर दबाव बनेगा। कमजोर GDP सोने के लिए सकारात्मक होगी।

2. PCE (व्यक्तिगत उपभोग व्यय) मुद्रास्फीति डेटा:

यह फेडरल रिजर्व का पसंदीदा मुद्रास्फीति मापक है। अगर PCE मुद्रास्फीति बढ़ती है, तो फेड ब्याज दरें ऊंची रखेगा, जो सोने के लिए नकारात्मक है। गिरती मुद्रास्फीति सोने के लिए सकारात्मक होगी क्योंकि इससे दर कटौती की उम्मीद बढ़ेगी।

3. FOMC बैठक के विवरण (मिनट्स):

फेडरल रिजर्व की पिछली बैठक के विस्तृत कार्यवृत्त जारी होंगे। इससे पता चलेगा कि फेड के सदस्यों ने ब्याज दरों के बारे में क्या चर्चा की। अगर मिनट्स हॉकिश (सख्त) रुख दिखाते हैं, तो सोने पर दबाव बनेगा। डोविश (नरम) रुख सोने के लिए अच्छा होगा।

4. फेड अधिकारियों के बयान:

इस सप्ताह कई फेड अधिकारी सार्वजनिक रूप से बोलेंगे। उनकी टिप्पणियां बाजार को दिशा देंगी।

Gold-Silver Price Crash: सोना-चांदी में निवेश की रणनीति

वर्तमान परिस्थितियों में निवेशकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए:

खरीदारों के लिए:

  • यह गिरावट खरीदारी का अच्छा मौका हो सकती है, खासकर शादी-ब्याह या त्योहारों के लिए सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए।

  • हालांकि, एक साथ बड़ी खरीदारी की बजाय छोटी-छोटी खरीदारी (SIP की तरह) बेहतर हो सकती है क्योंकि और गिरावट की संभावना है।

निवेशकों के लिए:

  • अल्पकालिक ट्रेडर्स को सावधान रहना चाहिए क्योंकि अस्थिरता ज्यादा है।

  • दीर्घकालिक निवेशकों के लिए सोना एक अच्छा हेज (बचाव) बना रहता है।

  • पोर्टफोलियो में सोने का 10-15% हिस्सा रखना समझदारी है।

तकनीकी दृष्टिकोण:

  • MCX पर सोना अगर 78,000-78,500 के सपोर्ट को तोड़ता है तो और गिरावट आ सकती है।

  • चांदी में 90,000-91,000 का सपोर्ट महत्वपूर्ण है।

वैश्विक कारक

अमेरिकी डेटा के अलावा कुछ अन्य वैश्विक कारक भी सोना-चांदी को प्रभावित करेंगे:

  1. भू-राजनीतिक तनाव: मध्य पूर्व, यूक्रेन-रूस, अमेरिका-चीन संबंधों में तनाव बढ़ने से सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ती है।

  2. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: कई देशों के केंद्रीय बैंक सोना खरीद रहे हैं, जो कीमतों को सपोर्ट देता है।

  3. चीन की मांग: चीन दुनिया का सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है। चीनी अर्थव्यवस्था की स्थिति महत्वपूर्ण है।

  4. भारतीय रुपया: रुपये की कमजोरी सोने को भारत में महंगा बनाती है।

Gold-Silver Price Crash: निष्कर्ष

इस सप्ताह सोना-चांदी की कीमतों में और गिरावट की संभावना है, लेकिन अस्थिरता बनी रहेगी। अमेरिकी GDP, PCE मुद्रास्फीति डेटा और FOMC मिनट्स प्रमुख ट्रिगर होंगे। खरीदारों के लिए यह अच्छा समय हो सकता है, लेकिन निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। दीर्घकालिक दृष्टिकोण से सोना अभी भी एक मजबूत निवेश विकल्प बना हुआ है।

Read More Here

ओ रोमियो का पहले वीकेंड बॉक्स ऑफिस कलेक्शन, रविवार को 30% की गिरावट, वर्ल्डवाइड कमाई 45 करोड़

दिल्ली में हर जमीन को मिलेगा 14 अंकों का यूनिक भू आधार नंबर, विवादों का होगा अंत

तारिक रहमान के शपथ ग्रहण में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला होंगे शामिल, 17 फरवरी को भारत का करेंगे प्रतिनिधित्व, विदेश सचिव भी रहेंगे मौजूद

IND vs PAK: टीम इंडिया की धमाकेदार जीत, पाकिस्तान को 61 रन से रौंदा, सुपर-8 में एंट्री पक्की, ईशान किशन की तूफानी 77 रन की पारी

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.