ट्रंप के सख्त बयान से ग्लोबल मार्केट में हड़कंप! एशियाई शेयर बाजार लुढ़के, कच्चा तेल 105 डॉलर के पार पहुंचा, निवेशकों की चिंता बढ़ी, भारत पर भी असर
ट्रंप के ईरान युद्ध संबंधी सख्त बयान के बाद एशियाई बाजार गिरे, कच्चा तेल 105 डॉलर के पार, भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ा
Global Market Highlight: निवेशकों में घबराहट फैल गई है क्योंकि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह तनाव लंबा खिंचा तो महंगाई बढ़ेगी, सप्लाई चेन प्रभावित होगी और कई देशों की विकास दर पर असर पड़ेगा।
Global Market Highlight: ट्रंप का बयान क्या था और क्यों हड़कंप मचा?
ट्रंप ने अपने राष्ट्र संबोधन में कहा कि अमेरिका ईरान की सैन्य क्षमता को लगभग नष्ट कर चुका है और रिजीम चेंज का लक्ष्य करीब है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर कार्रवाई और तेज की जा सकती है। बाजार को उम्मीद थी कि युद्ध जल्द समाप्त हो जाएगा और तेल की आपूर्ति सामान्य हो जाएगी, लेकिन ट्रंप के सख्त रुख ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इस बयान के बाद निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर भागे, जिससे शेयर बाजारों में बिकवाली बढ़ गई।
Global Market Highlight: एशियाई बाजारों में भारी गिरावट, भारत पर भी असर
गुरुवार को एशियाई शेयर बाजारों में 1.4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। जापान का निक्केई, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। भारत में भी सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि मिडिल ईस्ट तनाव बढ़ने से विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) निकल सकते हैं, जिससे भारतीय बाजार पर और दबाव बढ़ सकता है। रुपये पर भी दबाव देखा जा रहा है और डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ है।
Global Market Highlight: कच्चा तेल 105 डॉलर के पार, महंगाई का खतरा बढ़ा
ट्रंप के बयान के सबसे बड़े असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड 4.2 प्रतिशत बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 100 डॉलर के करीब पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई का मुख्य रास्ता है। अगर यह रास्ता प्रभावित रहा तो वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि बढ़ती तेल कीमतें पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा सकती हैं।
Global Market Highlight: बॉन्ड यील्ड बढ़ी, निवेशक सुरक्षित जगहों की ओर
ग्लोबल अनिश्चितता के बीच अमेरिकी 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 4.36 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसका मतलब है कि निवेशक शेयर बाजार की बजाय सरकारी बॉन्ड जैसी सुरक्षित जगहों में पैसा लगा रहे हैं। सोने की कीमतें भी बढ़ रही हैं क्योंकि सोना हमेशा अनिश्चितता के समय सुरक्षित निवेश माना जाता है।
Global Market Highlight: भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है और मिडिल ईस्ट उसके मुख्य आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। तेल की कीमतों में उछाल से भारत का आयात बिल बढ़ेगा, जिससे चालू खाता घाटा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर तेल 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे बैंकिंग, ऑटो और एविएशन जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
Global Market Highlight: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव और होर्मुज का महत्व
अगर ईरान-अमेरिका तनाव लंबा खिंचा तो वैश्विक विकास दर प्रभावित हो सकती है। कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि तेल की कीमतें 120 डॉलर तक पहुंच गईं तो कई देश मंदी की चपेट में आ सकते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य मिडिल ईस्ट से यूरोप और एशिया जाने वाले तेल टैंकरों का मुख्य मार्ग है। अगर ईरान ने इसे बंद करने की कोशिश की या हमले बढ़ाए तो वैश्विक तेल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित होगी।
Global Market Highlight: बाजार विशेषज्ञों की राय और सरकार की तैयारी
बाजार विश्लेषक मानते हैं कि यह गिरावट अल्पकालिक हो सकती है अगर युद्ध जल्द समाप्त हो जाए। भारतीय सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने वैकल्पिक तेल स्रोतों जैसे रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से आयात बढ़ाने की योजना बनाई है। केंद्र सरकार ने पहले ही स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व बढ़ाने पर जोर दिया है ताकि आपात स्थिति में देश को तेल संकट का सामना न करना पड़े।
Global Market Highlight: निवेशकों के लिए सलाह: क्या होगा आगे?
विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि घबराकर फैसले न लें। अल्पकालिक उतार-चढ़ाव सामान्य हैं लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों को मौके का फायदा उठाना चाहिए। सभी की नजरें अब ईरान और अमेरिका के अगले कदमों पर टिकी हुई हैं। अगर बातचीत शुरू हुई और होर्मुज जलडमरूमध्य खुला तो तेल की कीमतें कम हो सकती हैं और बाजार स्थिर हो सकते हैं।
निष्कर्ष
ट्रंप का बयान भले ही मजबूत रुख दिखाता हो लेकिन बाजार हमेशा अनिश्चितता से घबराते हैं। अगले कुछ हफ्ते वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। भारत को इस स्थिति में सतर्क रहते हुए अपने हितों की रक्षा करनी होगी। तेल की कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार को त्वरित कदम उठाने पड़ सकते हैं।
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