मिडिल ईस्ट में तेल युद्ध से वैश्विक बाजारों में हड़कंप, ब्रेंट क्रूड 113 डॉलर पहुंचा, सेंसेक्स खुलते ही 1900 अंक गिरा, निवेशकों में घबराहट और क्या करें अब

ब्रेंट क्रूड 113 डॉलर पहुंचा, मिडिल ईस्ट तनाव से बाजारों में भारी गिरावट

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Middle East oil war: जब दुनिया की सबसे व्यस्त तेल धमनियों पर मिसाइलें बरसती हैं तो उसकी आंच सिर्फ खाड़ी देशों तक नहीं रहती, बल्कि मुंबई के दलाल स्ट्रीट से लेकर टोक्यो के निक्केई तक हर बाजार उस आग में झुलसता है। गुरुवार की सुबह ठीक यही हुआ।

Middle East oil war: शेयर बाजार में अचानक क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष में एक नया और खतरनाक मोड़ आया जब खाड़ी देशों के तेल और गैस क्षेत्रों पर मिसाइल हमले किए गए। इन हमलों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर गंभीर अनिश्चितता पैदा कर दी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत अचानक 113 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई। इस तेज उछाल ने वैश्विक निवेशकों में घबराहट फैला दी और पूरे एशियाई बाजारों में बिकवाली का दौर शुरू हो गया।

Middle East oil war: भारतीय शेयर बाजार पर कितना गहरा असर पड़ा?

गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार के खुलते ही सेंसेक्स में 1900 से अधिक अंकों की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी भी भारी दबाव में आ गया और बाजार में चारों तरफ बिकवाली का माहौल बन गया।

पिछले तीन कारोबारी सत्रों से जारी तेजी एक ही झटके में धूल में मिल गई। ऊर्जा, ऑटो, एविएशन और पेंट जैसे तेल कीमतों पर निर्भर क्षेत्रों के शेयरों में सबसे तेज गिरावट देखी गई।

Middle East oil war: जापान से कोरिया तक किन एशियाई बाजारों में कोहराम मचा?

भारत से पहले ही एशियाई बाजारों में बड़ी उथलपुथल शुरू हो गई थी। जापान के निक्केई इंडेक्स में तेज गिरावट आई और निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए बड़ी मात्रा में शेयर बेचे।

दक्षिण कोरिया के कोस्पी बाजार में भी भारी बिकवाली रही। हांगकांग, सिंगापुर और ताइवान सहित लगभग सभी प्रमुख एशियाई बाजार लाल निशान में खुले। वैश्विक वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार यह तेल आपूर्ति पर संकट की आशंका ने पूरे क्षेत्र में निवेश का भरोसा एक साथ हिला दिया।

Middle East oil war: क्रूड ऑयल 113 डॉलर पर पहुंचने का क्या मतलब है?

कच्चे तेल की कीमत में यह उछाल सामान्य उतारचढ़ाव नहीं है। ब्रेंट क्रूड का 113 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचना यह दर्शाता है कि बाजार वैश्विक तेल आपूर्ति में बड़े व्यवधान की आशंका को गंभीरता से ले रहा है।

मिडिल ईस्ट दुनिया के कुल कच्चे तेल उत्पादन में एक बड़ी हिस्सेदारी रखता है। इस क्षेत्र में किसी भी अस्थिरता का असर सीधे वैश्विक ईंधन कीमतों पर पड़ता है और यही आशंका अभी बाजारों को डरा रही है।

Middle East oil war: भारत पर महंगे कच्चे तेल का क्या असर होगा?

भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें 113 डॉलर तक पहुंचती हैं तो इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल की लागत पर पड़ता है।

ऊर्जा अर्थशास्त्रियों के अनुसार कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के चालू खाता घाटे को बढ़ाती हैं, रुपये पर दबाव डालती हैं और महंगाई को फिर से भड़का सकती हैं। इससे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें भी कमजोर पड़ सकती हैं।

Middle East oil war: किन सेक्टर्स के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव है?

तेल की ऊंची कीमतों से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले सेक्टरों में एविएशन कंपनियां सबसे आगे हैं क्योंकि विमान ईंधन उनकी लागत का बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा पेंट, टायर और रासायनिक उत्पाद बनाने वाली कंपनियों पर भी कच्चे माल की लागत बढ़ने का सीधा असर होता है।

दूसरी तरफ सरकारी तेल कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव देखा जा रहा है क्योंकि महंगे आयात और स्थानीय मूल्य नियंत्रण के बीच उनका मार्जिन प्रभावित होता है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता, इन सेक्टरों में दबाव बना रह सकता है।

Middle East oil war: निवेशकों को इस गिरावट में क्या करना चाहिए?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक घटनाओं से आई गिरावट अक्सर अल्पकालिक होती है लेकिन अगर संघर्ष लंबा खिंचे तो असर गहरा हो सकता है। ऐसे में घबराहट में शेयर बेचना समझदारी नहीं है।

दीर्घकालिक निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए और तेल पर अत्यधिक निर्भर कंपनियों में एक्सपोजर की जांच करनी चाहिए। वित्तीय सलाहकारों के अनुसार ऐसे समय में फार्मा, आईटी और घरेलू उपभोग से जुड़े सेक्टर अपेक्षाकृत सुरक्षित रहते हैं।

निष्कर्ष

मिडिल ईस्ट का यह संकट अब केवल एक क्षेत्रीय युद्ध नहीं रहा। यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, महंगाई और शेयर बाजारों की स्थिरता को एक साथ चुनौती दे रहा है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील है। निवेशकों के लिए यह समय धैर्य और सोच-समझकर निर्णय लेने का है, न कि भावनाओं में बहने का।

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