जर्मनी की SWARM Biotactics बना रही ‘रोबोटिक कॉकरोच’! जासूसी से लेकर आपदा राहत तक क्रांतिकारी उपयोग, इलेक्ट्रॉनिक बैकपैक से दूर बैठकर होगा कंट्रोल; उठे नैतिक सवाल

कॉकरोच पर इलेक्ट्रॉनिक बैकपैक, जासूसी और राहत कार्यों में होगा इस्तेमाल

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SWARM Biotactics innovation: जब विज्ञान प्रकृति से सीखता है तो नतीजे ऐसे होते हैं जो फिल्मी कल्पना को भी पीछे छोड़ दें।

SWARM Biotactics innovation: रोबोटिक कॉकरोच तकनीक क्या है और यह कैसे काम करती है?

जर्मन कंपनी SWARM Biotactics ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिसमें असली जीवित कॉकरोच की पीठ पर एक छोटा सा इलेक्ट्रॉनिक बैकपैक लगाया जाता है। इस बैकपैक में कैमरा, विभिन्न प्रकार के सेंसर और संचार प्रणाली शामिल होती है।

इस तकनीक की सबसे खास बात यह है कि दूर बैठा ऑपरेटर इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल के जरिए कॉकरोच को अपनी इच्छानुसार किसी भी दिशा में चला सकता है। कॉकरोच रियल टाइम में अपने आसपास की जानकारी और वीडियो फुटेज सीधे नियंत्रण केंद्र तक भेजते रहते हैं।

SWARM Biotactics innovation: कॉकरोच को ही क्यों चुना गया, किसी और जीव को क्यों नहीं?

यह सवाल स्वाभाविक है और इसका जवाब कॉकरोच की अद्भुत जैविक क्षमताओं में छिपा है। कॉकरोच को पृथ्वी के सबसे मजबूत और जीवट जीवों में गिना जाता है।

ये अत्यधिक गर्मी, ठंड, नमी और यहां तक कि उच्च विकिरण वाले वातावरण में भी जीवित रह सकते हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये एकदम संकरी और तंग जगहों में भी आसानी से घुस सकते हैं जहां किसी भी मशीनी उपकरण का जाना संभव नहीं होता। रक्षा तकनीक विशेषज्ञों के अनुसार, कॉकरोच की यह प्राकृतिक क्षमता किसी भी मानव निर्मित रोबोट से कहीं बेहतर है।

SWARM Biotactics innovation: यह तकनीक ड्रोन से किस तरह बेहतर या अलग है?

आधुनिक युद्धों में ड्रोन की अहमियत सर्वविदित है। रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर मध्य पूर्व के संघर्षों तक ड्रोन ने युद्ध की रणनीति को पूरी तरह बदल दिया है। लेकिन ड्रोन की अपनी सीमाएं हैं। वे आकाश में उड़ते हैं इसलिए राडार और एंटी ड्रोन प्रणालियों से पकड़े जा सकते हैं।

सुरंगों, भूमिगत बंकरों या इमारतों के भीतरी हिस्सों में ड्रोन का प्रवेश संभव नहीं होता। रोबोटिक कॉकरोच इन सभी सीमाओं को पार कर सकते हैं। वे जमीन पर रेंगते हैं इसलिए राडार की पकड़ से बाहर रहते हैं और अपने छोटे आकार की वजह से लगभग अदृश्य रहते हैं।

SWARM Biotactics innovation: रोबोटिक कॉकरोच का सैन्य उपयोग कैसे होगा?

युद्ध के मैदान में इन कॉकरोच का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है। दुश्मन के भूमिगत ठिकानों, सुरंगों और संकरे मार्गों में घुसकर ये वहां की पूरी जानकारी वास्तविक समय में नियंत्रण केंद्र तक पहुंचा सकते हैं।

इमारतों के भीतर बंधकों की स्थिति जानना हो या दुश्मन के हथियार भंडार की जानकारी लेनी हो, रोबोटिक कॉकरोच यह काम बेहद सटीकता से कर सकते हैं। इसके अलावा इन्हें जैविक और रासायनिक हमलों के बाद खतरनाक क्षेत्रों में स्थिति का जायजा लेने के लिए भी भेजा जा सकता है जहां मानव जाना जोखिम भरा होता है।

SWARM Biotactics innovation: आपदा राहत और बचाव कार्यों में यह तकनीक कैसे मददगार होगी?

रोबोटिक कॉकरोच की उपयोगिता केवल युद्ध तक सीमित नहीं है। प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, इमारत ढहने या बाढ़ के बाद मलबे के नीचे दबे लोगों को खोजना सबसे बड़ी चुनौती होती है।

ऐसे हालात में जहां बचावकर्मी और बड़ी मशीनें नहीं पहुंच सकतीं, रोबोटिक कॉकरोच आसानी से मलबे की दरारों में घुसकर जीवित बचे लोगों की स्थिति और उनके स्थान की सटीक जानकारी बाहर भेज सकते हैं। इससे बचाव कार्य कहीं तेज और प्रभावी हो सकता है और अनगिनत जीवन बचाए जा सकते हैं।

SWARM Biotactics innovation: इस तकनीक से जुड़ी नैतिक और कानूनी चुनौतियां क्या हैं?

किसी जीवित प्राणी को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जोड़कर नियंत्रित करना नैतिक दृष्टि से कई सवाल खड़े करता है। पशु अधिकार संगठन और जीव विज्ञानी इस पर अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।

तकनीकी और रक्षा नीति विशेषज्ञों के अनुसार, किसी जीवित जीव को हथियार या जासूसी उपकरण के रूप में उपयोग करना अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे में नई परिभाषाओं की मांग करता है। यह तकनीक जितनी क्रांतिकारी है उतनी ही जटिल नैतिक बहस भी इसके साथ आती है।

SWARM Biotactics innovation: SWARM Biotactics कंपनी की पृष्ठभूमि और तकनीक का भविष्य

जर्मनी अपनी उन्नत इंजीनियरिंग और जैव प्रौद्योगिकी के लिए विश्वभर में जाना जाता है। SWARM Biotactics उन अग्रणी कंपनियों में शामिल है जो जीव विज्ञान और इलेक्ट्रॉनिक्स के संगम पर काम कर रही हैं।

इस क्षेत्र में काम करने वाले शोधकर्ताओं के अनुसार, बायोहाइब्रिड रोबोटिक्स यानी जीवित जीवों और मशीनी तकनीक का संयोजन अगले दशक की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांतियों में से एक होगी। हालांकि यह तकनीक अभी विकास के चरण में है और व्यावहारिक तैनाती से पहले कई परीक्षणों से गुजरनी होगी।

निष्कर्ष

रोबोटिक कॉकरोच तकनीक विज्ञान और प्रकृति के बीच एक अभूतपूर्व सहयोग का प्रतीक है। यह तकनीक एक तरफ जहां युद्ध की रणनीति को नई परिभाषा दे सकती है वहीं दूसरी तरफ आपदा प्रबंधन में क्रांति लाने की क्षमता रखती है। लेकिन किसी जीवित प्राणी को उपकरण बनाने की नैतिकता पर भी गंभीर विमर्श जरूरी है। आने वाले समय में यह तकनीक कितनी व्यावहारिक और स्वीकार्य होगी, यह विज्ञान, नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय कानून तीनों मिलकर तय करेंगे।

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