तेल खत्म, स्कूल-कॉलेज बंद! पाकिस्तान में शहबाज शरीफ ने लगाए 5 सख्त नियम,- होर्मुज संकट से LPG-पेट्रोल की किल्लत, इफ्तार पार्टियों पर भी रोक, जनता बेहाल

होर्मुज संकट से तेल खत्म, शहबाज सरकार ने स्कूल-दफ्तर-मॉल-इफ्तार पार्टियों पर रोक लगाई, ईंधन बचत के लिए 5 बड़े फैसले, आम जनता परेशान

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Pakistan fuel crisis: मिडिल ईस्ट में भड़की जंग की लपटें अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को झुलसाने लगी हैं। होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की पाबंदी के बाद पाकिस्तान को तेल की सप्लाई लगभग ठप हो गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाते ही पाकिस्तान में फ्यूल संकट इतना गहरा गया है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को आनन-फानन में स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तरों के लिए पाँच बड़े और सख्त नियम लागू करने पड़े हैं। देश में हाहाकार मचा है और आम नागरिक से लेकर व्यापारी तक सभी बेहाल हैं।

Pakistan fuel crisis: होर्मुज संकट ने पाकिस्तान की कमर तोड़ी

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की सबसे अहम समुद्री तेल आपूर्ति गलियारों में से एक है। इसी रास्ते से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा अपनी तेल जरूरतें पूरी करता है। जब से ईरान ने इस जलमार्ग पर नियंत्रण कड़ा किया है, तब से पाकिस्तान जैसे देशों को तेल की आपूर्ति में भारी रुकावट आ रही है। पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और ऐसे में यह फ्यूल संकट उसके लिए दोहरी मार बन गया है। पाकिस्तान के कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं।

Pakistan fuel crisis: शहबाज शरीफ के 5 बड़े फैसले

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश में बढ़ते फ्यूल संकट को देखते हुए आपातकालीन बैठक बुलाई और उसके बाद पाँच बड़े निर्देश जारी किए:

  1. स्कूल और कॉलेज: सरकारी स्कूल और कॉलेज अब सप्ताह में कम दिन खुलेंगे ताकि परिवहन पर खर्च होने वाले ईंधन की बचत हो सके।

  2. सरकारी दफ्तर: दफ्तरों में कामकाज के घंटे कम किए जाएंगे और जहाँ संभव हो वहाँ वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा दिया जाएगा।

  3. सरकारी वाहन: सरकारी वाहनों के उपयोग पर सख्त पाबंदी लगाई गई है। केवल आपातकालीन और जरूरी सेवाओं के लिए ही सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल होगा।

  4. बाजार और मॉल: बड़े शॉपिंग मॉल, बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान रात को जल्दी बंद होंगे ताकि बिजली और ईंधन की खपत कम हो।

  5. सार्वजनिक परिवहन: सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दी जाएगी और निजी वाहनों के उपयोग को हतोत्साहित किया जाएगा।

Pakistan fuel crisis: इफ्तार पार्टियों पर भी लगाई रोक

रमजान के पवित्र महीने में भी पाकिस्तान सरकार को एक कड़ा और अलोकप्रिय फैसला लेना पड़ा। सरकार ने बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाली इफ्तार पार्टियों पर रोक लगा दी है। इसके पीछे तर्क यह दिया गया है कि इन आयोजनों में ईंधन और बिजली की भारी बर्बादी होती है। यह फैसला लोगों को नागवार जरूर गुजरा लेकिन सरकार का कहना है कि हालात की गंभीरता को देखते हुए यह कदम अनिवार्य हो गया था। शहबाज शरीफ ने जनता से अपील की है कि वे इस मुश्किल घड़ी में सरकार का साथ दें।

Pakistan fuel crisis: पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दोहरी मार

पाकिस्तान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कर्ज तले दबा है। विदेशी मुद्रा भंडार कम है और महंगाई दर ऊँची बनी हुई है। तेल की कमी से न केवल परिवहन बल्कि कृषि, उद्योग और बिजली उत्पादन सभी क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। पाकिस्तान में बिजली उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा तेल आधारित बिजलीघरों पर निर्भर है। जब तेल की आपूर्ति बाधित होती है तो सीधे तौर पर बिजली कटौती बढ़ जाती है। कई शहरों में अब दिन में कई-कई घंटों की लोडशेडिंग हो रही है।

Pakistan fuel crisis: भारत के लिए क्या सबक

पाकिस्तान की यह दुर्दशा भारत के लिए भी एक बड़ा सबक है। भारत ने समय रहते अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाई है और रूस, अमेरिका तथा अन्य देशों से तेल आयात बढ़ाया है। इसके अलावा नवीकरणीय ऊर्जा में भारी निवेश ने भारत को मिडिल ईस्ट पर अत्यधिक निर्भरता से बचाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जो देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी एक क्षेत्र या स्रोत पर बहुत ज्यादा निर्भर रहते हैं, वे वैश्विक संकट के समय सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।

Pakistan fuel crisis: आगे क्या होगा पाकिस्तान का

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट में जंग और लंबी खिंची तो पाकिस्तान की स्थिति और भी बिगड़ सकती है। सरकार वैकल्पिक रास्तों से तेल मँगाने की कोशिश कर रही है लेकिन यह प्रक्रिया न केवल महंगी है बल्कि समय भी ज्यादा लेती है। चीन से मदद माँगने की भी खबरें आ रही हैं लेकिन अभी तक कोई ठोस समझौता सामने नहीं आया है। पाकिस्तान के आम नागरिक इस पूरे संकट में सबसे ज्यादा पिस रहे हैं।

निष्कर्ष

मिडिल ईस्ट की जंग ने साबित कर दिया है कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा कितनी नाजुक है। पाकिस्तान में शहबाज शरीफ सरकार के पाँच सख्त फैसले इस बात का संकेत हैं कि हालात कितने गंभीर हो चुके हैं। स्कूल, कॉलेज, दफ्तर और इफ्तार पार्टियाँ सब कुछ प्रभावित हो रहा है। यह संकट सिर्फ पाकिस्तान का नहीं बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए एक चेतावनी है कि ऊर्जा स्वावलंबन आज के दौर की सबसे बड़ी जरूरत है।

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