Fake IAS Manish Gupta: फर्जी IAS मनीष गुप्ता गिरफ्तार, महलनुमा घर और करीब 1 करोड़ की Tesla कार ने चौंकाया, करोड़ों की संपत्ति के स्रोत की जांच में जुटी SIT

महलनुमा घर और Tesla कार से चौंकाने वाला खुलासा, बैंक खातों की जांच कर रही SIT

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Fake IAS Manish Gupta: बिहार के खगड़िया जिले में फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर करोड़ों की ठगी करने वाले मनीष गुप्ता को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। गोगरी जमालपुर में बने उनके आलीशान मकान और विलासिता भरी जिंदगी ने सभी को हैरान कर दिया है। घर में 50 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, तीन फेज का 15 किलोवाट बिजली कनेक्शन है और परिसर में झरना तथा बगीचा भी बनाया गया है। करीब एक करोड़ रुपये की टेस्ला कार जिस पर भारत सरकार लिखा हुआ है, गोगरी थाना परिसर में खड़ी होने से लोगों की भीड़ जुट रही है। खगड़िया एसपी ने मामले की गहन जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है। पुलिस अब बैंक खातों और दस्तावेजों के जरिए उनकी अकूत संपत्ति का स्रोत तलाश रही है।

Fake IAS Manish Gupta: गिरफ्तारी और मामला कैसे सामने आया

मनीष गुप्ता लंबे समय से खुद को आईएएस अधिकारी या इंटेलिजेंस ब्यूरो का अधिकारी बताकर लोगों को ठगते आ रहे थे। खगड़िया के गोगरी जमालपुर में उन्होंने करोड़ों रुपये खर्च कर आलीशान मकान बनवाया और विलासिता का जीवन जी रहे थे। पुलिस ने उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के बाद कार्रवाई की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया और जेल भेज दिया गया।

स्थानीय लोगों में इस खुलासे से सनसनी फैल गई क्योंकि कई लोग उन्हें असली अधिकारी मानते थे। एक स्कूल के दोस्त को तो अभी भी यकीन नहीं हो रहा कि उनका दोस्त फर्जी था। करीब पांच साल पहले वह दोस्त अपने बेटे को नौकरी दिलाने के लिए उनके घर गया था और मनीष गुप्ता ने आश्वासन भी दिया था।

आलीशान मकान की हैरान करने वाली सजावट

गोगरी जमालपुर बाजार में स्थित मनीष गुप्ता का मकान देखने में महल जैसा लगता है। घर में 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं जो हर कोने पर नजर रखते हैं। बिजली कनेक्शन तीन फेज का है और लोड 15 किलोवाट है जो सामान्य घरों से काफी ज्यादा है।

पिछले करीब दस वर्षों से इस मकान में अंदरूनी निर्माण और सजावट का काम चल रहा था। बिहार के अलावा सिलीगुड़ी और दूसरे राज्यों से मजदूर यहां काम करने आते रहे हैं। घर की नक्काशी और सजावट पर करोड़ों रुपये खर्च होने की बात सामने आ रही है। आज भी कुछ मजदूर वहां काम करते दिख रहे हैं। भवन के पीछे कैंपस में बड़ा झरना और बगीचा बनाया गया है जो विलासिता का प्रतीक है।

टेस्ला कार और विलासिता का प्रदर्शन

गोगरी थाना परिसर में खड़ी टेस्ला कंपनी की गाड़ी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। करीब एक करोड़ रुपये की यह कार भारत में चुनिंदा लोगों के पास ही होती है। कार पर भारत सरकार लिखा होने से लोगों की हैरानी और बढ़ गई। मनीष गुप्ता इस गाड़ी के मालिक बताए जा रहे हैं।

आलीशान घर, महंगी कार और सुरक्षा व्यवस्था से साफ है कि वे अपनी फर्जी पहचान के बल पर बड़ी संपत्ति जमा कर चुके थे। स्थानीय लोग बताते हैं कि घर के अंदर जाने के बाद वे जल्दी बाहर नहीं निकलते थे। अकेले इतने बड़े मकान में रहना और इतनी सुरक्षा रखना संदेह पैदा करता था लेकिन कोई खुलेआम सवाल नहीं पूछता था।

ठगी का तरीका और संपत्ति का स्रोत

मनीष गुप्ता कभी खुद को इंटेलिजेंस ब्यूरो का अधिकारी बताते तो कभी आईएएस अधिकारी का मुखौटा ओढ़ लेते। इस फर्जी पहचान के जरिए वे लोगों से करोड़ों रुपये ठगते थे और संपत्ति जोड़ते गए।

पुलिस अब उनके बैंक खातों की डिटेल, दस्तावेज और लेन-देन की जांच कर रही है। एसआईटी यह पता लगाने की कोशिश में है कि उन्होंने किन-किन लोगों को ठगा, कितनी रकम हड़पी और संपत्ति कहां-कहां निवेश की। जांच पूरी होने के बाद ही ठगी का पूरा दायरा सामने आएगा। फर्जी अधिकारी बनकर ठगी के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं लेकिन इतनी विलासिता भरी जिंदगी जीने वाले मामले अपेक्षाकृत कम होते हैं।

एसआईटी का गठन और आगे की जांच

खगड़िया एसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन किया है। टीम बैंक रिकॉर्ड, प्रॉपर्टी दस्तावेज, गाड़ियों के पेपर्स और अन्य सबूतों को जुटा रही है। मनीष गुप्ता के लिंक किन लोगों और जगहों से जुड़े हैं यह भी जांच का हिस्सा है।

पुलिस चाहती है कि ठगी का पूरा नेटवर्क सामने आए और सभी दोषियों पर कार्रवाई हो। संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है। जांच एजेंसियां फर्जी दस्तावेजों और पहचान पत्रों की भी पड़ताल कर रही हैं जिनका इस्तेमाल वे अधिकारी बनने के लिए करते थे।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया और हैरानी

गोगरी जमालपुर इलाके के लोग इस खुलासे से स्तब्ध हैं। कई लोग मनीष गुप्ता को असली अधिकारी मानकर सम्मान देते थे। उनके आलीशान घर और गाड़ी को देखकर लोग प्रभावित होते थे। अब जब सच्चाई सामने आई है तो लोग हैरान हैं कि इतने सालों तक कैसे किसी को शक नहीं हुआ।

कुछ लोग कहते हैं कि वे बहुत कम बाहर निकलते थे इसलिए उनकी असलियत छिपी रही। दोस्त का किस्सा भी चर्चा में है जो नौकरी के लिए गया था और आश्वासन लेकर लौटा था। अब लोग पुलिस से मांग कर रहे हैं कि ठगी के सभी पीड़ितों को न्याय मिले।

Fake IAS Manish Gupta: फर्जी अधिकारी बनने की घटनाओं पर सवाल

बिहार समेत कई राज्यों में फर्जी आईएएस, आईपीएस या सरकारी अधिकारी बनकर ठगी के मामले समय-समय पर सामने आते रहते हैं। लोग अधिकारी की वर्दी या पहचान देखकर आसानी से विश्वास कर लेते हैं।

मनीष गुप्ता का मामला इसलिए अलग है क्योंकि उन्होंने सिर्फ ठगी ही नहीं बल्कि उससे मिली रकम से महलनुमा घर और लग्जरी कार जैसे प्रतीक खड़े कर दिए। यह घटना प्रशासन और पुलिस के लिए सबक है कि ऐसे लोगों पर नजर रखने की व्यवस्था और मजबूत होनी चाहिए। आम नागरिकों को भी सतर्क रहना चाहिए और किसी भी अधिकारी की पहचान की पुष्टि जरूर करनी चाहिए।

एसआईटी की जांच से यह साफ होगा कि मनीष गुप्ता ने कितने सालों से यह खेल खेला और कितनी संपत्ति अर्जित की। बैंक खातों और प्रॉपर्टी की ट्रेल फॉलो करके पुलिस ठगी की रकम का हिसाब लगाने की कोशिश करेगी। अगर अन्य राज्यों से भी लिंक निकलते हैं तो मामले का दायरा और बढ़ सकता है।

फिलहाल वे जेल में हैं और कानूनी प्रक्रिया चल रही है। इस मामले ने एक बार फिर फर्जी पहचान और ठगी के खिलाफ सख्ती की जरूरत को रेखांकित किया है। लोगों को सतर्क रहना चाहिए और फर्जी अधिकारियों से बचने के लिए आधिकारिक सत्यापन जरूर करना चाहिए।

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