EU Trade Deal: भारत-यूरोपीय संघ के बीच हुआ मदर ऑफ ऑल डील्स, जानें कौन सी चीजें होंगी सस्ती
18 साल बाद मुक्त व्यापार समझौता, PM मोदी ने कहा 'मदर ऑफ ऑल डील्स'; लग्जरी कारें, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवा, शराब सस्ती, व्यापार 51 अरब डॉलर तक
EU Trade Deal: भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता यानी FTA पर आखिरकार हस्ताक्षर हो गए हैं। 2007 से चल रही बातचीत के 18 साल बाद यह ऐतिहासिक समझौता साकार हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को मदर ऑफ ऑल डील्स बताते हुए कहा कि यह दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तालमेल का शानदार उदाहरण है। इस समझौते से भारत में यूरोपीय संघ से आने वाले कई सामान की कीमतें घट सकती हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में समझौते का महत्व
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समझौता वैश्विक जीडीपी के करीब 25 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के लगभग एक तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। यह आंकड़ा इस बात को स्पष्ट करता है कि यह केवल भारत और यूरोप के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। दोनों पक्षों की मिली जुली आबादी 200 करोड़ से अधिक है जो एक विशाल बाजार का निर्माण करती है।
दोनों अर्थव्यवस्थाओं की तुलना

यूरोपीय संघ की जीडीपी 20 ट्रिलियन डॉलर है जबकि भारत की जीडीपी 4.18 ट्रिलियन डॉलर है। यूरोपीय संघ में 45 करोड़ लोग रहते हैं जबकि भारत की आबादी 140 करोड़ है। व्यापार के मामले में यूरोपीय संघ का निर्यात 2.9 ट्रिलियन डॉलर और आयात 2.6 ट्रिलियन डॉलर है। वहीं भारत का निर्यात 824.5 अरब डॉलर और आयात 915 अरब डॉलर है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि दोनों के बीच व्यापार की कितनी बड़ी संभावनाएं हैं।
EU Trade Deal: लग्जरी कारों में होगी भारी कटौती
इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा लग्जरी कार खरीदारों को मिलने वाला है। मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू और पॉर्श जैसी महंगी कारों की कीमतों में काफी कमी आएगी। 15000 यूरो यानी लगभग 16.3 लाख रुपये से अधिक मूल्य वाली कारों पर अब केवल 40 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। पहले यह टैरिफ 110 प्रतिशत तक था। इसका मतलब है कि टैरिफ में 70 प्रतिशत तक की भारी कटौती हुई है। इससे इन कारों की कीमतें लाखों रुपये तक कम हो सकती हैं।
विमान और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होंगे किफायती
केवल कारें ही नहीं बल्कि विमान, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, रसायन, आधुनिक चिकित्सा उपकरण और धातु स्क्रैप भी सस्ते हो सकते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में आने वाले यूरोपीय उत्पादों पर टैरिफ में कमी से उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। चिकित्सा उपकरणों की कीमतें घटने से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
यूरोपीय शराब की कीमतें घटेंगी
शराब पीने वालों के लिए भी यह अच्छी खबर है। भारतीय बाजार में यूरोप से आने वाली शराब की कीमतें घट सकती हैं। यूरोपीय वाइन और अन्य मादक पेय पदार्थों पर लगने वाले टैरिफ में कमी होगी। हालांकि राज्य सरकारों की एक्साइज ड्यूटी अलग से लागू होगी लेकिन फिर भी समग्र कीमतों में कमी की उम्मीद है।
सेवा क्षेत्र में खुलेंगे नए अवसर
इस समझौते का एक बड़ा फायदा सेवा क्षेत्र में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को मिलेगा। आईटी, इंजीनियरिंग, टेलीकॉम और व्यापार जैसे सर्विस सेक्टर में भारतीयों को यूरोप में काम करने के नए मौके मिलेंगे। भारतीय युवाओं के लिए यह करियर के बेहतरीन अवसर खोलेगा। विशेष रूप से आईटी सेक्टर के पेशेवरों को इसका सबसे अधिक लाभ मिल सकता है।
EU Trade Deal: 2031 तक व्यापार बढ़कर 51 अरब डॉलर होगा
एमके ग्लोबल की शोध रिपोर्ट के अनुसार इस मुक्त व्यापार समझौते (EU Trade Deal) से 2031 तक भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार 51 अरब डॉलर यानी लगभग 4.68 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यह मौजूदा व्यापार से कई गुना अधिक है। इससे भारत के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा।
वस्त्र उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
भारतीय वस्त्र उद्योग इस समझौते से काफी लाभान्वित होगा। यूरोपीय बाजार में भारतीय कपड़ों और टेक्सटाइल उत्पादों की पहुंच आसान होगी। टैरिफ में कटौती से भारतीय निर्यातक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर अपने उत्पाद बेच सकेंगे। इससे देश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। टेक्सटाइल सेक्टर में काम करने वाले लाखों लोगों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
दवा उद्योग को बड़ा लाभ
फार्मास्युटिकल सेक्टर इस समझौते से बहुत लाभान्वित होगा। भारतीय दवाओं को यूरोपीय बाजार में प्रवेश में आसानी होगी। भारत फार्मा उत्पादों का बड़ा निर्यातक है और यह समझौता उसके निर्यात को और बढ़ाएगा। साथ ही यूरोप से आधुनिक चिकित्सा उपकरण भारत में कम कीमत पर आएंगे।
कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा
भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात में भी वृद्धि होगी। चाय, मसाले, चावल, फल और सब्जियां यूरोपीय बाजार में अधिक मात्रा में जा सकेंगी। किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा। कृषि आय बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
एमएसएमई क्षेत्र को मिलेगा प्रोत्साहन
छोटे और मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई को इस समझौते से विशेष लाभ होगा। छोटे उद्यमी यूरोपीय बाजार में अपने उत्पाद बेच सकेंगे। निर्यात बढ़ने से इन उद्योगों का विस्तार होगा। नए रोजगार पैदा होंगे। देश की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई का योगदान बढ़ेगा।
तकनीकी सहयोग बढ़ेगा
यूरोप से भारत को उन्नत तकनीक के हस्तांतरण में मदद मिलेगी। नवीकरणीय ऊर्जा, विनिर्माण, डिजिटल क्षेत्र और हरित प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ेगा। भारतीय कंपनियां यूरोपीय तकनीक का उपयोग कर अपने उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार कर सकेंगी।
निवेश में वृद्धि की संभावना
यूरोपीय कंपनियां भारत में अधिक निवेश करेंगी। नई विनिर्माण इकाइयां स्थापित होंगी। बुनियादी ढांचे के विकास में सहायता मिलेगी। विदेशी प्रत्यक्ष निवेश बढ़ने से अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। नए उद्योग स्थापित होंगे।
आम जनता को मिलेगी राहत
इस समझौते का अंतिम लाभ आम नागरिकों को मिलेगा। विभिन्न उत्पादों की कीमतें कम होंगी। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। जीवन स्तर में सुधार होगा। यह समझौता देश की समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
EU Trade Deal: 18 साल की मेहनत रंग लाई
2007 से शुरू हुई वार्ता को अंतिम रूप देने में 18 साल लग गए। इस दौरान कई दौर की बातचीत हुई। विभिन्न मुद्दों पर सहमति बनाने में समय लगा। लेकिन अब दोनों पक्षों की मेहनत रंग लाई है। यह दोनों के लिए बड़ी उपलब्धि है।
निष्कर्ष: भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ यह मुक्त व्यापार समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए ऐतिहासिक है। मदर ऑफ ऑल डील्स कहे जाने वाले इस समझौते से लग्जरी कारों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक कई चीजें सस्ती होंगी। रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और भारतीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
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