EMI लेने से पहले जरूर जानें 2-6-10 का जादुई नियम, एक सरल फॉर्मूला जो आपको कर्ज के जाल से बचाएगा और आर्थिक आजादी दिलाएगा

EMI लेने से पहले जरूर जानें - सामान कीमत आधी तनख्वाह से कम, किश्त 6 महीने से छोटी, कुल EMI वेतन का 10% से कम

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EMI Formula: आज के दौर में लोन और EMI लेना उतना ही सामान्य हो गया है जितना रोज सुबह उठना। मोबाइल फोन, लैपटॉप, टेलीविजन, कार, बाइक और यहां तक कि घर तक सब कुछ आसान मासिक किश्तों पर मिल रहा है। बैंक और फिनटेक कंपनियां कुछ ही मिनटों में लोन देने का वादा करती हैं और हम बिना सोचे-समझे इस सुविधा का फायदा उठा लेते हैं। शुरुआत में छोटी-छोटी किश्तें बेहद हल्की और आकर्षक लगती हैं लेकिन जैसे-जैसे महीने बीतते हैं यही किश्तें एक भारी बोझ में बदल जाती हैं। एक के बाद एक EMI जुड़ती जाती हैं और एक दिन ऐसा आता है जब महीने की तनख्वाह खत्म होने से पहले ही किश्तें चुकाने में निकल जाती है और बचत के लिए कुछ नहीं बचता।

इस समस्या से बचने के लिए वित्त विशेषज्ञ एक बेहद सरल और कारगर फॉर्मूला अपनाने की सलाह देते हैं जिसे 2-6-10 नियम कहा जाता है। यह नियम आपको किसी भी EMI लेने से पहले यह समझने में मदद करता है कि वह किश्त आपकी आमदनी और बजट के हिसाब से सही है या नहीं। आइए इस नियम को विस्तार से और आसान भाषा में समझते हैं।

क्यों बन रहे हैं लोग कर्ज के जाल में फंसे?

आज के समय में भारत में क्रेडिट कार्ड और इंस्टेंट लोन की उपलब्धता इतनी आसान हो गई है कि लोग बिना सोचे-समझे इनका इस्तेमाल करने लगते हैं। एक मोबाइल फोन की EMI शुरू करते हैं फिर एक नई बाइक की किश्त जुड़ जाती है फिर कोई घरेलू उपकरण EMI पर आ जाता है। धीरे-धीरे हर महीने चार पांच अलग-अलग EMI चुकानी पड़ती हैं और जब तक होश आता है तब तक वेतन का आधे से ज्यादा हिस्सा किश्तों में जाने लगता है। इमरजेंसी के लिए पैसे नहीं बचते बच्चों की पढ़ाई या शादी के लिए बचत नहीं होती और सेवानिवृत्ति की योजना भी धरी की धरी रह जाती है। यही वजह है कि वित्त विशेषज्ञ 2-6-10 नियम का पालन करने की जोरदार सिफारिश करते हैं।

EMI Formula: 2 का मतलब – आधी तनख्वाह से सस्ता हो सामान

2-6-10 नियम का पहला और बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है अंक 2। इस नियम के मुताबिक जो भी चीज आप EMI पर खरीदना चाहते हैं उसकी कुल कीमत आपकी एक महीने की कमाई के आधे यानी 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपकी मासिक आय 60,000 रुपये है। तो आपको 30,000 रुपये से महंगा कोई भी उपकरण या गैजेट EMI पर नहीं लेना चाहिए। यह नियम विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप और टेलीविजन के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि इन चीजों का बाजार मूल्य बहुत तेजी से घटता है। एक साल के भीतर ही जो मोबाइल आपने 80,000 रुपये में खरीदा था उसकी कीमत बाजार में 40,000 रुपये रह जाती है। आप किश्त तो पुरानी कीमत पर चुकाते रहते हैं लेकिन सामान का मूल्य आधा हो जाता है। इसलिए ऐसे उत्पादों पर जरूरत से ज्यादा खर्च करना आर्थिक दृष्टि से कभी समझदारी नहीं होती।

6 का मतलब – किश्त की अवधि हो छह महीने से कम

इस नियम का दूसरा भाग है अंक 6 जो EMI की समयसीमा के बारे में बात करता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि किसी भी उपभोक्ता वस्तु के लिए ली जाने वाली EMI की अवधि अधिकतम छह महीने होनी चाहिए। इससे अधिक समय की किश्तें आपको लंबे समय तक एक ही कर्ज से जोड़े रखती हैं। जब आप 18 महीने या 24 महीने की EMI लेते हैं तो उसमें दो नुकसान होते हैं। पहला यह कि ब्याज बहुत अधिक लगता है और आप सामान की असली कीमत से कहीं ज्यादा चुकाते हैं। दूसरा यह कि लंबे समय तक एक किश्त चुकाने की वजह से आपकी मासिक बचत और खर्च की योजना बिगड़ती रहती है। छह महीने या उससे कम की किश्त लेने पर आप जल्दी कर्जमुक्त होते हैं और आने वाले महीनों में उस पैसे को बचत या निवेश में लगा सकते हैं।

EMI Formula: 10 का मतलब – कुल EMI हो वेतन के दस प्रतिशत से कम

यह इस पूरे नियम का सबसे अहम और निर्णायक हिस्सा है। 2-6-10 नियम के अंतिम भाग के अनुसार आपकी सभी EMI मिलाकर जो कुल मासिक किश्त बनती है वह आपकी मासिक आय के केवल 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर अगर आपकी महीने की तनख्वाह 50,000 रुपये है तो आपकी सभी EMI मिलाकर 5,000 रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। यह नियम इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे आपके घर का मासिक बजट संतुलित रहता है। खाने-पीने किराने राशन बिजली पानी बच्चों की पढ़ाई और इलाज जैसी जरूरी चीजों के लिए हमेशा पर्याप्त पैसा उपलब्ध रहता है। इसके अलावा हर महीने कुछ न कुछ बचत भी होती है जो आपकी आर्थिक सुरक्षा की नींव बनती है।

गृह ऋण के लिए अलग होता है नियम

यहां एक बात स्पष्ट कर देना जरूरी है कि 2-6-10 नियम मुख्य रूप से उपभोक्ता वस्तुओं और छोटे व्यक्तिगत लोन के लिए बना है। होम लोन यानी मकान के लिए लिए गए ऋण के मामले में यह नियम उस रूप में लागू नहीं होता क्योंकि घर एक ऐसी संपत्ति है जिसका मूल्य समय के साथ बढ़ता है और यह जीवन की एक मूलभूत जरूरत भी है। होम लोन के लिए वित्त विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि उसकी EMI आपकी कुल मासिक आय के 40 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।

EMI Formula: अनावश्यक कर्ज से बचने के लिए और जरूरी सुझाव

2-6-10 नियम के अलावा भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। EMI लेने से पहले हमेशा यह सोचें कि क्या यह सामान वाकई अभी जरूरी है या कुछ महीने इंतजार करके नकद में खरीदा जा सकता है। क्रेडिट कार्ड की EMI पर ब्याज दर बहुत ज्यादा होती है इसलिए इसका उपयोग बेहद सोच-समझकर करें। हर महीने अपनी सभी EMI की एक सूची बनाएं और देखें कि कहीं आप जरूरत से ज्यादा तो नहीं चुका रहे। एक इमरजेंसी फंड बनाएं जिसमें कम से कम तीन से छह महीने के खर्च के बराबर पैसा हमेशा जमा रहे।

याद रखें कि आर्थिक आजादी का सबसे बड़ा रहस्य यही है कि आप कमाई से कम खर्च करें और बचत को निवेश में बदलें। 2-6-10 नियम इसी आर्थिक आजादी की पहली और सबसे जरूरी सीढ़ी है।

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