बंगाल चुनाव से पहले चुनाव आयोग का डंडा! ज्ञानेश कुमार बोले, एक भी चूक और होगी सख्त कार्रवाई
CEC ज्ञानेश कुमार बोले, "कानून व्यवस्था में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं, नारकोटिक्स कमेटी न होने पर चिंता, हर उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई"
West Bengal elections: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं और चुनाव आयोग ने भी इस बार पहले से कहीं ज्यादा सख्त रवैया अपना लिया है। चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को कोलकाता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान राज्य प्रशासन को साफ और कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने में किसी भी स्तर पर कोई भी लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चुनाव आयोग की फुल बेंच ने राज्य में चुनावी तैयारियों की गहन समीक्षा की और कई अहम मुद्दों पर प्रशासनिक अधिकारियों से जवाब तलब किया।
West Bengal elections: चुनाव आयोग ने क्यों की यह बैठक
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग की यह समीक्षा बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। बंगाल का चुनाव हमेशा से देश के सबसे संवेदनशील और चर्चित चुनावों में रहा है। यहाँ राजनीतिक हिंसा, बूथ कैप्चरिंग और प्रशासनिक पक्षपात जैसे आरोप कई बार सामने आते रहे हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने इस बार चुनाव से काफी पहले ही मैदान में उतरने का फैसला किया है। चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आयोग की पूरी बेंच ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकर तैयारियों का जायजा लिया। बैठक में यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हों।
West Bengal elections: लॉ एंड ऑर्डर पर सीधा संदेश
ज्ञानेश कुमार ने बैठक में यह स्पष्ट कर दिया कि चुनावी माहौल में कानून व्यवस्था से समझौता किसी भी हाल में नहीं होगा। उन्होंने राज्य पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी राजनीतिक दल के दबाव में आकर कानून से समझौता न किया जाए। चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि अगर किसी अधिकारी पर यह साबित हुआ कि उसने जानबूझकर किसी एक पक्ष को फायदा पहुँचाने की कोशिश की तो उसके खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बंगाल में पिछले कई चुनावों में हिंसा की घटनाएँ सामने आती रही हैं। चुनाव आयोग ने इस बार पहले से यह संदेश दे दिया है कि हर बूथ पर केंद्रीय बल तैनात रहेंगे।
West Bengal elections: नारकोटिक्स एडवाइजरी कमेटी पर उठे सवाल
बैठक में एक और अहम मुद्दा उठाया गया और वह था राज्य में नारकोटिक्स एडवाइजरी कमेटी का न होना। चुनाव आयोग ने इस पर गहरी चिंता जताई। दरअसल, पश्चिम बंगाल में नशे की समस्या लगातार बढ़ रही है और यह माना जाता है कि चुनावों के दौरान नशे का इस्तेमाल मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए भी किया जाता है। ऐसे में नारकोटिक्स एडवाइजरी कमेटी का न होना एक बड़ी प्रशासनिक खामी मानी जा रही है। आयोग ने राज्य सरकार से इस पर जवाब माँगा है और यह सुनिश्चित करने को कहा है कि चुनाव से पहले इस कमी को दूर किया जाए। नशे के कारोबार पर लगाम लगाना चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखने के लिए भी जरूरी है।
West Bengal elections: बंगाल चुनाव में क्यों है इतनी सतर्कता
पश्चिम बंगाल भारत का एक ऐसा राज्य है जहाँ राजनीतिक प्रतिस्पर्धा हमेशा से बेहद तीखी रही है। तृणमूल कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और वामपंथी दल यहाँ सत्ता के लिए जोरदार संघर्ष करते हैं। पिछले कई चुनावों में हिंसा की खबरें आती रही हैं और विपक्षी दल हमेशा प्रशासनिक पक्षपात के आरोप लगाते रहे हैं। इस बार चुनाव आयोग ने तय किया है कि यह चुनाव देश के सबसे पारदर्शी और निष्पक्ष चुनावों में से एक होगा। चीफ इलेक्शन कमिश्नर का यह दौरा और इस बैठक का संदेश साफ है कि आयोग इस बार किसी भी दल को कोई छूट देने के मूड में नहीं है। हर उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई होगी।
West Bengal elections: चुनाव आयोग की सक्रियता और आगामी योजना
चुनाव आयोग की इस बैठक के बाद राज्य में प्रशासनिक हलचल बढ़ गई है। अधिकारी अब चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं और सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर भी योजना बनाई जा रही है। आने वाले हफ्तों में चुनाव आयोग राज्य के अलग-अलग जिलों का दौरा कर सकता है ताकि जमीनी हकीकत का पता चल सके। बंगाल के मतदाताओं के लिए यह संदेश उम्मीद की किरण है कि इस बार उनका वोट सुरक्षित रहेगा और किसी भी तरह के डर या दबाव के बिना वे अपना लोकतांत्रिक अधिकार इस्तेमाल कर सकेंगे। चुनाव आयोग की यह सक्रियता लोकतंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
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