असम, केरल और पुदुचेरी में आज थम जाएगा चुनाव प्रचार: 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान, दिग्गज नेताओं ने झोंकी पूरी ताकत, लोकतंत्र के महापर्व का नया चरण शुरू
असम, केरल और पुदुचेरी विधानसभा चुनाव 2026 के लिए प्रचार आज शाम 6 बजे थम जाएगा, 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान, प्रधानमंत्री मोदी, राहुल गांधी समेत दिग्गज नेताओं ने पूरी ताकत झोंकी
Assembly Election 2026: लोकतंत्र के महापर्व में एक और महत्वपूर्ण चरण शुरू होने जा रहा है। असम, केरल और पुदुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान आज शाम 6 बजे थम जाएगा। इन तीनों राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई दिग्गज नेताओं ने इन क्षेत्रों में रैलियां और रोड शो कर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
9 अप्रैल को मतदान: तीनों जगहों पर एक साथ वोटिंग
चुनाव आयोग के अनुसार, असम की 126 विधानसभा सीटों, केरल की 140 सीटों और पुदुचेरी की 30 सीटों पर 9 अप्रैल को मतदान होगा। असम में लगभग 2.5 करोड़ से अधिक मतदाता, केरल में करीब 2.71 करोड़ तथा पुदुचेरी में लगभग 9.44 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगा। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती के साथ-साथ राज्य पुलिस भी सतर्क रहेगी।
केरल में त्रिकोणीय मुकाबला: एलडीएफ, यूडीएफ और एनडीए की तैयारी
केरल की राजनीति लंबे समय से लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के बीच घूमती रही है।
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एलडीएफ: मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में दोबारा सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहा है।
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यूडीएफ: कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन विपक्षी भूमिका में मजबूत चुनौती पेश कर रहा है।
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एनडीए: भाजपा नीत एनडीए भी केरल में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश में जुटा है।
केरल में कुल 890 उम्मीदवार मैदान में हैं। यहां शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं, बाढ़ प्रबंधन और युवा बेरोजगारी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
Assembly Election 2026: असम में भाजपा की सत्ता बचाने की चुनौती
असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली भाजपा गठबंधन दोबारा सरकार बनाने की कोशिश में है। प्रधानमंत्री मोदी ने असम में कई रैलियों को संबोधित किया और राष्ट्रीय सुरक्षा, CAA तथा स्थानीय विकास पर जोर दिया। असम की 126 सीटों पर मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा गठबंधन बनाम कांग्रेस गठबंधन के बीच माना जा रहा है। प्रचार के दौरान स्थानीय मुद्दों जैसे चाय बागान मजदूरों की स्थिति, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्वास और युवाओं के लिए रोजगार प्रमुख रहे।
Assembly Election 2026: पुदुचेरी में छोटी लेकिन दिलचस्प लड़ाई
पुदुचेरी विधानसभा की केवल 30 सीटें हैं, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में इसका महत्व कम नहीं है। यहां एनडीए (एआईएनआरसी और भाजपा) तथा इंडिया गठबंधन (कांग्रेस और डीएमके) के बीच मुख्य मुकाबला है। पुदुचेरी में पर्यटन, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। छोटे राज्य होने के कारण हर वोट की अहमियत है और गठबंधनों की रणनीति निर्णायक साबित हो सकती है।
Assembly Election 2026: अन्य राज्यों में नामांकन प्रक्रिया जारी
आज तमिलनाडु की सभी 234 सीटों और पश्चिम बंगाल के पहले चरण की 152 सीटों के लिए नामांकन पत्रों की जांच हो रही है। तमिलनाडु में मतदान 23 अप्रैल को होगा, जबकि पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग भी 23 अप्रैल को और दूसरे चरण की 29 अप्रैल को होगी। सभी जगहों पर मतगणना 4 मई को एक साथ होगी।
Assembly Election 2026: चुनावी मुद्दे और मतदाताओं की चिंताएं
इन चुनावों में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय मुद्दे भी प्रभाव डाल रहे हैं। असम में सीमा सुरक्षा और CAA का असर, केरल में सांप्रदायिक सद्भाव और कल्याणकारी योजनाएं तथा पुदुचेरी में केंद्र-राज्य संबंध प्रमुख रहे। युवा मतदाता रोजगार और शिक्षा पर फोकस कर रहे हैं, जबकि महिलाएं सुरक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं को लेकर सतर्क हैं।
Assembly Election 2026: प्रचार अभियान का अंत और सुरक्षा व्यवस्था
आज प्रचार थमने के बाद पार्टियां अब मतदाताओं से सीधा संपर्क (डोर-टू-डोर) साधेंगी। चुनाव आयोग ने तीनों जगहों पर पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात करने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील बूथों पर विशेष नजर रखी जाएगी और वीडियोग्राफी से पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। नेताओं ने अंतिम रैलियों में मतदाताओं से बड़ी संख्या में वोट डालने की अपील की है।
निष्कर्ष: लोकतंत्र का उत्सव
असम, केरल और पुदुचेरी के चुनाव भारतीय लोकतंत्र की विविधता को दर्शाते हैं। 9 अप्रैल को होने वाला मतदान निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरा करने के लिए चुनाव आयोग पूरी तरह तैयार है। 4 मई को आने वाले परिणाम न केवल इन राज्यों का भविष्य तय करेंगे, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी गहरा असर डालेंगे। यह लोकतंत्र की जीत होगी।
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