‘नरवणे झूठ बोल रहे हैं या पेंगुइन’ FIR पर राहुल गांधी का बड़ा बयान, पूर्व आर्मी चीफ के ट्वीट से दिया सबूत, दिल्ली पुलिस कर रही जांच
राहुल गांधी ने जनरल नरवणे का 2023 ट्वीट दिखाया, कहा किताब प्रकाशित है, पेंगुइन पर कम भरोसा, दिल्ली पुलिस जांच में
Rahul Gandhi: पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक के कथित प्रसारण को लेकर दर्ज एफआईआर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। राहुल गांधी ने मीडिया को संबोधित करते हुए पूर्व आर्मी चीफ का 15 दिसंबर 2023 का एक पुराना ट्वीट दिखाया और दावा किया कि जनरल नरवणे की किताब पहले ही प्रकाशित हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि या तो जनरल नरवणे झूठ बोल रहे हैं या फिर पेंगुइन पब्लिशर्स, और उन्हें पूर्व सेना प्रमुख पर ज्यादा भरोसा है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने किताब की अप्रकाशित प्रति के कथित प्रसारण की जांच के लिए मामला दर्ज किया। राहुल गांधी का आरोप है कि सरकार इस मामले को इसलिए उठा रही है क्योंकि किताब में प्रधानमंत्री के लिए असुविधाजनक तथ्य हैं।
Rahul Gandhi: राहुल गांधी ने दिखाया जनरल नरवणे का पुराना ट्वीट
राहुल गांधी ने मीडिया के सामने अपने स्मार्टफोन पर जनरल मनोज नरवणे का 15 दिसंबर 2023 का ट्वीट दिखाया। इस ट्वीट में जनरल नरवणे ने लिखा था – “दोस्तों, मेरी किताब अब उपलब्ध है। बस इस लिंक को फॉलो करें।” यह ट्वीट रात 8 बजकर 10 मिनट पर किया गया था।
इसके साथ ही जनरल नरवणे ने पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के एक ट्वीट को भी रीट्वीट किया था। पेंगुइन के उस ट्वीट में कहा गया था कि किताब को प्री-ऑर्डर किया जा सकता है। राहुल गांधी ने यह दावा करते हुए कहा कि अगर किताब प्रकाशित नहीं हुई है तो जनरल नरवणे ने ऐसा ट्वीट क्यों किया।
Rahul Gandhi: ‘मुझे नरवणे पर भरोसा, पेंगुइन पर नहीं’
राहुल गांधी ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें पेंगुइन की तुलना में जनरल नरवणे पर अधिक भरोसा है। उन्होंने कहा:
“मैं जो कहना चाह रहा हूं वह यह है – या तो मिस्टर नरवणे झूठ बोल रहे हैं या पेंगुइन झूठ बोल रहा है। मुझे नहीं लगता कि पूर्व आर्मी चीफ झूठ बोलेंगे। पेंगुइन का कहना है कि किताब प्रकाशित नहीं हुई है। लेकिन किताब अमेजन पर उपलब्ध है। जनरल नरवणे ने ट्वीट किया है कि कृपया 2023 में मेरी किताब खरीदें। मुझे पेंगुइन से ज्यादा नरवणे जी पर भरोसा है।”
उन्होंने पत्रकारों से सवाल करते हुए कहा, “क्या आपको नरवणे जी से ज्यादा पेंगुइन पर भरोसा है? जाहिर है, आपको तय करना होगा कि पेंगुइन सच बोल रहा है या पूर्व आर्मी चीफ।”
Rahul Gandhi: सरकार पर असुविधाजनक तथ्य होने का आरोप
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि जनरल नरवणे ने अपनी किताब में कुछ ऐसी बातें लिखी हैं जो भारत सरकार और प्रधानमंत्री के लिए असुविधाजनक हैं। इसीलिए सरकार इस मामले में एफआईआर दर्ज करवा रही है। राहुल गांधी ने कहा:
“मुझे लगता है कि नरवणे जी ने अपनी किताब में कुछ ऐसी बातें कही हैं जो भारत सरकार और भारत के प्रधानमंत्री के लिए असुविधाजनक हैं।”
यह टिप्पणी संकेत देती है कि किताब में शायद चीन सीमा विवाद या अन्य संवेदनशील मुद्दों पर ऐसी जानकारियां हो सकती हैं जो सरकार की छवि को प्रभावित कर सकती हैं।
Rahul Gandhi: पेंगुइन इंडिया की सफाई
इस पूरे विवाद के बीच पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने एक आधिकारिक बयान जारी किया। कंपनी ने स्पष्ट किया कि उसके पास पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की पुस्तक ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के प्रकाशन अधिकार हैं। पब्लिशर ने कहा कि किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है। कंपनी के बयान में कहा गया:
“किताब अभी तक पब्लिश नहीं हुई है और इसकी कोई भी कॉपी, प्रिंट या डिजिटल, पब्लिश, बांटी, बेची या पब्लिक के लिए उपलब्ध नहीं कराई गई है।”
यह बयान राहुल गांधी के दावों के बिल्कुल विपरीत है। अगर पेंगुइन का बयान सही है तो सवाल उठता है कि जनरल नरवणे ने 2023 में किताब उपलब्ध होने का ट्वीट क्यों किया था।
Rahul Gandhi: दिल्ली पुलिस की जांच
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और न्यूज फोरम पर मिली जानकारी का संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया है। इन प्लेटफॉर्म पर दावा किया जा रहा था कि किताब की प्री-प्रिंट कॉपी साझा की जा रही है।
पुलिस ने “अभी तक स्वीकृत नहीं हुए प्रकाशन के कथित लीक या उल्लंघन” का मामला दर्ज किया है। स्पेशल सेल अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या वाकई किताब की प्री-प्रिंट कॉपी किसी को मिली है और अगर हां तो किसे और कैसे। यह जांच महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर किताब में संवेदनशील सैन्य या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी है तो उसका असामयिक प्रसारण गंभीर मामला हो सकता है।
Rahul Gandhi: राजनीतिक घमासान और अनुत्तरित सवाल
इस पूरे मामले ने राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार उन तथ्यों को दबाना चाहती है जो उसके लिए असुविधाजनक हैं। दूसरी ओर सरकार समर्थकों का कहना है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है।
इस विवाद में कई सवाल अनुत्तरित हैं:
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अगर किताब 2023 में ही प्रकाशित हो गई थी जैसा कि जनरल नरवणे के ट्वीट से लगता है, तो पेंगुइन अब क्यों कह रहा है कि किताब अप्रकाशित है?
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क्या किताब को बाद में किसी कारण से वापस ले लिया गया?
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किताब में ऐसा क्या है जो इतना विवादास्पद है?
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