Economic Survey 2026: इकॉनोमिक सर्वे में महंगाई से लेकर रुपये की चाल तक, जानें इसकी 5 बड़ी बातें
राजकोषीय घाटा 4.4% पर, महंगाई 1.7%, कृषि रिकॉर्ड उत्पादन, रुपये कमजोर; 5 बड़ी बातें
Economic Survey 2026: यूनियन बजट से ठीक पहले देश की आर्थिक सेहत का रोडमैप माने जाने वाला इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 गुरुवार को संसद में पेश कर दिया गया। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में यह महत्वपूर्ण दस्तावेज रखा। इस सर्वे में साफ किया गया है कि भारत अब केवल स्वदेशी सोच तक सीमित नहीं है बल्कि बदलते वैश्विक हालात में अर्थव्यवस्था को एक रणनीतिक अनिवार्यता के तौर पर आगे बढ़ाने की तैयारी में है। महंगाई, राजकोषीय घाटा, रुपये की चाल से लेकर कृषि उत्पादन तक इस सर्वे ने कई अहम संकेत दिए हैं जो आने वाले बजट और नीति फैसलों की दिशा तय कर सकते हैं।
राजकोषीय अनुशासन पर सरकार का जोर
आर्थिक सर्वे के अनुसार सरकार ने राजकोषीय घाटे को काबू में रखने में सफलता हासिल की है। वित्त वर्ष 2025 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का 4.8 प्रतिशत रहा। यह बजट अनुमान 4.9 प्रतिशत से बेहतर है। वहीं वित्त वर्ष 2026 में इसे घटाकर 4.4 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य तय किया गया है। यह स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रही है। राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखना किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी होता है क्योंकि यह सरकार की वित्तीय स्थिति को दर्शाता है।
राजकोषीय घाटा क्या है?

राजकोषीय घाटा सरकार की कुल आय और कुल खर्च के बीच का अंतर होता है। जब सरकार का खर्च उसकी आय से अधिक होता है तो यह अंतर राजकोषीय घाटे के रूप में सामने आता है। इसे पूरा करने के लिए सरकार को कर्ज लेना पड़ता है। अगर यह घाटा लगातार बढ़ता रहे तो देश का कर्ज बढ़ जाता है। इसलिए इसे नियंत्रित रखना जरूरी है। सरकार ने इस दिशा में सकारात्मक प्रगति की है।
Economic Survey 2026: महंगाई पर बड़ी राहत
महंगाई के मोर्चे पर इकोनॉमिक सर्वे ने राहत की खबर दी है। अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान हेडलाइन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई महंगाई घटकर 1.7 प्रतिशत पर आ गई। यह आम आदमी के लिए अच्छी खबर है। सब्जियों और दालों की कीमतों में गिरावट इसका प्रमुख कारण रही। कोर महंगाई भी नियंत्रण में बताई गई है। हालांकि कीमती धातुओं की कीमतों का हल्का असर अब भी बना हुआ है। समग्र रूप से महंगाई की दर कम होना सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
महंगाई कम होने के फायदे
महंगाई कम होने से आम जनता की क्रय शक्ति बढ़ती है। लोग अपनी आय से ज्यादा चीजें खरीद सकते हैं। घरेलू बजट पर दबाव कम होता है। खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए यह बड़ी राहत है। खाद्य पदार्थों की कीमतें कम होने से परिवारों का खर्च कम होता है। यह आर्थिक स्थिरता के लिए भी अच्छा संकेत है। आरबीआई की मौद्रिक नीति को भी इससे मदद मिलती है।
Economic Survey 2026: 2026 के लिए तीन वैश्विक परिदृश्य
इकोनॉमिक सर्वे ने आने वाले समय के लिए तीन संभावित वैश्विक परिदृश्य प्रस्तुत किए हैं। पहला परिदृश्य यह है कि हालात नियंत्रित रहते हुए भी अस्थिरता बनी रह सकती है। दूसरा यह कि बड़े देशों के बीच टकराव से वैश्विक व्यवस्था बिखर सकती है। तीसरा परिदृश्य यह है कि लगातार एक के बाद एक बड़े आर्थिक झटके लग सकते हैं। ऐसे में सर्वे का कहना है कि भारत को इन अनिश्चित हालात से सुरक्षित रहने के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना होगा। इससे किसी भी वैश्विक संकट का असर देश पर कम पड़ेगा।
वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने की तैयारी
वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियां मौजूद हैं। अमेरिका में नीतिगत बदलाव, चीन की अर्थव्यवस्था में मंदी, यूरोप में आर्थिक समस्याएं और भू-राजनीतिक तनाव जैसी स्थितियां हैं। इन सभी का असर भारत पर भी पड़ सकता है। इसलिए देश को आत्मनिर्भर बनाना और अर्थव्यवस्था को लचीला बनाना जरूरी है। घरेलू मांग बढ़ाना, विनिर्माण को मजबूत करना और निर्यात बढ़ाना जरूरी है। सर्वे में इन पहलुओं पर जोर दिया गया है।
Economic Survey 2026: रुपये की कमजोरी पर चिंता
सर्वे में स्वीकार किया गया है कि 2025 में भारतीय रुपया उम्मीद से कमजोर रहा और अपनी क्षमता से नीचे कारोबार करता दिखा। डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट आई। हालांकि सर्वे में यह भी कहा गया है कि कमजोर रुपया अमेरिकी टैरिफ जैसे बाहरी दबावों के असर को कुछ हद तक कम करने में मददगार साबित हो सकता है। कमजोर रुपये से निर्यात को बढ़ावा मिलता है क्योंकि भारतीय उत्पाद विदेशी बाजारों में सस्ते हो जाते हैं।
रुपये की चाल का प्रभाव
रुपये की कमजोरी के कुछ नकारात्मक प्रभाव भी होते हैं। आयात महंगा हो जाता है। तेल और दूसरी आवश्यक वस्तुओं की कीमत बढ़ती है। विदेश यात्रा महंगी हो जाती है। विदेशी कर्ज का बोझ बढ़ता है। लेकिन निर्यात बढ़ने से व्यापार घाटा कम करने में मदद मिलती है। आरबीआई रुपये की चाल पर नजर रखता है और जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप करता है।
Economic Survey 2026: कृषि क्षेत्र से सकारात्मक संकेत
कृषि क्षेत्र ने बेहतर प्रदर्शन किया है। वर्ष 2024-25 में अनाज उत्पादन रिकॉर्ड 3320 लाख टन तक पहुंच गया। यह एक बड़ी उपलब्धि है। रबी की बुवाई में 3.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आय के लिहाज से अच्छे संकेत हैं। अच्छे मानसून और सरकारी योजनाओं ने कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद की है। किसानों की आय बढ़ी है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है।
किसानों के लिए राहत
रिकॉर्ड अनाज उत्पादन से किसानों को फायदा हुआ है। अच्छी फसल से उनकी आय बढ़ी है। सरकार की न्यूनतम समर्थन मूल्य नीति ने भी मदद की है। दालों और तिलहन के उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। यह आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम है। कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की जरूरत है ताकि यह प्रगति जारी रहे। सिंचाई सुविधाओं में सुधार, बीज और उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।
Economic Survey 2026: आर्थिक विकास दर की उम्मीद
सर्वे में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत से अधिक रहने का विश्वास जताया गया है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। घरेलू मांग मजबूत है। निवेश बढ़ रहा है। सेवा क्षेत्र अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। विनिर्माण में भी सुधार के संकेत हैं। यह सब मिलकर आर्थिक विकास को गति दे रहे हैं।
रोजगार सृजन पर ध्यान
आर्थिक विकास के साथ रोजगार सृजन भी जरूरी है। सर्वे में इस पहलू को भी छुआ गया है। नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं। स्टार्टअप इकोसिस्टम फल फूल रहा है। कौशल विकास कार्यक्रमों से युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। हालांकि अभी और प्रयास करने की जरूरत है। शिक्षा और कौशल विकास में निवेश बढ़ाना होगा।
Economic Survey 2026: निष्कर्ष
इकोनॉमिक सर्वे 2026 ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाया है। महंगाई पर काबू, राजकोषीय अनुशासन और कृषि क्षेत्र का अच्छा प्रदर्शन सकारात्मक संकेत हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। हालांकि रुपये की कमजोरी जैसी चुनौतियां भी हैं। अब सभी की नजरें कल पेश होने वाले बजट पर हैं जो इन संकेतों के आधार पर नीतिगत कदम उठाएगा।
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