संसद में भूचाल! ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर गोगोई का तूफानी भाषण, माइक वाले बयान से मच गई खलबली
ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर गौरव गोगोई बोले "माइक विपक्ष के खिलाफ हथियार", CJI ने फटकार लगाई, अवमानना नोटिस की चेतावनी
Lok Sabha Budget Session 2026: संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू होते ही लोकसभा में ऐसा तूफान उठा जिसने पूरे सियासी माहौल को गरमा दिया। विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर एक बड़ा कदम उठाया और इस पर हुई बहस में कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद गौरव गोगोई ने ऐसे तीखे तेवर दिखाए कि सदन का पूरा माहौल बदल गया। गोगोई ने माइक को विपक्ष के खिलाफ हथियार बताते हुए जो बातें कहीं उसने सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त नोकझोंक को जन्म दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने संसदीय लोकतंत्र और सदन की गरिमा से जुड़े बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
Lok Sabha Budget Session 2026: किसने लाया अविश्वास प्रस्ताव और क्यों
लोकसभा में यह अविश्वास प्रस्ताव कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद द्वारा पेश किया गया। विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सदन का संचालन निष्पक्ष तरीके से नहीं कर रहे हैं और विपक्षी सांसदों को बोलने के उचित मौके नहीं दिए जा रहे। विपक्ष का कहना है कि यह कदम किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि संसदीय परंपराओं और संविधान की मर्यादा की रक्षा के लिए उठाया गया है। इस प्रस्ताव पर बहस शुरू होते ही कांग्रेस के उपनेता और असम से सांसद गौरव गोगोई ने मोर्चा संभाला और सदन में एक के बाद एक ऐसे तथ्य रखे जिन्होंने पूरी सत्तापक्ष की पंक्तियों में हलचल मचा दी।
Lok Sabha Budget Session 2026: माइक बना हथियार, गोगोई का बड़ा आरोप
गौरव गोगोई के भाषण का सबसे ज्यादा चर्चित हिस्सा वह था जब उन्होंने माइक को विपक्ष के खिलाफ एक अस्त्र की तरह इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब भी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी या अन्य विपक्षी सांसद कोई अहम और जनहित का मुद्दा उठाना चाहते हैं तो उन्हें बीच में ही रोक दिया जाता है और उनके माइक बंद कर दिए जाते हैं। गोगोई ने तर्क दिया कि एक स्वस्थ लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज को दबाना न केवल असंवैधानिक है बल्कि यह जनता के अधिकारों का हनन भी है। उन्होंने कहा कि देश की जनता को यह जानने का हक है कि सदन में क्या हो रहा है और किस तरह से संविधान और सदन की मर्यादा का उल्लंघन किया जा रहा है।
Lok Sabha Budget Session 2026: विपक्ष की मजबूरी और धर्म की दुहाई
गौरव गोगोई ने अपने भाषण में एक भावुक पल भी जोड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अविश्वास प्रस्ताव को लाने में विपक्ष को कोई खुशी नहीं है। उनका कहना था कि यह कोई राजनीतिक हमला नहीं है बल्कि संसदीय जिम्मेदारी का निर्वाह है। उन्होंने कहा कि सदन में जनता का विश्वास कायम रखने के लिए विपक्ष को इस धर्म का पालन करना पड़ रहा है। इस बयान पर सत्तापक्ष के सांसदों ने जोरदार आपत्ति जताई और शोर-शराबा शुरू कर दिया। लेकिन गोगोई ने बिना विचलित हुए अपनी बात जारी रखी और एक के बाद एक उदाहरण पेश करते रहे।
Lok Sabha Budget Session 2026: फरवरी की घटना का जिक्र, 20 बार व्यवधान का दावा
गोगोई ने अपने भाषण में फरवरी महीने की एक विशेष घटना का भी विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बोलने के लिए खड़े हुए तो उनके भाषण में जानबूझकर 20 बार व्यवधान पैदा किए गए। गोगोई ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का खुला उल्लंघन बताया। इसके अलावा गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि रीजीजू संसदीय इतिहास में सबसे ज्यादा व्यवधान पैदा करने वाले संसदीय कार्य मंत्री के रूप में दर्ज होंगे।
Lok Sabha Budget Session 2026: अमित शाह ने किया पलटवार
गृह मंत्री अमित शाह ने गोगोई के भाषण पर तुरंत पलटवार किया। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि वे इस बात से सहमत हैं कि रीजीजू ने व्यवधान पैदा किया, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कह दिया कि देश के इतिहास में इससे ज्यादा गैर-जिम्मेदार और अराजक विपक्ष कभी नहीं देखा गया। शाह के इस बयान पर सत्तापक्ष की बेंचों से जोरदार मेजें थपथपाई गईं जबकि विपक्ष ने इस पर कड़ा विरोध जताया। दोनों पक्षों के बीच यह नोकझोंक काफी देर तक चलती रही और सदन में कई बार व्यवधान की स्थिति उत्पन्न हुई।
Lok Sabha Budget Session 2026: सीमा सुरक्षा और व्यापार समझौते पर भी उठाए सवाल
गोगोई ने अपने भाषण को केवल सदन की कार्यवाही तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के संवेदनशील मुद्दों को भी सदन के पटल पर रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सीमा पर पड़ोसी देश के टैंक आ रहे थे तब देश का नेतृत्व कमजोर साबित हुआ और इस गंभीर विषय पर संसद में खुलकर चर्चा नहीं होने दी गई। इसके अलावा उन्होंने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते का मुद्दा भी उठाया और कहा कि राहुल गांधी ने इस विषय पर जो सवाल उठाए थे वे बेहद जायज थे। गोगोई ने कहा कि जब नेता प्रतिपक्ष अपने दावों को तथ्यों के आधार पर सत्यापित करने के लिए तैयार थे तब भी उन्हें बोलने से रोका गया।
Lok Sabha Budget Session 2026: संसदीय गरिमा की रक्षा का सवाल
इस पूरे विवाद के केंद्र में एक बड़ा सवाल है और वह है संसदीय गरिमा और विपक्ष के अधिकारों का। लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सरकार पर निगरानी रखने और जनता की आवाज को सदन में उठाने की होती है। अगर विपक्ष को ही बोलने का मौका न मिले तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक चिंताजनक संकेत है। दूसरी तरफ सत्तापक्ष का तर्क है कि विपक्ष खुद ही सदन में व्यवधान पैदा करता है और फिर बोलने न देने का आरोप लगाता है। यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत हैं क्योंकि बजट सत्र का यह दूसरा चरण कई अहम मुद्दों पर बहस के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
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