ट्रंप ईरान को मिटाना चाहते हैं या डील करना? जंग के दूसरे हफ्ते में सच सामने आया — रिजीम चेंज फेल, IRGC से सौदा, कुर्द विद्रोह, परमाणु धमकी, जमीनी सेना,- सब विकल्प मेज पर, लेकिन कोई ठोस जीत नहीं!

जंग के दूसरे हफ्ते में ट्रंप का असली मकसद सामने आया — रिजीम चेंज फेल, IRGC से सौदा, कुर्द विद्रोह, परमाणु धमकी, जमीनी सेना — कोई भी रास्ता आसान नहीं

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Donald Trump Iran policy: अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई को ईरान के खिलाफ शुरू हुए दो हफ्ते हो चुके हैं, लेकिन वाशिंगटन अभी तक यह तय नहीं कर पाया कि इस युद्ध का असली मकसद क्या है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हर दिन नया बयान देते हैं। कभी रिजीम चेंज की बात करते हैं, तो कभी कहते हैं कि ईरान के नेता खुद आकर सौदा कर लें। मिडिल ईस्ट के जानकारों का कहना है कि ट्रंप की यह अनिश्चितता ईरान को कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत बना रही है।

Donald Trump Iran policy: रिजीम चेंज का प्लान क्यों फेल हुआ

ट्रंप प्रशासन का सबसे पहला और सबसे बड़ा दांव था कि ईरान की मौजूदा सरकार को पलट दिया जाए। इस योजना के तहत तेहरान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए गए। इन हमलों में 20 से ज्यादा ठिकाने निशाने पर लिए गए। लेकिन जो नतीजा अमेरिका चाहता था, वो नहीं मिला। मिडिल ईस्ट मामलों के जानकारों के मुताबिक, रिजीम चेंज की यह कोशिश उसी वक्त नाकाम हो गई जब ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने अपने बेटे मोजतबा खामेनेई को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। इसका सीधा मतलब था कि सत्ता की कमान परिवार के हाथ में सुरक्षित कर ली गई है। यह कदम यह भी साफ करता है कि ईरान का नेतृत्व बाहरी दबाव में टूटने वाला नहीं है।

Donald Trump Iran policy: IRGC से सौदे की कोशिश, लेकिन रास्ता आसान नहीं

रिजीम चेंज के फेल होने के बाद ट्रंप टीम ने एक और रास्ता अपनाया। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के कुछ अधिकारियों से पर्दे के पीछे संपर्क साधने की कोशिश की गई। मकसद था कि सेना का एक हिस्सा खामेनेई के खिलाफ हो जाए और अंदर से सत्ता परिवर्तन हो जाए। लेकिन विशेषज्ञ इस विकल्प को भी ज्यादा भरोसेमंद नहीं मानते। IRGC सिर्फ एक सेना नहीं है, यह एक विचारधारा है। इसके अधिकारी आर्थिक रूप से ईरानी सत्ता व्यवस्था से इतने जुड़े हैं कि उनका पाला बदलना लगभग असंभव माना जाता है।

Donald Trump Iran policy: कुर्द विद्रोह को हवा देने की रणनीति

एक और विकल्प जो अमेरिकी रणनीतिकारों की मेज पर है, वो है ईरान के अंदर कुर्द विद्रोह को भड़काना। ईरान में कुर्द अल्पसंख्यक आबादी का एक बड़ा हिस्सा है जो वर्षों से स्वायत्तता की मांग करता रहा है। अमेरिका इस असंतोष को भुनाकर ईरान को अंदर से अस्थिर करना चाहता है। हालांकि यह रणनीति भी जोखिम भरी है। अगर कुर्द विद्रोह बड़ा रूप लेता है तो इसकी आंच इराक, सीरिया और तुर्की तक पहुंच सकती है। यह पूरे क्षेत्र को एक नई अस्थिरता में धकेल सकता है, जो अमेरिका के सहयोगियों के लिए भी नुकसानदेह होगा।

Donald Trump Iran policy: न्यूक्लियर विकल्प की धमकी, असलियत क्या है

ट्रंप ने हाल ही में यह भी संकेत दिया कि ईरान एक नई जगह परमाणु हथियार बनाने की साइट तैयार कर रहा था। इसी को आधार बनाकर परमाणु हमले की संभावना को हवा दी जा रही है। लेकिन ज्यादातर विशेषज्ञ इसे असल प्लान नहीं बल्कि दबाव बनाने की कूटनीतिक चाल मानते हैं। परमाणु हमले के नतीजे इतने विनाशकारी होंगे कि खुद अमेरिकी सहयोगी देश इसकी इजाजत नहीं देंगे। यूरोप और खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया इतनी तीखी होगी कि ट्रंप के लिए राजनीतिक रूप से यह कदम उठाना लगभग असंभव है।

Donald Trump Iran policy: जमीन पर सैनिक भेजने का विकल्प भी मेज पर

कुछ अमेरिकी रक्षा सलाहकार ग्राउंड ट्रूप्स यानी जमीनी सेना भेजने पर भी विचार कर रहे हैं। लेकिन इराक और अफगानिस्तान के कड़वे अनुभवों के बाद अमेरिकी जनता इस विकल्प के सख्त खिलाफ है। ट्रंप खुद भी चुनावी वादों के तहत अमेरिकी सैनिकों को विदेशी युद्धों से दूर रखने की बात करते रहे हैं। ऐसे में यह विकल्प अभी केवल कागजों पर है।

Donald Trump Iran policy: इजरायल का बड़ा मकसद, मिडिल ईस्ट को नया रूप देना

विशेषज्ञों की नजर में इस पूरे संघर्ष के पीछे इजरायल की एक बड़ी रणनीतिक महत्वाकांक्षा काम कर रही है। इजरायल सिर्फ ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म नहीं करना चाहता, बल्कि वो पूरे मिडिल ईस्ट के ताकत संतुलन को नए सिरे से लिखना चाहता है। ईरान को कमजोर करने से हिजबुल्लाह और हमास जैसे संगठनों की ताकत भी खत्म होगी। इससे इजरायल अपने पड़ोसी देशों के साथ नए राजनयिक संबंध बना सकता है। यह अब्राहम एकॉर्ड्स की परियोजना का ही विस्तार माना रहा है।

Donald Trump Iran policy: सबसे संभावित रास्ता क्या है

मिडिल ईस्ट के जानकार इस वक्त एक बात पर एकमत हैं कि ट्रंप का सबसे संभावित एंडगेम जबरदस्ती का सौदा यानी कोर्स्ड डील है। इसमें ईरान पर इतना सैन्य और आर्थिक दबाव बनाया जाए कि वो परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करने और क्षेत्रीय प्रभाव घटाने पर राजी हो जाए। लेकिन यह रास्ता भी सरल नहीं है। ईरान अभी मजबूत स्थिति में खड़ा है। बहरीन की राजधानी मनामा में उसने हमला करके यह संदेश दे दिया है कि वो चुप बैठने वाला नहीं है। युद्ध के दूसरे हफ्ते में भी हजारों लोग मारे जा चुके हैं और कोई स्पष्ट जीत किसी के हाथ नहीं लगी।

निष्कर्ष

ट्रंप के पास फिलहाल कोई एक ठोस योजना नहीं है। वो एक साथ कई दांव खेल रहे हैं। रिजीम चेंज, IRGC से सौदा, कुर्द विद्रोह, परमाणु धमकी और जमीनी सेना, इनमें से कोई भी अकेला काम नहीं आ रहा। और जब तक वाशिंगटन कोई एक रणनीति नहीं चुनता, तब तक मिडिल ईस्ट में यह आग और भड़कती रहेगी।

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