Direct Tax Collection 2025-26: सरकारी खजाने में जबरदस्त भरोसा, 10 फरवरी तक नेट डायरेक्ट टैक्स वसूली 19.44 लाख करोड़ के पार, कॉर्पोरेट टैक्स में भी दमदार बढ़त

नेट संग्रह में 9.4% बढ़ोतरी, कॉर्पोरेट टैक्स 14.51% उछाल के साथ 8.90 लाख करोड़; लक्ष्य 24.84 लाख करोड़

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Direct Tax: देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती का एक और सबूत सामने आया है। आयकर विभाग ने बुधवार को जो ताजा आंकड़े पेश किए हैं, उनके मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 10 फरवरी तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह यानी नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 19.44 लाख करोड़ रुपये की ऊंचाई तक जा पहुंचा है। पिछले साल की इसी अवधि से तुलना करें तो इसमें 9.4 फीसदी की ठोस बढ़ोतरी दर्ज हुई है। ये तमाम आंकड़े बता रहे हैं कि भारत में कर अनुपालन की संस्कृति तेजी से बदल रही है, करदाताओं की संख्या बढ़ रही है और सरकार की राजस्व मशीनरी पहले से कहीं अधिक प्रभावी ढंग से काम कर रही है। वित्त वर्ष की समाप्ति में अभी करीब डेढ़ महीना शेष है और विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च तक ये आंकड़े और भी ऊपर जा सकते हैं।

कॉर्पोरेट टैक्स से आई राजस्व में भारी उछाल

इस बार के टैक्स कलेक्शन डेटा में सबसे उत्साहजनक पहलू कॉर्पोरेट सेक्टर से हुई वसूली का है। आयकर विभाग के मुताबिक 10 फरवरी तक शुद्ध कॉर्पोरेट टैक्स का संग्रह 14.51 फीसदी की दमदार बढ़त के साथ 8.90 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारतीय कंपनियों का मुनाफा बढ़ रहा है और कारोबारी माहौल में सकारात्मक गतिविधियां जारी हैं।

कॉर्पोरेट टैक्स में इतनी तगड़ी बढ़त के पीछे कई कारण गिनाए जा सकते हैं। पहला, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में निरंतर विस्तार हो रहा है, जिससे कंपनियों की कमाई बढ़ी है। दूसरा, सरकार द्वारा डिजिटल निगरानी तंत्र को मजबूत किए जाने के बाद कर चोरी की गुंजाइश काफी सीमित हो गई है। तीसरा, पिछले कुछ वर्षों में कॉर्पोरेट टैक्स दरों में की गई कटौती ने अधिक कंपनियों को समय पर कर भुगतान के लिए प्रोत्साहित किया है।

Direct Tax: व्यक्तिगत करदाताओं से भी मिला अच्छा योगदान

कॉर्पोरेट सेक्टर के अलावा व्यक्तिगत करदाताओं और हिंदू अविभाजित परिवारों यानी एचयूएफ से होने वाली कर वसूली में भी उल्लेखनीय इजाफा देखने को मिला है। नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स श्रेणी में 5.91 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है और यह आंकड़ा तकरीबन 10.03 लाख करोड़ रुपये तक जा पहुंचा है। इसका सीधा अर्थ यह है कि देश में वेतनभोगी वर्ग, पेशेवर और स्वरोजगार करने वाले लोगों की कमाई में इजाफा हो रहा है और वे ईमानदारी से अपना कर चुका रहे हैं।

पिछले कुछ वर्षों में इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने वालों की तादाद में लगातार बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने टैक्स भरने की प्रक्रिया को सरल और डिजिटल बनाया है, जिसके चलते अब छोटे शहरों और कस्बों के करदाता भी आसानी से अपना रिटर्न फाइल कर रहे हैं। इसके अलावा नई कर व्यवस्था में मिलने वाली छूट ने भी बड़ी संख्या में लोगों को टैक्स भुगतान की तरफ आकर्षित किया है।

सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स में ज्यादा हलचल नहीं

शेयर बाजार से जुड़े लेनदेन पर लगने वाले सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स यानी एसटीटी के मोर्चे पर इस बार कोई खास उतार-चढ़ाव नहीं दिखा। एक अप्रैल से दस फरवरी के बीच एसटीटी संग्रह 50,279 करोड़ रुपये रहा, जो बीते वित्त वर्ष की समान अवधि के लगभग बराबर है। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि शेयर बाजार में कारोबारी गतिविधियां स्थिर रही हैं और निवेशकों ने इस दौरान बड़ी खरीद-बिक्री से कुछ हद तक दूरी बनाए रखी।

Direct Tax: कुल सकल कर संग्रह पहुंचा 22.78 लाख करोड़ के करीब

रिफंड घटाने से पहले के कुल आंकड़े यानी ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन की बात करें तो यह 4.09 फीसदी की बढ़त के साथ 22.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें सकल कॉर्पोरेट टैक्स की हिस्सेदारी 10.88 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि सकल नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स का योगदान 11.39 लाख करोड़ रुपये रहा। इन दोनों श्रेणियों में नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स का हिस्सा कॉर्पोरेट टैक्स से अधिक है, जो दर्शाता है कि व्यक्तिगत करदाताओं का सरकारी खजाने में योगदान बढ़ता जा रहा है।

दूसरी तरफ कर रिफंड के आंकड़ों में 18.82 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है और यह 3.34 लाख करोड़ रुपये रहा। रिफंड में यह कमी नेट टैक्स कलेक्शन को ऊपर ले जाने में सहायक रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि रिफंड में गिरावट का मतलब यह भी हो सकता है कि करदाता पहले के मुकाबले अधिक सटीक तरीके से अपना कर निर्धारण कर रहे हैं, जिससे अतिरिक्त भुगतान और उसके बाद रिफंड मांगने की स्थिति कम हो रही है।

बजट लक्ष्य की प्राप्ति कितनी संभव

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान में डायरेक्ट टैक्स वसूली का लक्ष्य 24.84 लाख करोड़ रुपये रखा है। अभी तक 19.44 लाख करोड़ रुपये का संग्रह हो चुका है, जिसका अर्थ है कि शेष डेढ़ महीने में करीब 5.40 लाख करोड़ रुपये और जुटाने होंगे। सामान्य तौर पर वित्त वर्ष के अंतिम महीने यानी मार्च में एडवांस टैक्स की अंतिम किस्त जमा होती है, जिसके चलते कर संग्रह में तेज उछाल आता है। ऐसे में जानकारों का अनुमान है कि सरकार अपने निर्धारित लक्ष्य को हासिल कर सकती है या उसके काफी करीब पहुंच सकती है।

Direct Tax: समझिए डायरेक्ट टैक्स का पूरा गणित

ऐसे पाठक जो कर व्यवस्था की बारीकियों से पूरी तरह परिचित नहीं हैं, उनके लिए यह जानना जरूरी है कि डायरेक्ट टैक्स आखिर होता क्या है। सरल भाषा में कहें तो यह वह कर है जो सीधे उस व्यक्ति या संस्था पर लगता है जिसे इसे चुकाना होता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका बोझ किसी अन्य पर नहीं डाला जा सकता। जैसे आपकी तनख्वाह पर जो इनकम टैक्स कटता है, वह आप ही चुकाते हैं और उसे किसी और से नहीं वसूल सकते। इसी तरह कंपनियां अपने मुनाफे पर कॉर्पोरेट टैक्स देती हैं और संपत्ति रखने वाले लोग संपत्ति कर अदा करते हैं। यह प्रणाली इनडायरेक्ट टैक्स जैसे जीएसटी से बिल्कुल अलग है, जहां कर का भार अंततः उपभोक्ता पर पड़ता है।

कुल मिलाकर ये आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती और कर प्रशासन की बढ़ती दक्षता को रेखांकित करते हैं। आने वाले हफ्तों में जब वित्त वर्ष का समापन होगा, तब अंतिम तस्वीर और भी स्पष्ट होगी कि सरकार राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने में कितनी कामयाब रही।

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