धार भोजशाला विवाद पर आज से इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई, ASI सर्वे रिपोर्ट दोनों पक्षों को सौंपी जाएगी

सुप्रीम कोर्ट के 22 जनवरी के आदेश पर शुरू होगी सुनवाई, दो हफ्ते में दाखिल करनी होगी आपत्तियां, 17000 अवशेष और 96 मूर्तियां मिली थीं सर्वे में

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Dhar Bhojshala Dispute: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में आज एक महत्वपूर्ण मोड़ आने वाला है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सोमवार यानी 16 फरवरी 2026 से इस मामले की सुनवाई प्रारंभ होगी। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच के समक्ष यह प्रकरण क्रम संख्या 62 पर सूचीबद्ध किया गया है।

यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा 22 जनवरी 2026 को दिए गए आदेश के अनुसार शुरू हो रही है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस सुनवाई के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा भोजशाला में किए गए सर्वे की रिपोर्ट खुली अदालत में पेश की जाएगी और उसकी प्रति दोनों पक्षों को उपलब्ध कराई जाएगी। यह रिपोर्ट भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर चल रहे विवाद में निर्णायक साबित हो सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं पूरे मामले के बारे में।

Dhar Bhojshala Dispute: भोजशाला विवाद क्या है?

धार जिले में स्थित भोजशाला एक प्राचीन ऐतिहासिक स्मारक है जिसको लेकर हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच दशकों से विवाद चल रहा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मूल रूप से देवी सरस्वती (वाग्देवी) का मंदिर है, जिसे परमार वंश के राजा भोज ने 11वीं शताब्दी में बनवाया था। यहां संस्कृत शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। हिंदू पक्ष के अनुसार, बाद में मुगल आक्रमणकारियों ने इस मंदिर को नष्ट कर दिया और उसके कुछ हिस्सों का उपयोग करके कमाल मौला मस्जिद का निर्माण किया।

दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यह स्थल मूल रूप से कमाल मौला की दरगाह और मस्जिद है, जिसका निर्माण दिलावर खान गौरी द्वारा 14वीं-15वीं शताब्दी में किया गया था। उनका कहना है कि यह एक इस्लामी धार्मिक स्थल है और सदियों से यहां नमाज अदा की जाती रही है।

वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इस स्थल का रखरखाव करता है। 2003 के एक आदेश के अनुसार, हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार को यहां पूजा करने की अनुमति है और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति है। हालांकि, इस व्यवस्था से दोनों पक्ष संतुष्ट नहीं हैं और दोनों अपने-अपने दावों को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाते रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट का 22 जनवरी 2026 का आदेश

इस विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस नामक संगठन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके भोजशाला की वास्तविक धार्मिक पहचान स्थापित करने और ASI सर्वे की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। इस मामले में हाईकोर्ट ने ASI को सर्वे करने का आदेश दिया था। सर्वे पूरा होने के बाद, ASI ने अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंप दी थी।

मुस्लिम पक्ष ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने 22 जनवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश दिए:

  1. ASI सर्वे रिपोर्ट खुली अदालत में पेश की जाए: रिपोर्ट को गोपनीय रखने की बजाय, इसे खुली अदालत में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

  2. दोनों पक्षों को रिपोर्ट की प्रति दी जाए: हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों को रिपोर्ट की एक-एक प्रति उपलब्ध कराई जाए ताकि वे इसका अध्ययन कर सकें।

  3. विशेषज्ञों द्वारा निरीक्षण की अनुमति: यदि रिपोर्ट का कोई हिस्सा सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है (जैसे कुछ तकनीकी या संवेदनशील जानकारी), तो दोनों पक्षों को अपने विशेषज्ञों और वकीलों की उपस्थिति में उसका निरीक्षण करने की अनुमति दी जाए।

  4. दो हफ्ते में आपत्तियां दाखिल करने का समय: रिपोर्ट मिलने के बाद, दोनों पक्षों को अपनी आपत्तियां, सिफारिशें और प्रतिक्रियाएं दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया जाएगा।

  5. अंतिम सुनवाई में सभी आपत्तियों पर विचार: इसके बाद हाईकोर्ट अंतिम सुनवाई में सभी आपत्तियों और तर्कों पर विधिवत विचार करेगा।

  6. भोजशाला में कोई परिवर्तन नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय आने तक भोजशाला की संरचना और स्वरूप में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाएगा। 7 अप्रैल 2003 को ASI महानिदेशक द्वारा जारी आदेश (जिसमें हिंदुओं को मंगलवार और मुस्लिमों को शुक्रवार की पूजा-नमाज की अनुमति है) यथावत प्रभावी रहेगा।

Dhar Bhojshala Dispute: आज की सुनवाई में क्या होगा

सोमवार 16 फरवरी को इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ में होने वाली सुनवाई में निम्नलिखित कार्रवाई होने की उम्मीद है:

  1. ASI सर्वे रिपोर्ट की प्रस्तुति: ASI द्वारा तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट को खुली अदालत में पेश किया जाएगा। इस रिपोर्ट में भोजशाला परिसर में की गई खुदाई, मिले अवशेषों, संरचनात्मक विश्लेषण और ऐतिहासिक निष्कर्षों का विस्तृत विवरण होगा।

  2. दोनों पक्षों को रिपोर्ट की प्रति: याचिकाकर्ता हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और प्रतिवादी मुस्लिम पक्ष दोनों को रिपोर्ट की प्रति सौंपी जाएगी।

  3. प्रारंभिक तर्क: याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और अधिवक्ता विनय जोशी पैरवी करेंगे। वे ASI सर्वे के निष्कर्षों को आधार बनाकर यह तर्क रखेंगे कि भोजशाला मूल रूप से वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर है। मुस्लिम पक्ष के वकील भी अपने तर्क रखेंगे।

  4. आगे की प्रक्रिया: अदालत दोनों पक्षों को रिपोर्ट का अध्ययन करने और दो हफ्ते में अपनी आपत्तियां दाखिल करने का निर्देश देगी।

ASI सर्वे के प्रमुख निष्कर्ष

हालांकि ASI सर्वे की पूरी रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सर्वे में निम्नलिखित महत्वपूर्ण खोजें हुई हैं:

  1. 17,000 अवशेष: सर्वे के दौरान लगभग 17,000 पुरातात्विक अवशेष मिले हैं।

  2. 96 मूर्तियां: 96 मूर्तियां प्राप्त हुई हैं, जो संभवतः हिंदू देवी-देवताओं की हैं।

  3. 25 फीट से अधिक खुदाई में दीवार का ढांचा: गहरी खुदाई में एक प्राचीन दीवार की संरचना मिली है, जो संभवतः मूल मंदिर की है।

  4. पीछे के खेत क्षेत्र से मूर्तियां: भोजशाला के पीछे के खेत क्षेत्र से भी मूर्तियां बरामद की गई हैं।

  5. 106 स्तंभ: चारों दिशाओं में कुल 106 स्तंभ पाए गए हैं।

  6. 82 भित्ति चित्रयुक्त स्तंभ: इनमें से 82 स्तंभों पर भित्ति चित्र (नक्काशी) है, जो हिंदू वास्तुकला की विशेषता है।

  7. 33 प्राचीन सिक्के: 33 पुराने सिक्के मिले हैं, जो 10वीं-11वीं शताब्दी और परमार युग के बताए जा रहे हैं। परमार वंश के राजा भोज ने 11वीं सदी में धार पर शासन किया था।

ये निष्कर्ष हिंदू पक्ष के दावे को मजबूती प्रदान कर सकते हैं कि भोजशाला मूल रूप से एक हिंदू मंदिर था। हालांकि, मुस्लिम पक्ष इन निष्कर्षों को चुनौती दे सकता है।

Dhar Bhojshala Dispute: निष्कर्ष

धार भोजशाला विवाद पर आज से इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू होना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। ASI सर्वे रिपोर्ट के सार्वजनिक होने से विवाद में स्पष्टता आएगी। दोनों पक्षों को रिपोर्ट मिलने और दो हफ्ते में आपत्तियां दाखिल करने का मौका मिलेगा। अदालत का अंतिम फैसला इस ऐतिहासिक विवाद को सुलझा सकता है।

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