SBI में 5 लाख जमा करो और पाओ डेढ़ लाख से ज्यादा पक्का रिटर्न, बिना किसी जोखिम के!

वरिष्ठ नागरिकों को 6.80% ब्याज, 4 साल में 1 लाख 54 हजार से ज्यादा पक्का रिटर्न, बिना जोखिम के

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SBI fixed deposit: अगर आप बिना किसी जोखिम के अपने पैसे को सुरक्षित रखते हुए अच्छा रिटर्न कमाना चाहते हैं तो भारतीय स्टेट बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है। सिर्फ 5 लाख रुपये जमा करने पर आपको मेच्योरिटी पर 1 लाख 54 हजार से भी अधिक का गारंटीड रिटर्न मिलता है।

SBI fixed deposit: एफडी क्या है और यह क्यों है फायदेमंद

आज के दौर में जब शेयर बाजार में उतार चढ़ाव की कोई सीमा नहीं है और निवेशक हर दिन अपनी मेहनत की कमाई को जोखिम में डालने से डरते हैं, ऐसे में फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी एक ऐसा विकल्प है जो पुराने जमाने से लेकर आज तक भरोसेमंद बना हुआ है। भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई देश का सबसे बड़ा और सबसे भरोसेमंद बैंक है। इसकी एफडी स्कीम में निवेश करने वाले लोगों को न तो बाजार के उतार चढ़ाव की चिंता करनी पड़ती है और न ही किसी धोखाधड़ी का डर रहता है। एसबीआई की एफडी सीधे तौर पर एक गारंटीड रिटर्न देने वाली स्कीम है।

फिक्स्ड डिपॉजिट एक ऐसा निवेश साधन है जिसमें आप एकमुश्त रकम एक निश्चित समय के लिए बैंक में जमा करते हैं और उस पर पहले से तय ब्याज दर के अनुसार कमाई होती है। इसमें न तो कोई बाजार जोखिम होता है और न ही कोई अनिश्चितता। जितना ब्याज तय होता है उतना ही मिलता है। एसबीआई में जमा रकम पूरी तरह सुरक्षित रहती है क्योंकि यह एक सरकारी बैंक है और इसमें जमा पैसे का शेयर बाजार से कोई संबंध नहीं होता।

SBI fixed deposit: एसबीआई की मौजूदा ब्याज दरें क्या हैं

एफडी खासतौर पर उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो रिटायरमेंट के करीब हैं या जो अपनी जमापूंजी को बिना किसी जोखिम के बढ़ाना चाहते हैं। सीनियर सिटीजन यानी वरिष्ठ नागरिकों को एसबीआई की एफडी पर सामान्य ग्राहकों की तुलना में अधिक ब्याज दर का लाभ मिलता है जो इसे और भी आकर्षक बनाता है।

वर्तमान में भारतीय स्टेट बैंक 3 वर्ष से अधिक लेकिन 5 वर्ष से कम अवधि की एफडी पर सामान्य ग्राहकों को 6.30 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर का लाभ दे रहा है। वहीं वरिष्ठ नागरिकों यानी सीनियर सिटीजन को इसी अवधि के लिए 6.80 प्रतिशत की ब्याज दर मिल रही है। इसका मतलब है कि बुजुर्ग निवेशकों को 0.50 प्रतिशत का अतिरिक्त लाभ मिलता है जो लंबी अवधि में एक बड़ी रकम बन जाता है। एसबीआई में अधिकतम 10 साल तक की अवधि के लिए एफडी करवाई जा सकती है।

SBI fixed deposit: 5 लाख जमा करने पर कितना मिलेगा रिटर्न

अगर कोई वरिष्ठ नागरिक 4 साल के लिए एसबीआई में 5 लाख रुपये की एफडी कराता है तो 6.80 प्रतिशत की ब्याज दर पर तिमाही कंपाउंडिंग के आधार पर उसे मेच्योरिटी के समय ब्याज के रूप में 1 लाख 54 हजार 795 रुपये मिलेंगे। इस तरह 4 साल बाद उनके पास कुल 6 लाख 54 हजार 795 रुपये का फंड तैयार हो जाएगा। यह बिना किसी जोखिम के मिलने वाला एक निश्चित और गारंटीड रिटर्न है।

वहीं अगर कोई सामान्य ग्राहक यानी जो सीनियर सिटीजन की श्रेणी में नहीं आता वह 4 साल के लिए 5 लाख रुपये की एफडी कराता है तो उसे 6.30 प्रतिशत की ब्याज दर के आधार पर तिमाही कंपाउंडिंग पर मेच्योरिटी पर 1 लाख 42 हजार 36 रुपये का रिटर्न मिलेगा। इस प्रकार 4 साल बाद उसके पास कुल 6 लाख 42 हजार 36 रुपये होंगे। यह भी एक शानदार और जोखिम रहित रिटर्न है।

SBI fixed deposit: तिमाही कंपाउंडिंग से कैसे बढ़ता है फायदा

एसबीआई की एफडी में ब्याज की गणना तिमाही कंपाउंडिंग के आधार पर होती है। इसका मतलब है कि हर तीन महीने में आपके मूलधन पर जो ब्याज बनता है वह आपकी कुल जमा रकम में जुड़ जाता है और अगली तिमाही में उस बढ़ी हुई रकम पर ब्याज मिलता है। इस चक्रवृद्धि ब्याज के कारण साधारण ब्याज की तुलना में कमाई अधिक होती है और समय के साथ आपकी रकम तेजी से बढ़ती है।

एसबीआई की एफडी में ब्याज भुगतान के कई विकल्प उपलब्ध हैं। आम तौर पर ब्याज हर तिमाही के आधार पर जमा की तारीख से जोड़ा जाता है या मेच्योरिटी के समय मूलधन के साथ एकमुश्त दिया जाता है।

SBI fixed deposit: नियमित आय का स्रोत और ब्याज के विकल्प

हालाँकि अगर निवेशक चाहे तो 12 महीने या उससे अधिक अवधि की एफडी पर मासिक, छमाही या वार्षिक आधार पर ब्याज लेने का विकल्प भी चुन सकता है। यह सुविधा उन लोगों के लिए बेहद काम की है जिन्हें नियमित मासिक आय की जरूरत होती है जैसे कि रिटायर्ड लोग जो अपनी जमापूंजी से हर महीने एक तय आमदनी पाना चाहते हैं। इस तरह एफडी एक नियमित आय का स्रोत भी बन सकती है।

SBI fixed deposit: एफडी कराने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

एसबीआई में एफडी कराने से पहले कुछ जरूरी बातें ध्यान में रखनी चाहिए। एफडी पर मिलने वाला ब्याज आपकी कुल आय में जुड़ता है और इस पर आयकर स्लैब के अनुसार कर देना पड़ सकता है। अगर एक वित्त वर्ष में ब्याज आय एक निश्चित सीमा से अधिक हो जाती है तो बैंक टीडीएस काट लेता है।

इसके अलावा एफडी की अवधि से पहले पैसे निकालने पर जुर्माने का प्रावधान भी होता है जिसे प्रीमेच्योर विदड्रॉल पेनल्टी कहते हैं। इसलिए निवेश करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आपको उस अवधि तक उस रकम की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर आपके पास लंबी अवधि के लिए अतिरिक्त रकम है और आप बिना जोखिम के उसे बढ़ाना चाहते हैं तो एसबीआई की एफडी आपके लिए सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्पों में से एक है।

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