दिल्ली में महिला सुरक्षा के मामले में सुधार, चार वर्षों में अपराधों में 12 फीसदी की गिरावट
2021 से 2024 तक महिलाओं के खिलाफ अपराधों में लगातार कमी, छेड़छाड़ में 20% से अधिक सुधार
Delhi News: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से महिला सुरक्षा को लेकर उत्साहजनक आंकड़े सामने आए हैं। हाल में प्रकाशित दिल्ली सांख्यिकी पुस्तिका 2025 के अनुसार पिछले चार वर्षों में महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों में निरंतर कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2021 से 2024 के बीच दर्ज प्रकरणों की कुल संख्या में करीब 12 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
चार साल में लगातार घटे अपराध के मामले
दिल्ली सांख्यिकी पुस्तिका 2025 के विश्लेषण से पता चलता है कि महिलाओं के खिलाफ विभिन्न प्रकार के अपराधों में साल दर साल कमी आई है। इन अपराधों में दुष्कर्म, दहेज हत्या, छेड़छाड़ और अन्य हिंसक घटनाएं शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक साल 2021 में 5208 मामले दर्ज किए गए थे जो 2022 में घटकर 5119 हो गए। यह गिरावट का सिलसिला आगे भी जारी रहा।
वर्ष 2023 में दर्ज मामलों की संख्या 4982 रही जबकि 2024 में यह और घटकर 4584 पर आ गई। यदि इन चार सालों के आंकड़ों की तुलना करें तो स्पष्ट होता है कि 2024 महिला सुरक्षा की दृष्टि से सबसे बेहतर वर्ष रहा। इस अवधि में दर्ज मामलों की संख्या सबसे न्यूनतम रही जो एक उत्साहवर्धक संकेत है।
Delhi News: छेड़छाड़ की घटनाओं में उल्लेखनीय सुधार
रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण और उत्साहजनक सुधार छेड़छाड़ के प्रकरणों में देखा गया है। सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के साथ होने वाली छेड़खानी और अभद्र व्यवहार की घटनाओं में 2021 की तुलना में 20 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि राजधानी में महिलाएं पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित महसूस कर रही हैं।
विस्तृत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में छेड़छाड़ के 2551 प्रकरण दर्ज हुए थे। अगले साल 2022 में यह संख्या मामूली घटकर 2501 रही। साल 2023 में और सुधार हुआ और मामले 2345 तक आ गए। वर्ष 2024 में यह गिरावट और तेज हुई और केवल 2037 प्रकरण दर्ज किए गए। यह चार वर्षों में लगभग 514 मामलों की कमी है जो एक बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है।
पुलिस की सक्रिय उपस्थिति का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सकारात्मक बदलाव के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक काम कर रहे हैं। सबसे प्रमुख कारण है संवेदनशील और अपराध प्रवण इलाकों में पुलिस की बढ़ती उपस्थिति। दिल्ली पुलिस ने विभिन्न क्षेत्रों में पिकेट चेकिंग बढ़ाई है और गश्त को मजबूत किया है।
रात्रि के समय विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा के लिए गश्ती दल तैनात किए गए हैं। सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो स्टेशनों पर भी पुलिस की नियमित मौजूदगी बढ़ाई गई है। इसके अलावा महिला पुलिसकर्मियों की संख्या में वृद्धि की गई है जिससे महिलाएं अपनी शिकायत अधिक सहजता से दर्ज करा सकती हैं।
Delhi News: तकनीकी निगरानी में सुधार
राजधानी में सीसीटीवी कैमरों का व्यापक नेटवर्क स्थापित किया गया है जो अपराध रोकने में अहम भूमिका निभा रहा है। हजारों की संख्या में कैमरे सड़कों, चौराहों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए हैं। इन कैमरों की रिकॉर्डिंग से अपराधियों की पहचान करना आसान हो गया है और यह अपराध को रोकने में निवारक का काम भी कर रहे हैं।
इसके साथ ही स्ट्रीट लाइटिंग व्यवस्था में भी उल्लेखनीय सुधार किया गया है। अंधेरे इलाकों में नई लाइटें लगाई गई हैं जिससे रात के समय सुरक्षा की भावना बढ़ी है। अच्छी रोशनी वाली सड़कों पर अपराधी कम सक्रिय होते हैं और महिलाएं भी निर्भीक होकर आवागमन कर सकती हैं।
जागरूकता अभियानों की भूमिका

महिलाओं को उनके अधिकारों और उपलब्ध सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाए गए हैं। दिल्ली पुलिस द्वारा विकसित हिम्मत प्लस ऐप जैसी पहल ने महिलाओं को तत्काल सहायता प्राप्त करने का माध्यम दिया है। इस ऐप के जरिए महिलाएं आपातकालीन स्थिति में एक बटन दबाकर मदद मांग सकती हैं।
विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए गए हैं। महिलाओं को कानूनी अधिकारों की जानकारी दी जा रही है और उन्हें किसी भी प्रकार के उत्पीड़न की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस जागरूकता का परिणाम यह हुआ है कि महिलाएं अब डरकर चुप नहीं रहतीं बल्कि अपराध की रिपोर्ट करने में आगे आती हैं।
Delhi News: न्यायिक प्रक्रिया में तेजी
फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना और पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल करने की गति में सुधार ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अब महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों की सुनवाई तेजी से होती है और दोषियों को शीघ्र सजा मिलती है। त्वरित न्याय से अपराधियों में भय का माहौल बना है और वे दुस्साहस करने से पहले दस बार सोचते हैं।
पुलिस विभाग ने जांच प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया है और साक्ष्य संग्रहण में वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग बढ़ाया है। फोरेंसिक तकनीक के इस्तेमाल से अपराधियों को पकड़ना और उनके खिलाफ मजबूत मामला बनाना आसान हो गया है।
सामाजिक मानसिकता में बदलाव
केवल कानूनी और प्रशासनिक उपायों के अलावा सामाजिक मानसिकता में भी धीरे धीरे बदलाव आ रहा है। महिलाओं के प्रति सम्मान और समानता की भावना को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। शैक्षणिक संस्थानों में लैंगिक संवेदनशीलता पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण के संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं। प्रभावशाली व्यक्तित्व और सेलिब्रिटी इस मुद्दे पर आवाज उठा रहे हैं जिससे युवा पीढ़ी में जागरूकता बढ़ रही है।
Delhi News: आगे की चुनौतियां
हालांकि ये आंकड़े उत्साहवर्धक हैं लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। 4584 मामले भी एक बड़ी संख्या है और यह दर्शाता है कि अभी भी हजारों महिलाएं हिंसा और उत्पीड़न का सामना कर रही हैं। कई मामले अभी भी रिपोर्ट नहीं किए जाते क्योंकि पीड़ित महिलाएं सामाजिक कलंक या प्रतिशोध के डर से चुप रह जाती हैं।
समाज में गहराई से जड़ें जमाई पितृसत्तात्मक मानसिकता को बदलने में अभी भी समय लगेगा। महिलाओं की सुरक्षा केवल पुलिस या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि यह पूरे समाज का दायित्व है। प्रत्येक नागरिक को महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार करना होगा और किसी भी प्रकार के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठानी होगी।
दिल्ली में पिछले चार वर्षों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 12 प्रतिशत की कमी निश्चित रूप से एक सकारात्मक संकेत है। यह दर्शाता है कि सही दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं और उनके परिणाम सामने आ रहे हैं। लेकिन लक्ष्य शून्य अपराध का होना चाहिए जहां प्रत्येक महिला पूर्णतः सुरक्षित महसूस करे।
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